सूरह 48
अल्-फ़त्ह्
मदनी · 29 आयतें · 17 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
इसमें कोई संदेह नहीं, (हे पैग़ंबर) कि हमने तुमको स्पष्ट विजय प्रदान कर दी है कि (तुम सफलता के साथ अपने कर्तव्य का निर्वाह करो और इसके फलस्वरूप) परमेश्वर तुम्हारे अगले और पिछले सब पापकर्मों को क्षमा कर दे और तुम पर अपना उपकार पूरा करे और तुम्हारे लिए एक सीधा मार्ग खोल दे और परमेश्वर तुम्हारी ऐसी सहायता करे जो अजेय हो।1
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- सूरह के अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि इससे तात्पर्य हुदैबियह की संधि है। ↩
वही है जिसने (इस दिग्विजय यात्रा के लिए निकलते समय) मुसलमानों के दिलों में सांत्वना उतारी ताकि (वे निकलें और इसके फलस्वरुप) उनके ईमान के साथ ईमान की और वृद्धि हो, (अन्यथा परमेश्वर अपने धर्म की सहायता के लिए किसी पर निर्भर नहीं है)। धरती और समस्त आकाशों की सभी सेनाएं परमेश्वर ही की हैं और परमेश्वर ज्ञानी तथा प्रज्ञावान है। इसलिए कि परमेश्वर मोमिन पुरुषों और मोमिन महिलाओं को ऐसे बाग़ों में प्रवेश करे जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, वे उनमें सदा रहेंगे। और इसलिए कि वह उनके पापकर्म उनसे झाड़ दे। परमेश्वर की दृष्टि में बड़ी सफलता यही है।
और इसलिए भी कि परमेश्वर मुनाफ़िक़ पुरुषों और मुनाफ़िक़ महिलाओं, और मुश्रिक पुरुषों और मुश्रिक महिलाओं को दण्ड दे जो परमेश्वर के बारे में अनेक प्रकार के बुरे विचार रखते हैं। (ये मुसलमानों के लिए बुरे दिनों की प्रतीक्षा में हैं)। बुरे दिन इन्हीं पर हैं। इन पर परमेश्वर का प्रकोप हो और उसने इन पर अभिशाप किया और आगे इनके लिए उसने नरक तैयार कर रखा है और वह अत्यंत बुरा ठिकाना है। (ये परमेश्वर से बेपरवाह हैं तो परमेश्वर को भी इनकी कोई आवश्यकता नहीं है)। धरती और समस्त आकाशों की सेनाएं परमेश्वर ही की हैं और परमेश्वर प्रबल है, बड़ा प्रज्ञावान है।
हमने, (हे पैग़ंबर), तुमको गवाही देने वाला, शुभ समाचार पहुंचाने वाला और सचेत करने वाला बना कर भेजा है ताकि (लोगो), तुम परमेश्वर और उसके रसूल पर सच्चा विश्वास करो, रसूल का साथ दो, उसका सम्मान करो और सुबह-शाम परमेश्वर का गुणगान करते रहो।
(ये तुम्हारे हाथ पर बैअत के महत्व को समझते नहीं हैं)। सत्य यह है कि जो लोग तुम से बैअत करते हैं, वे तुमसे नहीं, अपितु परमेश्वर ही से बैअत करते हैं। उनके हाथ पर परमेश्वर का हाथ होता है। तो जिसने यह वचन तोड़ा, वह इस उल्लंघन का भार अपने ही सर लेता है और जिसने उस बात को पूरा कर दिया जिसका वचन उसने परमेश्वर से किया था तो परमेश्वर शीघ्र ही उसको महान प्रतिफल प्रदान करेगा।
(तुम इस यात्रा से वापस घर पहुँचोगे तो) बद्दुओं में से जो लोग पीछे छोड़ दिए गए थे, वे अब तुमसे बहाना बनाएंगे (कि हम आपके साथ निकल नहीं सके थे)। हमको हमारे माल-मवेशी और परिवार के प्रति कर्तव्यों ने लीन किए रखा। (यह हमारी भूल थी), तो आप हमारे लिए क्षमा याचना करें। ये अपनी ज़बानों से वह बात कहते हैं जो इनके दिलों में नहीं है। इनसे कहना, (तुमने दुनिया को महत्व दिया और परमेश्वर का अधिकार नहीं पहचाना, भला बताओ कि) फिर कौन है जो तुम्हारे लिए परमेश्वर को रोक देने का कुछ अधिकार रखता है, यदि परमेश्वर तुम को कोई क्षति पहुंचाना चाहे या तुम को लाभ पहुंचाना चाहे? नहीं, (यह कोई बहाना नहीं), अपितु जो कुछ तुम कर रहे हो, परमेश्वर उससे परिचित है। (वह जानता है कि तुम इसलिए पीछे नहीं रहे), अपितु तुमने यह कल्पना की कि रसूल और (उसके साथी) मानने वाले अब कभी अपने घरों की ओर पलट कर नहीं आ सकेंगे और यह बात तुम्हारे दिलों में जड़ दी गई और तुमने बुरी बुरी कल्पनाएं कीं और (इसका परिणाम यह निकला कि) अंततः तुम लोग बर्बाद हुए। (याद रखो), जो परमेश्वर और उसके रसूल पर सच्चा ईमान नहीं लाए तो इसी प्रकार के नकारने वाले हैं जिनके लिए हमने दहकती आग तैयार कर रखी है और (वहां कोई किसी के काम नहीं आएगा, इसलिए कि) धरती और समस्त आकाशों का साम्राज्य परमेश्वर ही का है। वही जिसको चाहेगा, क्षमा करेगा और जिसको चाहेगा, (अपने नियम अनुसार), दण्ड देगा। और (जो अब भी पलटना चाहें तो) परमेश्वर क्षमा करने वाला है, उसकी कृपा शाश्वत है।
तुम लोग (भविष्य में) जब युद्ध में जीती हुई चीज़ें लेने के लिए जाने लगोगे तो ये पीछे छोड़े हुए लोग कहेंगे कि हमें अनुमति दीजिए कि हम भी आप लोगों के साथ चलें। ये चाहते हैं कि परमेश्वर की बात को बदल दें। इनसे स्पष्ट कह देना कि तुम कदापि हमारे साथ नहीं चल सकते। यही बात तो परमेश्वर ने तुमको पहले कही थी, (जब पैग़ंबर यात्रा के लिए निकले थे)! इसके उत्तर में ये कहेंगे कि नहीं, अपितु तुम लोग हमसे जलते हो। कदापि नहीं, अपितु यही लोग बहुत कम समझते हैं।
जो बद्दुओं में से पीछे छोड़ दिए गए थे, उनसे कहना कि शीघ्र ही तुम्हें ऐसे लोगों से लड़ने के लिए बुलाया जाएगा जो बड़े शक्तिशाली हैं। तुम उनसे लड़ोगे या वे इस्लाम स्वीकार कर लेंगे। फिर यदि तुमने आदेश का पालन किया तो परमेश्वर तुम्हें अच्छा प्रतिफल देगा और यदि (कहीं उस समय भी) विद्रोह किया, जैसे पहले विद्रोह कर चुके हो तो परमेश्वर तुमको कष्टदायक यातना के सामने कर देगा।
(इससे केवल विकलांगों को छूट होगी, इसलिए कि) अंधे पर कोई पाप नहीं, (यदि वह जिहाद के लिए न निकले। इसी प्रकार) लंगड़े पर भी पाप नहीं और न रोगी पर कोई पाप है, (यदि वे आज्ञा-पालन पर जमे हों)। और जो परमेश्वर और उसके रसूल की आज्ञा-पालन पर जमा रहेगा, परमेश्वर उसको ऐसे बाग़ों में प्रवेश देगा जिन के नीचे नहरें बहती होंगी। और जो विद्रोह करेगा, उसे वह कष्टदायक यातना का दण्ड देगा।
(तुम्हें शुभ समाचार हो कि) परमेश्वर मानने वालों से प्रसन्न हो गया, जब वे पेड़ के नीचे तुमसे बैअत कर रहे थे, उस समय परमेश्वर ने जान लिया जो कुछ उनके दिलों में था तो उसने उनपर सांत्वना उतार दी और उनको ऐसी विजय प्रदान कर दी जो शीघ्र ही प्रकट होने वाली है और युद्ध में जीती हुई बहुत सी चीज़ें भी, जिनको वे प्राप्त करेंगे। परमेश्वर प्रबल है, वह बड़ा प्रज्ञावान है।
(हे मानने वालो), परमेश्वर ने युद्ध में जीतने की बहुत सी चीज़ों का वचन तुम्हें दिया है जो तुम प्राप्त करोगे। तो यह (पहली विजय की) जीती हुई चीज़ें तो उसने तुरंत तुम्हें प्रदान कर दी हैं और लोगों के हाथ तुमसे रोक दिए हैं कि यह सांत्वना का कारण हो और मानने वालों के लिए (परमेश्वर की सहायता की) एक निशानी बन जाए और वह तुमको सीधा मार्ग दिखाए। इसके अतिरिक्त एक विजय और भी है जो अभी तुम्हारे बस में नहीं है, परंतु परमेश्वर ने उसको घेरे रखा है और परमेश्वर हर कार्य का सामर्थ्य रखता है।1
टिप्पणियाँ 1
- इससे तात्पर्य मक्का पर जीत है और ऊपर उन बहुत सारी जीतों और विजयोपहारों का वर्णन है जो हुदैबियह से वापसी के बाद साथ ही मुसलमानों को प्राप्त हुए। ↩
ये नकारने वाले (जिनसे तुम संधि करके आए हो), यदि (इस अवसर पर) तुमसे युद्ध करते तो अवश्य पीठ फेरते, फिर अपने लिए कोई समर्थक और कोई सहायक नहीं पाते। यह परमेश्वर की निर्धारित की हुई रीति है जो पहले से चली आ रही है और परमेश्वर की रीति में तुम कोई परिवर्तन नहीं पाओगे।
वही है जिसने मक्का की घाटी में उनके हाथ तुमसे और तुम्हारे हाथ उनसे रोक दिए, इसके बाद कि उसने तुमको उनपर विजयी कर दिया था और जो कुछ तुम कर रहे थे, परमेश्वर उसे देख रहा था।
ये वही हैं जिन्होंने (परमेश्वर के पैग़ंबर को) नकार दिया और तुमको मस्जिद-ए-हराम से रोका और क़ुर्बानी के जानवरों को भी रोक दिया कि वहीं खड़े रह जाएं और अपने स्थान पर न पहुंच पाएं। सत्य यह है कि यदि (मक्का में उस समय) ऐसे मोमिन पुरुष और ऐसी मोमिन महिलाएं न होतीं जिन्हें तुम नहीं जानते थे कि (हमला करते तो) उन्हें रौंद डालते, फिर इनके कारण तुम पर अनजाने में आरोप आ जाता तो हम युद्ध की अनुमति दे देते, परंतु हमने इसलिए अनुमति नहीं दी कि परमेश्वर जिसको चाहे, (ईमान का सौभाग्य दे और) अपनी दया में प्रवेश कर ले। यह सत्य है कि यदि वे लोग अलग हो गए होते तो हम उनमें से नकारने वालों को कष्टदायक दण्ड के सामने कर देते।
उस घड़ी को याद रखो, जब इन नकारने वालों ने अपने दिलों में मताग्रह पैदा कर लिया, जाहिलिय्यत के समय का सा मताग्रह तो परमेश्वर ने अपने रसूल पर और उसके मानने वालों पर अपनी सांत्वना उतारी और उन्हें पुण्यशीलता की बात का पालन करने वाला रखा और वे उसके अधिकारी और उसके योग्य भी थे और परमेश्वर हर चीज़ का जानने वाला है।
(इसलिए संतुष्ट रहो, हे मानने वालो), यह सत्य है कि परमेश्वर ने अपने रसूल को पूर्णतः सच्चा सपना दिखाया था। निस्संदेह, परमेश्वर ने चाहा तो तुम मस्जिद-ए-हराम में अवश्य प्रवेश करोगे, पूर्ण शांति के साथ, इस प्रकार कि अपने सर मुंडवाओगे और बाल कतराओगे, तुम्हें कोई आशंका नहीं होगी। बस इतनी बात थी कि परमेश्वर ने जान लिया जो तुमने नहीं जाना तो इससे पहले उसने एक निकटस्थ विजय प्रदान कर दी। वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन और सत्य धर्म के साथ भेजा है ताकि इस भूभाग के सभी धर्मों पर वह उसको विजयी कर दे। (यह होकर रहना है) और इसकी गवाही के लिए परमेश्वर पर्याप्त है।
मुहम्मद, परमेश्वर के रसूल और जो उनके साथ हैं, वे नकारने वालों पर कठोर और आपस में दयालु हैं। तुम उनको परमेश्वर के उपकार और उसकी प्रसन्नता की इच्छा में रुकूअ तथा सुजूद में सक्रिय देखोगे। उनकी पहचान उनके चेहरों पर सजदे के निशान से है। यह उनका दृष्टांत तौरात में है और इंजील में उनका दृष्टांत यह है की जैसे खेती हो, जिसने अपनी शाखा निकाली, फिर उसको सहारा दिया, फिर वह परिपक्व हुई, फिर वह अपने तने पर खड़ी हो गई। बोने वालों के दिलों को मोहित करती है कि नकारने वालों के दिल उनसे जलाए। परमेश्वर ने उन लोगों को जो उनमें से मान गए और उन्होंने भले कर्म किए हैं, क्षमा और महान प्रतिफल का वचन दिया है।