सूरह 44
अद्-दुख़ान्
मक्की · 59 आयतें · 12 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह 'हा-मीम' है। यह स्पष्ट ग्रंथ (स्वयं ही अपनी) गवाही है। इसमें कोई संदेह नहीं कि हमने इसे एक शुभ आशीष वाली रात में उतारा है, इसलिए कि हम लोगों को सचेत करने वाले थे। इस रात में प्रज्ञा के सभी मामले विशेष हमारे आदेश से विभाजित किए जाते हैं। और इसलिए कि ख़ास तेरे प्रभु की दया से हम (इन लोगों की ओर) रसूल भेजने वाले थे। निस्संदेह वही सुनने वाला और जानने वाला है। उस प्रभु की दया से जो धरती और समस्त आकाशों और उनके बीच की सब चीज़ों का प्रभु है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो। उसके अतिरिक्त कोई उपास्य नहीं है। वही जीवित करता और वही मारता है, तुम्हारा प्रभु और तुम्हारे पूर्वजों का प्रभु जो पहले चल बसे हैं।
नहीं, (ये मानने वाले नहीं हैं), अपितु यह संदेह में पड़े हुए खेल रहे हैं। तो उस दिन की प्रतीक्षा करो, (हे पैग़ंबर), जब आकाश स्पष्ट धुएं के साथ प्रकट होगा और वह लोगों पर छा जाएगा। यह एक कष्टदायक दण्ड है। (वे पुकार उठेंगे कि) हमारे प्रभु, हम पर से यह दण्ड टाल दे, हम मान लेते हैं। अब इनके लिए उपदेश कहां! इनके पास तो (हर चीज़ को) खोल कर बता देने वाला रसूल आ गया था। इस पर भी इन्होंने उससे मुँह मोड़ा और कह दिया कि यह तो एक सिखाया पढ़ाया बावला है। हम कुछ देर के लिए यह दण्ड (तुम से) हटा देते हैं, परंतु तुम लौट कर वही करोगे जो तुम करते रहे थे। याद रखो, जिस दिन हम बड़ी पकड़ पकड़ेंगे, वह दिन होगा कि हम पूरा बदला लेके रहेंगे।
इनसे पहले फ़िरऔन की क़ौम की भी हमने परीक्षा ली और उनके पास (इसी उद्देश्य से) एक माननीय रसूल आया था। इस संदेश के साथ इन परमेश्वर के भक्तों को मुझे सौंप दो, मैं तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूं और यह कि तुम परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह न करो। मैं तुम्हारे सामने एक स्पष्ट निर्णायक प्रमाण प्रस्तुत करता हूं। और (सचेत हो जाओ कि) मैं अपने और तुम्हारे प्रभु की शरण ले चुका हूँ, इससे कि तुम मुझे पत्थरों से मार दो। और यदि तुम मेरी पुष्टि नहीं करते तो (इस्राईलियों को जहाँ मैं ले जाना चाहता हूँ, उसके लिए) मेरा रास्ता छोड़ दो।
(उन पर इसका कोई प्रभाव नहीं हुआ) तो अंततः उसने अपने प्रभु को पुकारा कि ये अपराधी लोग हैं। आदेश हुआ: अच्छा तो मेरे भक्तों को रात ही रात में लेकर निकल जाओ और सावधान रहो कि तुम्हारा पीछा किया जाएगा। और हाँ, दरिया (से निकलने के बाद उस) को शांत छोड़ देना। इसमें कोई संदेह नहीं कि ये लोग अब डूब जाने वाली सेना हैं।1
टिप्पणियाँ 1
- यदि विचार कीजिए, तो आदेश की शैली ऐसी है कि जैसे दरिया उस समय पैग़ंबर के अधिकार में दे दिया गया था, जिसे यदि प्रशांत होना था तो उसकी अनुमति से होना था। ↩
ये कितने ही बाग़ और झरने और खेत और सुंदर मकान और ऐश की सामग्री पीछे छोड़ गए, जिनमें ये मज़े करते थे। इस प्रकार के अपराधियों के साथ यही होता है। और हमने इन सब चीज़ों का उत्तराधिकारी अन्य लोगों को बना दिया। फिर न आकाश इन पर रोया और न धरती, और न इनको मोहलत दी गई।
इस्राईलियों को हमने (इस प्रकार) अपमानित कर देने वाले दण्ड से मुक्ति दे दी। फ़िरऔन से — निस्संदेह वह बड़ा ही दुराग्रही था, मर्यादा तोड़ने वाला था। और उनको देख समझ कर दुनिया वालों पर श्रेष्ठता दी थी और उनको ऐसी निशानियाँ प्रदान की थीं जिनमें (उनके लिए) स्पष्ट वरदान था।
ये पूर्ण विश्वास के साथ कहते हैं कि बस यही हमारी पहली मृत्यु है और हम पुनः नहीं उठाए जाएँगे। अतः, (हे मानने वालो), यदि तुम सच्चे हो तो हमारे पूर्वजों को उठा लाओ।
(ये किस बलबूते पर दुराग्रह दिखा रहे हैं, इनसे पूछो), ये अच्छे हैं या तुब्बअ की क़ौम के लोग और जो उनसे पहले हुए हैं? हमने उनको नष्ट कर दिया, इसलिए कि वे भी (इसी प्रकार के) अपराधी लोग थे।
धरती और समस्त आकाशों और उनके बीच की चीज़ों को हमने खेल के लिए नहीं बनाया। (सत्य यह है कि) हमने इनको एक उद्देश्य के साथ ही पैदा किया है, किंतु इनके अधिकांश लोग जानते नहीं हैं। निस्संदेह निर्णय का दिन इन सबका निर्धारित समय है। जिस दिन कोई रिश्तेदार किसी रिश्तेदार के कुछ भी काम नहीं आएगा और न इनकी कोई सहायता की जाएगी। हाँ, उनको छोड़कर जिन पर परमेश्वर दया करे। निस्संदेह, वही प्रबल है, उसकी कृपा शाश्वत है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि जक़्क़ूम का पेड़ (उस दिन) पापियों का खाना होगा, तेल की तलछट के समान वह पेट में खौलेगा, जिस प्रकार गर्म पानी खौलता है। आदेश दिया जाएगा: इसको पकड़ो और घसीटते हुए नरक के बीच तक ले जाओ। फिर इसके सर पर खौलते हुए पानी का दण्ड उंडेल दो — इसे चखो, तुम ही हो कि बड़े बलवान, बड़े माननीय बने रहे। यह वही चीज़ है जिसमें तुम लोग संदेह किया करते थे।
परमेश्वर से डरने वाले, अपितु शांत अवस्था में होंगे। बाग़ों और झरनों में, रेशम और इस्तब्रक के वस्त्र पहने, आमने सामने बैठे होंगे। उनकी शान यही होगी। और हम उनसे मृगनैनी गोरियाँ ब्याह देंगे। वहां संतोष के साथ वे सब प्रकार के फल मंगा रहे होंगे। पहली मृत्यु के बाद (जो दुनिया में आ चुकी), वे अब इसमें कभी मृत्यु का स्वाद नहीं चखेंगे। इनको परमेश्वर ने नरक के दण्ड से बचा लिया। यह विशेष रूप से तेरे प्रभु की कृपा से होगा। यही वास्तव में बड़ी सफलता है।
तो (इन्हें इसी क़ुरआन से स्मरण कराते रहो, हे पैग़ंबर, इसलिए कि) हमने तो इसको तुम्हारी भाषा में अत्यंत योथोचित बनाया है, इसी लिए कि स्मरण प्राप्त करें। (फिर भी नहीं मानते) तो तुम भी परमेश्वर के निर्णय की प्रतीक्षा करो, ये भी प्रतीक्षा कर रहे हैं।