सूरह 19
मर्यम्
मक्की · 98 आयतें · 30 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह 'काफ़ हा या ऐन साद' है। यह तेरे प्रभु की कृपा और दया का वर्णन है जो उसने अपने भक्त ज़करिय्या पर की थी, जब उसने अपने प्रभु को चुपके-चुपके पुकारा। उसने निवेदन किया: मेरे प्रभु, मेरी हड्डियां बूढ़ी हो गई है और सर बुढ़ापे से भड़क उठा है और हे प्रभु, तुझसे मांगकर मैं कभी वंचित नहीं रहा। मुझे अपने पीछे अपने भाई बंधुओं से डर है और मेरी पत्नी बांझ है। अतः अपने पास से तू मुझे एक उत्तराधिकारी प्रदान कर दे। जो मेरा भी उत्तराधिकारी हो और याक़ूब के वंश का भी। और मेरे प्रभु, तू उसको एक मनोहर व्यक्ति बना।
(परमेश्वर ने कहा): हे ज़करिय्या, हम तुम्हें एक पुत्र की शुभ सूचना देते हैं जिसका नाम यह्या होगा। हमने इससे पूर्व उसके समान कोई नहीं बनाया है। उसने निवेदन किया: प्रभु, मेरे यहाँ पुत्र कैसे होगा, जबकि मेरी पत्नी बांझ है और मैं स्वयं बुढ़ापे के अंतिम छोर को पहुंच चुका हूं? उसने कहा: ऐसा ही होगा। तेरे प्रभु का कहना है कि यह मेरे लिए अत्यंत सरल है। मैं इससे पहले तुम्हें पैदा कर चुका हूं, जबकि तुम कुछ भी नहीं थे। ज़करिय्या ने कहा: मेरे प्रभु, मेरे लिए कोई निशानी नियुक्त कर दीजिए। परमेश्वर ने कहा: तुम्हारे लिए निशानी यह है कि तुम तीन रात और दिन लोगों से बात नहीं कर सकोगे, जबकि तुम बिल्कुल स्वस्थ होगे। अतः प्रार्थना स्थल से निकल कर वह अपने लोगों के पास आया, फिर इशारे से उनको उपदेश किया कि सुबह व शाम परमेश्वर की पवित्रता का जाप करते रहो।1
टिप्पणियाँ 1
- लक्षण (क़रीना) से यहाँ स्पष्ट है कि यह उत्तर फ़रिश्ते (देवदूत) ने दिया है। ↩
(यह भविष्यवाणी पूरी हुई। अतः वह बच्चा युवावस्था को पहुंचा तो परमेश्वर ने कहा): हे यह्या, हमारे ग्रंथ को दृढ़तापूर्वक थाम लो। हमने उसको बचपन ही में (सत्य-असत्य के बीच) निर्णय कर लेने की क्षमता प्रदान की और विशेष अपनी ओर से मृदुता तथा सौहार्द और (भीतर और बाहर की) पवित्रता प्रदान की और वह अत्यंत संयमी और अपने माता-पिता का आज्ञाकारी भी था, उद्दंड और अवज्ञाकारी नहीं था। और उस पर शांति (की शुभ सूचना) थी, जिस दिन उसका जन्म हुआ और जिस दिन मरेगा और जिस दिन पुनः जीवित किया जाएगा।
(अब) इस ग्रंथ में मर्यम का वर्णन करो, जब वह अपने घरवालों से अलग होकर (बैत-उल-मुक़द्दस के) पूर्वी भाग में एकांत में रहने लगी थी। और अपने आपको उनसे पर्दे में कर लिया था। फिर हमने उसके पास अपना फ़रिश्ता भेजा और वह उसके सामने एक पूरे आदमी के रूप में प्रकट हो गया। मर्यम (ने उसे देखा तो) बोल उठी कि मैं तुमसे परम दयालु परमेश्वर की शरण में आती हूं, यदि तुम उस्से डरने वाले हो। उसने कहा: मैं तुम्हारे प्रभु ही का दूत हूं और इसलिए भेजा गया हूं कि तुम्हें एक पवित्र पुत्र प्रदान करूँ। मर्यम ने कहा: मेरे यहाँ लड़का कैसे होगा, न मुझे किसी पुरुष ने हाथ लगाया है और न मैं कभी बुरे चाल-चलन वाली ही रही हूं! उसने कहा: ऐसा ही होगा। तुम्हारा प्रभु कहता है कि यह मेरे लिए अत्यंत सरल है। हम यह इसलिए करेंगे कि वह हमारा पैग़ंबर हो और इसलिए कि हम उसको लोगों के लिए एक निशानी और अपनी ओर से साक्षात दया बनाएं। और इस बात का निर्णय कर दिया गया है।
अतः मर्यम उस बच्चे से गर्भवती हो गई और (बैत-उल-मुक़द्दस से निकलकर) उस गर्भ को लिए हुए, सबसे अलग एक दूर की जगह चली गई। फिर (वह समय भी आ गया कि) प्रसव-पीड़ा उसे खजूर के तने के पास ले आई। (उस समय अत्यंत विवशता की स्थिति में) उसने कहा: काश, मैं इससे पहले ही मर जाती और भूली बिसरी हो जाती।
इसपर मर्यम के नीचे से फ़रिश्ते ने उसको पुकार कर कहा: दुखी न हो, तुम्हारे प्रभु ने तुम्हारे नीचे से एक जल-धारा जारी कर रखी है। और तुम खजूर के तने को अपनी ओर हिलाओ, तुम्हारे ऊपर ताज़ा खजूर गिर पड़ेंगे। तो खाओ पियो और (बच्चे को देख कर) आँखें ठंडी करो। फिर कोई व्यक्ति देखो (कि कुछ पूछना चाहता है) तो संकेत से कह दो कि मैंने परम दयालु परमेश्वर के लिए उपवास की मन्नत मान रखी है, इसलिए आज मैं किसी व्यक्ति से कोई बात नहीं करूंगी।
इसके बाद वह बच्चे को गोद में लिए हुए अपने लोगों के पास आई। उन्होंने (देखा तो) कहा: मर्यम, तुमने यह बड़ी गंभीर हरकत कर डाली है। हे हारून की बहन, न तुम्हारा पिता कोई बुरा आदमी था और न तुम्हारी माता कोई बुरे चाल-चलन वाली महिला थी।
उसने उत्तर में बच्चे की ओर संकेत किया (कि वही बताएगा)। लोगों ने कहा: हम उससे क्या बात करें जो गोद में पड़ा हुआ एक बच्चा है? बच्चा बोल उठा: मैं परमेश्वर का दास हूँ, उसने मुझे धर्मग्रंथ प्रदान किया और मुझे नबी बनाया। और जहाँ कहीं भी हूं, मुझे आशीष और सौभाग्य का स्रोत बनाया है। उसने मुझे निर्देश दिया है कि जब तक मैं जीवित रहूं, नमाज़ और ज़कात का प्रबंध करूँ। और मुझे अपनी माता का आज्ञाकारी बनाया है, मुझे उद्दंड और अभागा नहीं बनाया। और मुझपर शांति (की शुभ सूचना) है जिस दिन मेरा जन्म हुआ और जिस दिन मरूंगा और जिस दिन पुनः जीवित करके उठाया जाऊंगा।
यह था मर्यम का पुत्र ईसा। उसके बारे में वास्तविक सत्य, जिसमें ये लोग झगड़ रहे हैं। परमेश्वर को यह शोभा नहीं देता कि वह कोई संतान बनाए। वह दोषरहित है। वह जब किसी बात का निर्णय कर लेता है तो उसको इतना ही कहता है कि हो जा, फिर वह हो जाती है।
और (बच्चे ने कहा): निस्संदेह परमेश्वर ही मेरा भी प्रभु है और तुम्हारा भी, इसलिए तुम उसी की पुजा-उपासना करो। यही सीधा मार्ग है।
(यह ईसा मसीह की शिक्षा थी), फिर उसके मानने वालों के अंदर से अनेक पंथों ने आपस में मतभेद किया। अतः अब उनके लिए, जिन्होंने (इन तथ्यों को) नकार दिया है, एक भयंकर दिन की उपस्थिति के कारण बरबादी है। कितना उत्तम सुनते और देखते होंगे जिस दिन हमारे सामने उपस्थित होंगे, परंतु आज ये अत्याचारी स्पष्ट पथभ्रष्टता में पड़े हैं। (हे पैग़ंबर), इन्हें हताशा के उस दिन से सचेत कर दो, जब मामले का निपटारा कर दिया जाएगा। इस समय तो ये बेपरवाही में पड़े हैं और मान नहीं रहे हैं। इसमें संदेह नहीं कि पृथ्वी और पृथ्वी के रहने वालों के उत्तराधिकारी अंततः हम ही होंगे और ये सब लोग हमारी ही ओर लौटाए जाएँगे।
और इस ग्रंथ में इब्राहीम का वर्णन करो। निस्संदेह, वह एक सदाचारी व्यक्ति और (परमेश्वर का) नबी था। याद करो जब उसने अपने पिता से कहा कि पिताश्री, आप उन चीज़ों की पूजा क्यों करते हैं जो न सुनती हैं, न देखती हैं और न आपके किसी काम आ सकती हैं? पिता श्री, सत्य यह है किमेरे पास वह ज्ञान आया है जो आपके पास नहीं आया है, इसलिए आप मेरा अनुसरण करें, मैं आपको सीधा मार्ग दिखाऊंगा। पिताश्री, आप शैतान की भक्ति न करें, इसमें संदेह नहीं कि शैतान परम दयालु परमेश्वर का बड़ा ही अवज्ञाकारी है। पिताश्री, (यदि आपने मेरी बात नहीं मानी तो) मुझे डर है कि आपको परम दयालु परमेश्वर का कोई दण्ड आ कर पकड़ेगा और आप शैतान के साथी बनकर रह जाएँगे।
पिता ने कहा: इब्राहीम, क्या तुम मेरे पूज्य देवताओं से विमुख हो रहे हो? यदि तुम नहीं रुके तो मैं अवश्य पत्थर मार-मार कर तुम्हें मार डालूँगा। इसलिए तुम (अपनी भलाई चाहते हो तो) मुझसे सदा के लिए दूर हो जाओ।
इब्राहीम ने कहा: (अच्छा फिर) आप को मेरा सलाम है। मैं आपके लिए अपने प्रभु से क्षमा की प्रार्थना करूंगा। सत्य यह है किवह मुझपर अत्यंत दया करने वाला है। (यदि आपका विचार यही है तो) मैं आप लोगों को भी छोड़ता हूं और उनको भी जिन्हें आप लोग परमेश्वर को छोड़ पुकारते हैं। मैं तो अपने प्रभु ही को पुकारूंगा। मुझे आशा है कि अपने प्रभु को पुकार कर मैं वंचित नहीं रहूंगा।
फिर जब वह उनको छोड़कर अलग हो गया और उनको भी जिन्हें वे परमेश्वर को छोड़ पूजते थे तो हमने उसको इस्हाक़ और याक़ूब दिए और उनमें से हर एक को नबी बनाया। और उनको अपनी कृपा में से एक हिस्सा प्रदान किया और उनको उच्च कोटि की यथार्थ और स्थायी कीर्ति प्रदान की।
और इस ग्रंथ में मूसा का वर्णन करो। निस्संदेह, वह एक चुना हुआ व्यक्ति था और रसूल नबी था। हमने उसको तूर पर्वत के पवित्र छोर से पुकारा और उसको अपने पास बुलाया, हम उससे कुछ राज़ की बातें कर रहे थे। और अपनी कृपा से उसके भाई हारून को हमने नबी बनाकर उसे (सहायक के रूप में) दे दिया।
और इस ग्रंथ में इस्माईल का वर्णन करो। निस्संदेह, वह वचन का सच्चा और रसूल नबी था। वह अपने लोगों को नमाज़ और ज़कात का उपदेश करता था और अपने प्रभु के निकट एक प्रिय व्यक्ति था।
और इस ग्रंथ में इद्रीस का वर्णन करो। इसमें संदेह नहीं कि वह भी सदाचारी और नबी था। और हमने (इब्राहीम की तरह) उसको भी उच्च कोटि तक पहुंचाया था।
ये लोग हैं जिन पर परमेश्वर ने पैग़ंबरों में से अपना अनुग्रह किया, आदम की संतान में से और उन लोगों के वंश से जिन्हें हमने नूह के साथ नाव पर सवार किया था, और इब्राहीम और इस्राईल के वंश से और उन लोगों में से जिनका हमने मार्गदर्शन और चयन किया था। उनको जब परम दयालु परमेश्वर की आयतें सुनाई जाती थीं तो सजदे में गिर पड़ते और रोते जाते थे। फिर उनके बाद वे दुराचारी लोग उनके उत्तराधिकारी हुए जिन्होंने नमाज़ गंवा दी और इच्छाओं के पीछे चल पड़े। अतः शीघ्र ही वे अपने भटकने के परिणाम का सामना करेंगे। अपितु जो प्रायश्चित कर लें और विश्वास कर लें और भले कर्म करें तो यही लोग हैं जो स्वर्ग में प्रवेश करेंगे और उनका थोड़ा सा भी अधिकार हनन न होगा। सदा रहने वाले बाग़ों में, जिनका वचन परम दयालु परमेश्वर ने उस दुनिया में अपने भक्तों को दे रखा है जो आंखों से छिपी है। उसका वचन अवश्य पूरा हो कर रहेगा। वे उसमें कोई अशिष्ट बात नहीं सुनेंगे, उनके लिए वहां शांति ही शांति होगी। उनकी जीविका सुबह व शाम उसमें उपलब्ध होगी। यह वह स्वर्ग है जिसका उत्तराधिकारी हम अपने भक्तों में से उनको बनाएंगे जो परमेश्वर से डरने वाले होंगे।
(हम जानते हैं, हे मुहम्मद, कि तुम हमारी प्रतीक्षा में रहते हो, परंतु हमारा मामला यह है कि) हम तुम्हारे प्रभु के आदेश ही से उतरते हैं। हमारे आगे और पीछे जो कुछ है, सब उसी के नियंत्रण में है और वह भी जो उसके बीच है। (तुम संतुष्ट रहो), तुम्हारा प्रभु (किसी चीज़ को) भूलने वाला नहीं है। वह धरती और समस्त आकाशों और उनके बीच हर चीज़ का स्वामी है, अतः उसी की भक्ति करो और उसकी भक्ति पर जमे रहो। क्या तुम्हारी जानकारी में उस जैसा कोई और भी है?1
टिप्पणियाँ 1
- यहाँ से आगे यह संपूर्ण प्रकरण (paragraph) जिब्रील के मुंह से है। ↩
मनुष्य कहता है, क्या जब मैं मर जाऊंगा तो फिर पुनः जीवित करके निकाला जाऊंगा? क्या मनुष्य को याद नहीं आता कि हम इससे पहले उसकी रचना कर चुके हैं, जबकि वह कुछ भी नहीं था। अतः तेरे प्रभु की सौगंध, हम इनको भी अवश्य इकट्ठा करेंगे और इनके शैतानों को भी, फिर इन सब को नरक के चारों ओर इस प्रकार उपस्थित करेंगे कि अपराधियों के समान यर घुटनों के बल बैठे हुए होंगे। फिर प्रत्येक समूह में से हम उन लोगों को छांट कर अलग कर देंगे जो परम दयालु परमेश्वर के विरुद्ध सबसे अधिक विद्रोह करने वाले बने रहे। फिर उन लोगों को सबसे बढ़कर जानने वाले भी हम ही होंगे जो सबसे बढ़कर इस बात के अधिकारी होंगे कि नरक में जा पड़ें। परम दयालु परमेश्वर के सामने अकड़ने वालो, तुम में से हर एक को उसमें अवश्य प्रवेश करना है। यह एक अटल बात है, हे पैग़ंबर, जिसको पूरा करना तुम्हारे प्रभु के ऊपर है।
फिर हम उनको मुक्ति देंगे जो परमेश्वर से डरते रहे और उनको जो अपने प्राणों पर अत्याचार करने वाले थे, उसी में घुटनों के बल बैठे हुए छोड़ देंगे।
इन्हें जब हमारी अति स्पष्ट आयतें सुनाई जाती हैं तो ये नकारने वाले मानने वालों से कहते हैं कि बताओ, हम दोनों समूहों में से कौन अपने पद के अनुसार उत्तम है और किस की सभाएं अधिक भव्य हैं? तुमसे पहले हमने कितनी ही क़ौमें नष्ट कर छोड़ीं हैं जो साधनों और ऊपरी ठाठ-बाठ में इनसे कहीं बढ़ी हुई थीं। इनसे कह दो कि जो लोग पथभ्रष्टता में पड़े रहते हैं, उनके मामले में परम दयालु परमेश्वर की कार्यप्रणाली यही है कि उन्हें पूरी ढील देता है, यहाँ तक कि जब वे उस चीज़ को देख लें जिसका उन्हें वचन दिया जा रहा है — चाहे वह ईश्वरीय दण्ड हो या क़यामत की घड़ी — तो उस समय अच्छे से जान लेंगे कि किस की दशा बुरी और किस का जत्था दुर्बल है।
इसके विपरीत जो लोग सन्मार्ग को अपनाते हैं, परमेश्वर उनके मार्गदर्शन में वृद्धि करता है और बाक़ी रहने वाले भले कर्म तेरे प्रभु के पास फल की दृष्टि से भी अच्छे हैं और परिणाम की दृष्टि से भी।
फिर तुमने उस व्यक्ति को देखा है जिसने हमारी आयतों को मानने से नकार दिया और जिसका दावा है कि मैं परलोक में भी इसी प्रकार धन-संपत्ति और संतान से अवश्य सम्पन्न किया जाऊंगा? क्या उसने परोक्ष में झांक कर देखा है या परम दयालु परमेश्वर से कोई वचन ले लिया है? कदापि नहीं, वह जो कुछ कहता है, उसे हम लिख रखेंगे और उसके इस दावे के कारण उसके पक्ष में दण्ड बढ़ाते चले जाएँगे। और वह जिन चीज़ों के मालिक होने का दावेदार है, उसके उत्तराधिकारी हम हो जाएँगे और वह हमारे सामने अकेला प्रस्तुत होगा।
इन लोगों ने परमेश्वर के अतिरिक्त उपास्य बना रखे हैं ताकि वे उनके समर्थक हों। कदापि नहीं, वहां कोई समर्थक नहीं होगा। वे सब इनकी पूजा को नकार देंगे और उलटे इनके विरोधी बन जाएँगे।
तुमने देखा नहीं कि इन नकारने वालों पर हमने शैतानों को छोड़ दिया है। वे इन्हें बहुत अच्छे से उकसा रहे हैं। अतः इनके विरुद्ध निर्णय के लिए जल्दी न करो। हम तो केवल इनकी गिनती पूरी कर रहे हैं।
इन्हें याद दिलाओ, जिस दिन हम संयमी व्यक्तियों को परम दयालु परमेश्वर की ओर अतिथि बनाकर इकट्ठा कर लाएंगे। और अपराधियों को नरक की ओर प्यासा हांकेंगे। उस दिन उन्हें कोई अनुशंसा लाने का अधिकार न होगा, परंतु जिसने परम दयालु परमेश्वर से कोई वचन ले रखा हो।
कहते हैं कि परम दयालु परमेश्वर ने संतान बना रखी है। यह तुमने बड़ी ही गंभीर बात कही है। शीघ्र है कि इससे आकाश फट पड़ें, धरती की धज्जियां उड़ जाएँ और पर्वत टूट कर गिर पड़ें कि लोगों ने उस परम दयालु परमेश्वर के साथ संतान को जोड़ दिया है। परम दयालु परमेश्वर को शोभा नहीं देता कि वह किसी को संतान बनाए। धरती और समस्त आकाशों में जो भी हैं, सब परम दयालु परमेश्वर के सामने सेवकों ही के रूप में प्रस्तुत होने वाले हैं। वह उनको घेरे हुए है और उसने उन्हें अच्छे से गिन रखा है। उनमें से हर एक क़यामत के दिन उसके सामने अकेला उपस्थित होगा। अपितु जो लोग मान गए और उन्होंने भले कर्म किए हैं, शीघ्र ही परम दयालु परमेश्वर उनके लिए अपने पास प्रेम और दया का वातावरण पैदा कर देगा।
अतः, हे पैग़ंबर, हमने इस क़ुरआन को तुम्हारी भाषा में इसीलिए सरल और उपयुक्त बना दिया है कि तुम उन लोगों को इसके माध्यम से शुभ सूचना दो जो परमेश्वर से डरने वाले हैं और इन हठी लोगों को इसके माध्यम से सचेत कर दो। इनसे पहले कितनी ही क़ौमों का हमने सर्वनाश कर छोड़ा है। क्या तुम उनमें से किसी की आहट पाते हो या किसी की भनक कहीं सुनते हो?