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सूरह 10–24

तीसरा अध्याय

विषय

क़ुरैश को सचेत करना

पैग़ंबर मुहम्मद (स.) और उनके मानने वालों को सत्य के विजयी होने की शुभ भविष्यवाणी और उनका शुद्धिकरण (तज़्कियह) व परिष्करण (तत्हीर)

परिचय

यह पवित्र क़ुरआन का तीसरा अध्याय है। इसमें 'यूनुस' (10) से 'अन्-नूर' (24) तक पंद्रह सूरतें हैं। इन सूरतों की विषय-वस्तु से मालूम होता है कि इनमें से पहली चौदह सूरतें मक्का में और अंतिम सूरह — अन्-नूर — मक्का से मदीना प्रवास (हिज्रत) के बाद मदीना में अवतरित हुई है।

पवित्र क़ुरआन के अन्य अध्यायों की तरह, इस अध्याय में भी यह बात ध्यान में रखी गई है कि यह मक्की सूरतों से शुरू होता है और एक मदनी सूरह पर समाप्त होता है।

इसमें मूल रूप से मक्का के क़ुरैश क़बीले के लोगों को संबोधित किया गया है। यहूदियों व ईसाइयों (अहल-ए-किताब) को कुछ अवसरों पर उन्हीं के साथ गौण रूप से सचेत किया गया है, क्योंकि इन सूरतों के उतारे जाने के समय वे भी क़ुरैश का समर्थन और पैग़ंबर मुहम्मद (स.) का विरोध करने के लिए मैदान में आ चुके थे। हालांकि, शुद्धिकरण (तज़्कियह) और शुभ भविष्यवाणी (बशारत) के विषयों में, पैग़ंबर मुहम्मद (स.) और उनके अनुयायियों को भी जगह-जगह संबोधित किया गया है, बल्कि सूरह 'ताहा' (20) में तो पूर्ण रूप से नबी (स.) ही को संबोधित किया गया है।

इस तीसरे अध्याय का मुख्य विषय क़ुरैश को सचेत करना, पैग़ंबर मुहम्मद (स.) और उनके अनुयायियों को अरब की धरती में सत्य की विजय की शुभ सूचना देना और उनका शुद्धिकरण (तज़्कियह) व परिष्करण (तत्हीर) है, जिसमें सत्य की विजय की भविष्यवाणी का पहलू प्रमुख है।

इस अध्याय की सूरतें