यह पवित्र क़ुरआन का उर्दू अनुवाद है। इस अलौकिक व अद्वितीय साहित्यिक कृति के अभिव्यक्ति-सौन्दर्य को किसी दूसरी भाषा में रूपांतरित कर पाना संभव नहीं है। फिर भी, इस अनुवाद में मैंने यह प्रयास किया है कि कथन के विन्यास (नज़्म-ए-कलाम) का ध्यान रखते हुए इसका आशय उर्दू भाषा में रूपांतरित कर दूँ। अनुवादों के इतिहास में यह इस दृष्टि से क़ुरआन का पहला अनुवाद है कि इसमें क़ुरआन की क्रमबद्धता (coherence) इसके अनुवाद मात्र से ही स्पष्ट हो जाती है; इसके लिए किसी अतिरिक्त टीका-भाष्य की आवश्यकता नहीं रहती।
मुझे आशा है कि साहित्य-प्रेमी, कथन के विन्यास (नज़्म-ए-कलाम) के साथ-साथ क़ुरआन की शैली के प्रताप (जलाल) और सौंदर्य (जमाल) को भी इस अनुवाद में किसी हद तक प्रकट होते देख सकेंगे:
قدر مجموعۂ گل مرغ سحر داند و بسنہ کہ ہر کو ورقی خواند معانی دانست
गुलदस्ते का मोल तो प्रभाती पक्षी ही जानता है
हर पन्ना पढ़ लेने वाला उसका मर्म नहीं जानता
— जावेद
अल्-मौरिद, लाहौर
10 अप्रेल, 2007