सूरह 13
अर्-रअद्
मक्की · 43 आयतें · 21 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह 'अलिफ़ लाम मीम रा' है। ये ईश्वरीय ग्रंथ की आयतें हैं और जो कुछ तुम्हारे प्रभु की ओर से तुम्हारी ओर उतारा गया है, वह (पूर्णतः) सत्य है, परंतु (तुम्हारी क़ौम में से) अधिकांश लोग मान नहीं रहे हैं।
परमेश्वर ही है जिसने समस्त आकाशों को ऐसे स्तंभों के बिना ऊँचा खड़ा किया है जो तुम्हें दिखाई देते हों, फिर वह अपने सिंहासन पर विराजमान हुआ और उसने सूरज और चाँद को एक नियम में बांध दिया। इनमें से प्रत्येक एक निर्धारित समय के लिए घूम रहा है। वही सम्पूर्ण जगत की व्यवस्था चला रहा है। वह अपनी इन निशानियों की व्याख्या करता है, इसलिए की तुम अपने प्रभु के मिलने पर विश्वास करो।
और वही है, जिसने धरती को बिछाया और उस में पर्वतों के खूँटे गाड़े और नदियां बहा दीं, और उस में हर प्रकार के फलों के जोड़े उत्पन्न किए। वह रात को (चादर के समान) दिन पर ओढ़ा देता है। निस्संदेह इन सब बातों में उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं जो चिंतन करें।1
टिप्पणियाँ 1
- अर्थात जिस प्रकार जानवरों के जोड़े होते हैं, उसी प्रकार परमेश्वर ने पेड़ों के भी नर और मादा उत्पन्न किए हैं, जिनसे विभिन्न प्रकार के फल पैदा होते हैं। ↩
और धरती में पास-पास के खंड हैं, अंगूर के बाग़ हैं, खेती है, खजूर के पेड़ हैं, जिन में जुड़वा भी हैं और इकहरे भी। सब एक ही जल से सींचे जाते हैं, परंतु उनके फलों में हम एक को दूसरे पर श्रेष्ठता दे देते हैं। निस्संदेह इन सब चीज़ों में उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं जो बुद्दि से काम लें।
अब यदि आश्चर्य करो तो आश्चर्य के लायक तो उनकी यह बात है कि जब हम मिट्टी बन जाएँगे, तो क्या हम पुनः जीवित किए जाएँगे? यही लोग हैं जिन्होंने अपने प्रभु को नकार दिया है। यही हैं जिनकी गरदनों में बेड़ियाँ पड़ी हुई हैं। यही नरक के लोग हैं, ये उसमें सदा रहेंगे।
ये भलाई से पहले तुमसे बुराई के लिए जल्दी मचा रहे हैं, यद्यपि (इस आचरण पर) भयानक दण्ड के उदाहरण इनसे पूर्व बीत चुके हैं। सत्य यह है कि तेरा प्रभु लोगों के दुष्कर्मों पर भी उन्हें अनदेखा करने वाला है। और इसके साथ यह भी सत्य है कि तेरा प्रभु कठोर दण्ड देने वाला है।
ये नकारने वाले कहते हैं कि इस व्यक्ति पर इसके प्रभु की ओर से (दंड की) कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई? (इन्हें बताओ कि यह तुम्हारा काम नहीं है, इसलिए कि) तुम तो केवल सचेत करने वाले हो और प्रत्येक क़ौम के लिए इसी प्रकार एक मार्गदर्शक आता रहा है। (इन पर दण्ड के लिए कोई निशानी कब व्यक्त होगी? इसे परमेश्वर जानता है, जैसे) हर महिला के गर्भ को परमेश्वर जानता है और जो कुछ गर्भों में घटता और बढ़ता है, उसे भी जानता है। उसके पास हर चीज़ एक गणना के अनुसार है। वह परोक्ष और प्रत्यक्ष का ज्ञाता है, सबसे महान है, सबसे श्रेष्ठ है। उसके ज्ञान में बराबर हैं जो तुम में से चुपके से बात करें और जो पुकार कर करें और जो रात (के अंधेरे) में छिपे हुए हों और जो दिन में चल रहे हों। उनके सामने और पीछे से उनपर ईश्वरीय निर्देशों के अभिरक्षक लगे रहते हैं जो उनका निरीक्षण करते हैं। (ये जल्दी न मचाएँ), परमेश्वर किसी क़ौम के साथ अपना मामला तब तक नहीं बदलता, जब तक वे स्वयं अपना आचरण नहीं बदलते और जब परमेश्वर किसी क़ौम को दंडित करने का निर्णय कर लेता है तो वह किसी के टालने से नहीं टल सकता और न परमेश्वर के विरुद्ध उनका कोई सहायक हो सकता है।
वही है जो तुम्हें बिजली दिखाता है जिससे भय भी पैदा होता है और आशा भी और वही (पानी से) भरे हुए बादल उठाता है। उनकी गरज, उसके भय से, उसकी स्तुति के साथ उसकी पवित्रता का जाप करती है, और फ़रिश्ते भी इसी प्रकार उसके डर से उसकी स्तुति के साथ उसकी पवित्रता का जाप करते हैं। वह कड़कती हुई बिजलियाँ भेजता है, फिर जिस पर चाहता है, उन्हें (कभी-कभी ठीक उस दशा में) गिरा देता है जब कि वे परमेश्वर के बारे में झगड़ रहे होते हैं। सत्य यह है कि वह बहुत शक्तिशाली है।
उसी को पुकारना उचित है। उसके अतिरिक्त ये जिन्हें पुकारते हैं, वे इससे अधिक इनकी सहायता नहीं कर सकते कि कोई अपने दोनों हाथ पानी की ओर बढ़ाए कि वह उसके मुँह तक पहुंच जाए, यद्यपि वह किसी भी प्रकार से उसके मुँह तक न पहुंच सके। सत्य यह है कि इन नकारने वालों की पुकार केवल एक व्यर्थ पुकार है।
समस्त आकाशों और धरती में जो भी है, सब चाहे-अनचाहे परमेश्वर ही को सज्दा कर रहे हैं और सुबह और शाम उनकी छाया भी। इनसे पूछो, धरती और समस्त आकाशों का स्वामी कौन है? कह दो, परमेश्वर। इनसे पूछो, क्या फिर भी तुमने उसके अतिरिक्त ऐसे संरक्षक बना रखे हैं जो स्वयं अपने लिए भी किसी फ़ायदे या नुक़सान का अधिकार नहीं रखते? इनसे पूछो, क्या अंधे और आँखों वाले, दोनों एक समान हो जाएँगे? या अँधेरा और प्रकाश, दोनों बराबर होंगे? या फिर उन्होंने परमेश्वर के ऐसे सहभागी बनाए हैं जिन्होंने उसी प्रकार उत्पत्ति की है, जैसे परमेश्वर ने उत्पत्ति की है, तो उनपर सृजन का विषय संदेहास्पद हो गया है? इन्हें बता दो कि सभी चीज़ों का रचयिता परमेश्वर ही है और वह अद्वितीय है, सब पर भारी है।
उसने आकाश से पानी बरसाया, तो घाटियां अपने अपने सामर्थ्य के अनुसार बह निकलीं और बाढ़ ने उभरते झाग को उठा लिया, और इसी प्रकार का झाग उन चीज़ों के अंदर भी उभरता है जिन्हें गहने या (इसी प्रकार के) अन्य पदार्थ बनाने के लिए आग में पिघलाते हैं। परमेश्वर इसी प्रकार सत्य और असत्य को टकराता है। तो झाग तो व्यर्थ चला जाता है और जो चीज़ लोगों को लाभ देनी वाली है, वह धरती में ठहर जाती है। परमेश्वर इसी प्रकार अनेक उदाहरण देता है, (जिनसे तुम इस वास्तविकता को भी समझ सकते हो कि) जिन लोगों ने अपने प्रभु के आह्वान को स्वीकार किया, उनका अंत अच्छा है और जिन्होंने उसके आह्वान को स्वीकार नहीं किया, (उनकी स्थिति यह होगी कि) यदि उन्हें वह सब कुछ मिल जाए जो पृथ्वी में है और उसके बराबर और भी तो सब अपनी मुक्ति के लिए दे डालें। यही लोग हैं जिनका हिसाब बुरा और जिनका ठिकाना नरक होगा, और वह कैसा बुरा ठिकाना है!
अतः क्या जो व्यक्ति यह जानता है कि जो कुछ तुम्हारे प्रभु की ओर से तुम्हारी ओर उतारा गया है, वह सत्य है, उस व्यक्ति के बराबर हो जाएगा जो अंधा है? (यह एक स्मरण है और) स्मरण तो वही प्राप्त करते हैं जो बुद्धिजीवी हैं। — जो परमेश्वर को दिए वचन को पूरा करते हैं और अपने वचन को तोड़ते नहीं। और जो उस चीज़ को जोड़ते हैं जिसे परमेश्वर ने जोड़े रखने का आदेश दिया है और अपने प्रभु से डरते और बुरे हिसाब का भय रखते हैं। जो अपने प्रभु की प्रसन्नता प्राप्त करने में दृढ़संकल्प रहे और नमाज़ का प्रबंध किया और जो कुछ हमने उन्हें दिया, उसमें से सार्वजनिक रूप से और छिप कर दान किया और जो बुराई को भलाई से पीछे धकेलते हैं। आने वाले घर का फल उन्हीं के लिए है। सदा रहने वाले बाग़ जिनमें वे प्रवेश करेंगे और वे भी जो उनके पूर्वजों और उनकी पत्नियों और उनकी संतान में से इसके योग्य बनेंगे। फ़रिश्ते प्रत्येक द्वार से उनके पास आएंगे। और कहेंगे: तुम लोगों पर शांति हो, इसलिए कि तुम दृढ़संकल्प रहे। अतः कैसा उत्तम है यह अगले घर का अच्छा फल!1
टिप्पणियाँ 1
- यह 'रिश्ता-ए-रहम' (गर्भ के या खूनी रिश्तों) का वर्णन है। कुरआन ने जहाँ भी यह शैली अपनाई है, वहाँ संदर्भ से यह स्पष्ट है कि इससे तात्पर्य खूनी या पारिवारिक रिश्ते ही हैं। ↩
इसके विपरीत जो परमेश्वर के वचन को उसके बांध लेने के बाद तोड़ देते हैं और जिसे परमेश्वर ने जोड़ने का आदेश दिया है, उसे काटते हैं और इस प्रकार धरती में बिगाड़ फैलाते हैं, वही हैं जिनके लिए अभिशाप है और जिनके लिए उसका घर अत्यंत बुरा अंत भी है। परमेश्वर जिसको चाहता है, जीविका में समृद्धि प्रदान करता है, और जिसके लिए चाहता है, उसे घटा देता है। ये (इस सत्य को नहीं समझे) और इसी दुनिया के जीवन पर रिझे हुए हैं, यद्यपि दुनिया का यह जीवन परलोक में केवल एक घटिया पूंजी ही निकलेगी।
ये नकारने वाले कहते हैं कि इसके प्रभु की ओर से इस व्यक्ति पर कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई? इनसे कह दो, परमेश्वर जिसको चाहता है (अपने नियम अनुसार इसी प्रकार) भटका देता है और अपना मार्ग उन्हीं को दिखाता है जो उसकी ओर ध्यान करने वाले हों। जिन्होंने मान लिया और जिनके दिल परमेश्वर के इस उपदेश से संतुष्ट होते हैं। सुनो, परमेश्वर के इस उपदेश ही से दिलों को संतुष्टि प्राप्त होती हैं। जिन्होंने मान लिया और जिन्होंने अच्छे कर्म किए, उनके लिए शुभ सूचना है और अच्छा ठिकाना है।
हमने इसी प्रकार, (हे पैग़ंबर, ऐसी किसी निशानी के बिना ही) तुमको एक ऐसी क़ौम में रसूल बनाकर भेजा है, जिससे पहले कई क़ौमें चल बसी हैं, इसलिए कि तुम उन्हें वह संदेश सुना दो जो हमने तुम पर वह्य किया है, यद्यपि वे कृपालु परमेश्वर को नकार रहे हैं। इनसे कहो कि वही मेरा प्रभु है, उसके अतिरिक्त कोई उपास्य नहीं, मैंने उसी पर भरोसा किया है और (जानता हूं कि एक दिन) उसी की ओर लौटना है। सत्य यह है कियदि कोई ऐसा क़ुरआन भी होता जिससे पहाड़ चलने लगते या धरती टुकड़े हो जाती या उससे मुर्दे बोलने लगते तो क्या ये मान जाते? नहीं, यह तुम्हारा काम नहीं है (कि इन्हें निशानियाँ दिखाओ), अपितु सारा अधिकार परमेश्वर ही के हाथ में है। फिर क्या मानने वाले (यह जानकर भी इनसे) निराश नहीं हुए कि यदि परमेश्वर चाहता तो सभी मनुष्यों का मार्गदर्शन कर देता? (तुम देखते रहो), इन नकारने वालों पर लगातार कोई न कोई संकट इनके कर्मों के परिणामस्वरूप आता रहेगा या इनकी बस्ती के निकट कहीं उतरता रहेगा, यहाँ तक कि परमेश्वर का वचन पूरा हो। निस्संदेह परमेश्वर अपने वचन का उल्लंघन नहीं करेगा। तुमसे पहले भी रसूलों का मज़ाक़ उड़ाया गया तो मैंने नकारने वालों को ढील दी, फिर मैंने उनको पकड़ा तो (देखो कि) कैसा था मेरा दंड!
फिर क्या वह जो एक-एक व्यक्ति के कर्म की सूचना रखने वाला है और जो किसी कार्य का सामर्थ्य नहीं रखते, बराबर हैं और इन्होंने (इसी आधार पर) परमेश्वर के सहभागी बना लिए हैं? इनसे कहो, उनके नाम तो बताओ, क्या तुम परमेश्वर को ऐसी चीज़ की सूचना दे रहे हो जिससे वह स्वयं अपनी धरती में अनजान है या फिर ऊपरी बातें कर रहे हो? नहीं, अपितु इन नकारने वालों के लिए इनका झूठ आकर्षक बना दिया गया है और ये सत्य मार्ग से रोक दिए गए हैं। सत्य यह है किजिन्हें परमेश्वर (अपने नियम अनुसार) पथभ्रष्टता में डाल दे, उनका कोई मार्गदर्शन करने वाला नहीं है। उनके लिए दुनिया के जीवन में भी दण्ड है और परलोक का दण्ड तो इससे कहीं कठोर है और उन्हें कोई परमेश्वर से बचाने वाला न होगा।
इसके विपरीत परमेश्वर से डरने वालों के लिए जिस स्वर्ग का वादा किया गया है, उसका दृष्टांत यह है कि उसके नीचे नहरें बह रही होंगी, उसके फल नित्य और उसकी छाया अविनाशी होगी। यह उन लोगों का अंत है जो परमेश्वर से डरने वाले हैं और नकारने वालों का अंत यह है कि उनके लिए नरक की आग है।
हमने जिनको धर्मग्रंथ प्रदान किया है, वे उस चीज़ से प्रसन्न हैं जो तुम्हारी ओर उतारी गई है और तुम्हारे नकारने वालों के गुटों में ऐसे भी हैं जो उसकी कुछ बातों को नहीं मानते। तुम उनसे स्पष्ट कह दो कि मुझे आदेश दिया गया है कि परमेश्वर ही की भक्ति करूं और किसी को उसका सहभागी न बनाऊँ। मैं उसी की और बुलाता हूं ओर उसी की ओर मेरा लौटना है। हमने यह ग्रंथ इसी लिए एक राजकीय आदेश की हैसियत से अरबी में उतारा है। अब यदि तुम उस ज्ञान के बाद जो तुम्हारे पास आ चुका है, उनकी इच्छाओं का अनुसरण करोगे तो परमेश्वर के विरुद्ध न तुम्हारा कोई सहायक होगा न बचाने वाला।
(इन्हें आपत्ति है कि तुम कोई निशानी क्यों नहीं दिखाते और दुनिया के संबंध क्यों रखते हो)? हमने, (हे पैग़ंबर), तुमसे पहले भी रसूल भेजे थे और (क्योंकि मनुष्य ही थे, इसलिए) उनको पत्नियां भी दी थीं और संतान भी। और किसी रसूल के अधिकार में नहीं था कि वह परमेश्वर की अनुमति के बिना कोई निशानी ला कर दिखाए। (प्रत्येक चीज़ के लिए एक समय निश्चित है और) हर समय के लिए एक अभिलेख है। परमेश्वर जो कुछ चाहता है, उसमें से मिटा देता है और जिस चीज़ को चाहता है, बाक़ी रखता है और इस अभिलेख का मूल उसी के पास है।
हम जो चेतावनी इन्हें सुना रहे हैं, उसका कुछ भाग हम तुम्हें दिखाएं या तुम को मृत्यु दें और इसके बाद इनसे निपटें, फिर भी तुम्हारा दायित्व केवल पहुंचाना है और इनका हिसाब लेना हमारा काम है। क्या ये नहीं देख रहे कि इस भूभाग को हम इसके किनारों से कम करते हुए इसकी ओर बढ़ रहे हैं। परमेश्वर निर्णय करता है, कोई उसके निर्णय को हटाने वाला नहीं है और वह अतिशीघ्र हिसाब चुका देने वाला है। जो इनसे पहले चल बसे हैं, उन्होंने भी चालें चली थीं, परंतु चालें सब परमेश्वर के नियंत्रण में हैं। हर एक जो कुछ कर रहा है, वह उसको जानता है। और ये नकारने वाले भी शीघ्र ही जान लेंगे के अगले लोक का अच्छा फल किसके लिए है।1
टिप्पणियाँ 1
- तात्पर्य यह है कि हमारे आह्वान (दावत) का प्रभाव आसपास के कबीलों में फैल रहा है, जिससे उनका घेरा तंग हो रहा है और यह स्पष्ट दिख रहा है कि यह शहर (मक्का) भी एक दिन इस्लाम के आह्वान के आगे परास्त हो जाएगा। ↩
(ये सब सुनने के बाद भी तुम्हारे) न करने वाले कहते हैं कि तुम परमेश्वर के भेजे हुए नहीं हो। कह दो, मेरे और तुम्हारे बीच परमेश्वर की गवाही पर्याप्त है और उन लोगों की गवाही जिनके पास धर्मग्रंथ का ज्ञान है।