सूरह 15
अल्-हिज्र
मक्की · 99 आयतें · 12 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह 'अलिफ़ लाम रा' है। यह ईश्वरीय ग्रंथ और सुबोध क़ुरआन की आयतें हैं। वे दिन भी आएंगे, जब ये नकारने वाले कामना करेंगे कि काश, हम मुसलमान होते। इन्हें छोड़ो, ये खाएं पिएं, मौज करें और इनकी इच्छाएं इन्हें भुलावे में डाले रखें।फिर ये शीघ्र ही जान लेंगे। (इस समय हम इनको इसलिए नहीं पकड़ रहे कि) हमने जिस बस्ती के लोगों का भी नाश किया है, उसके लिए एक निर्धारित अभिलेख रहा है। कोई क़ौम न अपने निर्धारित समय से आगे बढ़ती है न पीछे हटती है। (इन्हें भी यह ढील इसी आधार पर दी गई तो) अब ये कहते हैं कि हे वह व्यक्ति जिस (का मानना है कि उस) पर यह स्मरण उतारा गया है, तुम अवश्य बावले हो। यदि तुम सच्चे हो तो हमारे पास फ़रिश्ते क्यों नहीं ले आते? हम फ़रिश्तों को केवल निर्णय के साथ उतारते हैं और (जब वे उतारे जाएँगे तो) उस समय इन्हें ढील नहीं दी जाएगी। (ये क़ुरआन का मज़ाक़ उड़ाते हैं। तुम संतुष्ट रहो, हे पैग़ंबर), इसमें संदेह नहीं कि यह उपदेश स्वयं हमने उतारा है और हम ही इसके संरक्षक हैं। हमने तुमसे पहले भी बहुत से बीते हुए समूहों में अपने रसूल भेजे थे। उनके पास भी जो रसूल आया, वे उसका मज़ाक़ ही उड़ाते रहे। हम अपने इस उपदेश को इस प्रकार के अपराधियों के दिल में इसी प्रकार (तीर और खंजर बनाकर) उतारते हैं। ये इसे मानने वाले नहीं हैं। इनसे पहले के लोगों से यही रीति चली आ रही है। हम इन पर आकाश का कोई द्वार खोल देते जिसमें ये चढ़ने लगते। तब भी यही कहते कि यह तो हमारी आँखें चौंधिया दी गई हैं, वास्तव में हम सब लोगों पर जादू कर दिया गया है।
(ये देखें तो सही), हमने आकाश में तगड़े क़िले बनाए हैं और उसको देखने वालों के लिए सुशोभित किया है। और हर तिरस्कृत शैतान (की घुसपैठ) से उसे सुरक्षित कर दिया है। सिवाय इसके कि कोई चोरी छिपे कान लगाकर सुनने का प्रयास करे। अतः इस पर एक अग्नि की लपट उसका पीछा करती है।
हमने धरती को फैलाया, (उसके संतुलन को बनाए रखने के लिए) उसमें पर्वतों के लंगर डाल दिए, हर प्रकार की वस्तुएं एक अनुपात के साथ उस में उगा दीं। और उसमें तुम्हारी जीविका के साधन भी रख दिए और उनकी जीविका भी जिनका तुम भरण-पोषण करने वाले नहीं हो। सत्य यह है कि कोई चीज़ ऐसी नहीं है जिसके कोष हमारे पास न हों, परंतु उसको हम एक निश्चित गणना ही से उतारते हैं।
हम ही हवाओं को जल से भर कर चलाते हैं। फिर आकाश से पानी बरसाते हैं और तुम्हें उससे तृप्त कर देते हैं। तुम उसके ये भंडार एकत्रित कर के नहीं रख सकते थे।
(अतः) कोई संदेह नहीं कि हम ही जीवित करते और हम ही मारते हैं और सब के उत्तराधिकारी भी हम ही हैं। हम उनको भी जानते हैं जो तुमसे पहले हो चुके हैं और उनको भी जानते हैं जो बाद में आने वाले हैं। निस्संदेह तुम्हारा प्रभु ही है जो (एक दिन) इन सब को इकट्ठा कर लेगा। इसलिए कि वह प्रज्ञावान और ज्ञानी है।
(ये इब्लीस के धोखे में आए हुए लोग हैं। इन्हें याद दिलाओ), हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से बनाया था। और इससे पहले जिन्नों की रचना आंच की लपट से की थी। और याद दिलाओ, जब तुम्हारे प्रभु ने फ़रिश्तों से कहा था कि मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से एक मानव की रचना कर रहा हूं। अतः जब मैं उसको हर प्रकार से ठीक कर लूँ और उसमें अपनी रूह में से फूंक दूँ तो तुम सब उसके आगे सजदे में गिर जाना। फिर (हुआ यह कि) सभी फ़रिश्ते सजदे में गिर पड़े (और जिन्न भी), इब्लीस के सिवा। उसने सज्दा करने वालों का साथ देने से इनकार दिया। परमेश्वर ने पूछा: हे इब्लीस, तेरी क्या समस्या है कि तू सज्दा करने वालों में से नहीं हुआ? उसने उत्तर दिया: मैं वह नहीं हूं कि एक ऐसे मानव को सज्दा करूं जिसे तूने सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से पैदा किया है। परमेश्वर ने कहा: (यह बात है) तो यहाँ से निकल जा, इसलिए कि तू तिरस्कृत है। और तुझ पर प्रतिफल के दिन तक अभिशाप है। उसने निवेदन किया: प्रभु, फिर मुझे उस दिन तक के लिए ढील दे, जब लोग पुनः जीवित किए जाएँगे। परमेश्वर ने कहा: अच्छा, तू भी उन्ही में से है जिन्हें उस निर्धारित समय तक के लिए ढील दी गई है। उसने कहा: प्रभु, जैसे तूने मुझे भटकाया है, उसी प्रकार अब मैं भी इनके लिए धरती में लुभावनी चीज़ें पैदा करूंगा और इनमें से तेरे चुने हुए भक्तों के सिवा सबको भटका के छोडूंगा। । परमेश्वर ने कहा: यह (भक्ति का मार्ग) एक सीधा मार्ग है जो मुझ तक पहुंचाने वाला है। मेरे भक्तों पर तेरा कोई ज़ोर नहीं चलेगा। तेरा ज़ोर केवल उन्हीं पर चलेगा जो बहके हुए लोगों में से तेरा अनुसरण करेंगे। और इन सब के लिए नरक का वादा है। उसके सात द्वार हैं, प्रत्येक द्वार के लिए उनमें से एक हिस्सा अलग कर दिया गया है। इसके विपरीत जो परमेश्वर से डरने वाले हैं, वे बाग़ों और झरनों में होंगे। उनसे कहा जाएगा: इनमें शांति के साथ निर्भय होकर रहो। उनके सीनों में जो कुछ दुर्भावनाएँ रही होंगी, हम निकाल देंगे। वे आमने सामने आसनों पर भाई-भाई के समान बैठे होंगे। उन्हें वहां न कोई थकावट होगी और न वे वहां से निकाले जाएँगे।
(हे पैग़ंबर), मेरे भक्तों को बताओ कि यह मैं हूं कि बड़ा ही क्षमा करने वाला हूं, मेरी कृपा शाश्वत है। और यह भी कि मेरा दण्ड ही बड़ा कष्टदायक दण्ड है। (ये फ़रिश्तों को दिखाने की मांग करते हैं), इन्हें (यह सच्चाई समझाने के लिए), इब्राहीम के अतिथियों की कथा सुनाओ। जब वे उसके पास आए तो उन्होंने कहा: तुम पर शांति हो। इब्राहीम ने (उनके व्यवहार में थोड़ी अजनबीपन देखा तो) कहा: हमें तुम लोगों से डर लग रहा है। वे बोले: डरो मत, हम तुम्हें एक ज्ञानी पुत्र की शुभ सूचना दे रहे हैं। इब्राहीम ने कहा: क्या तुम मुझे शुभ सूचना दे रहे हो, जबकि मुझपर बुढ़ापा आ चुका है? तो अब किस बात की शुभ सूचना देते हो। उन्होंने उत्तर दिया: हमने तुम्हें सत्य समाचार दिया है, इसलिए निराश न हो। इब्राहीम ने कहा: अपने प्रभु की दया से पथभ्रष्ट लोगों के सिवा कौन निराश हो सकता है!1
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- अर्थात यह सच्चाई कि मैं अत्यंत दयालु हूँ, किंतु इसके साथ ही बहुत प्रतिशोध लेने वाला और प्रभुत्वशाली भी हूँ। ↩
इब्राहीम ने पूछा: हे ईशदूतो, फिर अब तुम्हारा अभियान क्या है? उन्होंने उत्तर दिया: हम एक अपराधी क़ौम की ओर भेजे गए हैं। केवल लूत के लोग मुक्त हैं। उन सब को हम अवश्य बचा लेंगे। उसकी पत्नी के सिवा। हमने निर्णय कर लिया है कि वह उन्हीं में होगी जो पीछे रह जाएँगे।
फिर जब ये ईशदूत लूत के लोगों के पास पहुंचे। तो उसने कहा: तुम कुछ अजनबी से लोग प्रतीत होते हो? उन्होंने उत्तर दिया: नहीं, अपितु हम तुम्हारे पास वही चीज़ ले कर आ गए हैं जिसमें ये संदेह कर रहे थे। हम तुम्हारे पास एक निश्चित आदेश लेकर आए हैं और हम पूर्णतः सच्चे हैं। इसलिए अब तुम कुछ रात बीत जाने पर अपने घर वालों के साथ यहाँ से निकल जाओ और तुम उनके पीछे-पीछे चलना और तुम में से कोई पलट कर न देखे और वहां चले जाओ, जहाँ तुम को जाने का निर्देश किया जा रहा है। और हमने उसको अपना यह निर्णय पहुंचा दिया कि सुबह होते ही इन लोगों की जड़ काट दी जाएगी।
(इससे पहले यह हुआ कि लड़कों को लूत के घर आते देखकर) नगर के लोग मौज करते हुए आ पहुंचे। लूत ने कहा: ये मेरे अतिथि हैं, इसलिए मुझे अपमानित न करो। परमेश्वर से डरो और मेरा अनादर न करो। वे बोले: क्या हमने तुम्हें बाहर के सब लोगों से रोक नहीं दिया था (कि उनके और हमारे बीच बाधा न बना करो)? लूत ने (विवश हो कर) कहा: यदि तुम्हें कुछ करना ही है तो ये मेरी बेटियां उपलब्ध हैं। तेरे प्राण की सौगंध, (हे लूत, इस समय) ये अपनी मस्ती में अंधे हो रहे हैं। (हमने लूत को आश्वासन दिया), फिर दिन निकलते ही उनको हमारी डांट ने आ पकड़ा। और हमने वह बस्ती उलट पलट कर डाली और उनपर पकी हुई मिट्टी के पत्थरों की बारिश बरसा दी। निस्संदेह, इस कथा में उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं जो अंतर्दृष्टि प्राप्त करने वाले हों। यह बस्ती आवागमन के एक प्रसिद्ध मार्ग पर स्थित है। निस्संदेह, इसमें मानने वालों के लिए भी बड़ी निशानी है।1
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- यह पैग़ंबर लूत (अलैहि.) की ओर से कोई वास्तविक प्रस्ताव नहीं था, बल्कि अपने लोगों की अंतरात्मा को झकझोरने के लिए उनकी एक अंतिम विवशतापूर्ण पुकार थी। ↩
इसी प्रकार अरण्य वाले भी अवश्य दुष्ट थे। तो हमने उनसे भी बदला लिया। ये दोनों बस्तियां खुले राजमार्ग पर स्थित हैं। और हिज्र वाले भी रसूलों को झूठा कह चुके हैं। हमने उनको अपनी निशानियाँ दीं, परंतु वे उनसे विमुख ही होते रहे। वे पर्वतों को तराश कर घर बनाते थे कि उनमें चैन से रहें। फिर उनको सुबह होते हमारी डांट ने पकड़ लिया। तो उनके कुछ काम न आया जो कुछ वे कमाते रहे थे।1
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- यह 'समूद' की क़ौम का निवास स्थान था। इससे पूर्व वन (अर्थात अरण्य) वालों का उल्लेख हुआ है, उनसे तात्पर्य पैग़ंबर 'शुऐब' की क़ौम है। ↩
हमने, (हे पैग़ंबर), धरती और समस्त आकाशों की और उनके बीच सब चीज़ों की रचना एक उद्देश्य के साथ की है और इसमें कोई संदेह नहीं कि क़यामत आने वाली है, इसलिए इन को अच्छे से अनदेखा करो। निस्संदेह तुम्हारा प्रभु ही भरपूर रचना करने वाला और परम ज्ञानी है। हमने तुमको सात ‘मसानी’, अर्थात महान क़ुरआन प्रदान किया है। तुम उन चीज़ों की ओर आंख उठाकर भी न देखो जो हमने इनके विभिन्न समूहों को दे रखी हैं और न इनकी हालत पर दुखी हो। अपनी कृपा की भुजाएं, अपितु मानने वालों पर झुकाए रखो। और (न मानने वालों से) कह दो कि मैं तो एक स्पष्ट सचेत करने वाला हूं। हमने इसी प्रकार उन बाँट देने वालों पर भी उतारा था जिन्होंने अपने क़ुरआन को बांटकर उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए। इसलिए तेरे प्रभु की सौगंध, हम उन सब से अवश्य पूछेंगे जो वे करते रहे हैं। तो, (हे पैग़ंबर), तुम्हें जो आदेश मिला है, उसको स्पष्टता के साथ सुना दो और इन मुश्रिकों से मुँह फेर लो। तुम्हारी ओर से हम इन मज़ाक उड़ाने वालों (से निपटने) के लिए पर्याप्त हैं जो परमेश्वर के साथ किसी अन्य देवता को भी सहभागी बना देते हैं, फिर वे शीघ्र ही जान लेंगे। हम जानते हैं जो कुछ ये कहते हैं, उससे तुम्हारा दिल दुखी होता है। तो अपने प्रभु की स्तुति के साथ उसकी पवित्रता का जाप करो और सज्दा करने वालों में से बनो और अपने प्रभु की भक्ति में लगे रहो, यहाँ तक कि तुम्हारे पास निर्णायक घड़ी आ पहुंचे।12
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- हमारे अनुसार, इससे तात्पर्य क़ुरआन की सूरतों के वे सात समूह हैं जिनमें से प्रत्येक सूरह विषय की दृष्टि से अपना एक जोड़ा रखती है। कुछ सूरतें इसमें अपवाद हैं जिनमें से 'सूरह फ़ातिहा' को कुरआन की प्रस्तावना के रूप में और अन्य कुछ छोटी सूरतों को कुछ विशेष सूरह-समूहों के समापन के रूप में अलग रखा गया है। ↩
- यह उन यहूदियों की ओर संकेत है जिन्होंने अपने धर्मग्रंथ (तौरात) को टुकड़ों में बाँट दिया था; अर्थात उसके कुछ हिस्सों को प्रकाशित किया और कुछ को छिपा दिया। ↩