सूरह 43
अज़्-ज़ुख्रुफ़्
मक्की · 89 आयतें · 25 अनुच्छेद
परिचय
ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। दोनों का विषय परमेश्वर के एक, अद्वितीय और साझेदार रहित होने (तौहीद) को नकारने वालों को सचेत करना (इंज़ार) है। हालांकि, पहली सूरह में तौहीद को प्रमाणित करने और परमेश्वर के सहभागी बनाने (शिर्क) के खंडन का पहलू अधिक प्रमुख है और दूसरी में इंज़ार का जिसमें उन लोगों के लिए कड़ी डांट और इस डांट के प्रमाणों और संकेतों की व्याख्या है जो तौहीद के इस संदेश को पैग़ंबर मुहम्मद (स.) की मनगढ़ंत बात बता रहे थे और इस प्रकार क़ुरआन के बारे में यह कह रहे थे कि यह क़ुरआन इन्ही का बनाया हुआ है जिसे परमेश्वर का ग्रंथ कहकर पेश किया जा रहा है। क़ुरआन की महानता व महिमा और उसके अवतरण (नुज़ूल) की सटीक व्यवस्था का उल्लेख इसी संदर्भ से किया गया है। दोनों सूरतों को एक ही आयत से शुरू कर के क़ुरआन ने इनके इस आपसी संबंध की ओर स्वयं संकेत कर दिया है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह 'हा-मीम' है। यह स्पष्ट ग्रंथ (आप ही अपनी) गवाही है। हमने इसको अरबी क़ुरआन बना कर उतारा है, ताकि तुम समझो। और निस्संदेह, यह मूल ग्रंथ में हमारे पास है, अत्यंत ऊँचा और प्रज्ञता से भरा हुआ।
फिर क्या तुम्हें स्मरण दिलाने को हम केवल इसलिए अनदेखा कर लें कि तुम हद से बढ़ जाने वाले लोग हो? (कदापि नहीं, हम अपना निर्णायक प्रमाण पूरा करेंगे)। हमने पहले लोगों में भी कितने ही नबी रसूल बनाकर भेजे। इसके बावजूद जो नबी भी उनके पास आता, वे उसका मज़ाक़ ही उड़ाते थे। फिर हमने उनको, जो तुम्हारे इन नकारने वालों से कहीं बढ़कर शक्तिशाली थे, नष्ट कर डाला और बीते लोगों के उदाहरण बीत चुके हैं।
और यदि तुम इनसे पूछो कि धरती और समस्त आकाशों को किसने पैदा किया है तो अवश्य ही उत्तर देंगे कि इनको शक्तिशाली और ज्ञानी परमेश्वर ने पैदा किया है।
(वही) जिसने धरती को तुम्हारे लिए पालना बनाया और उसमें तुम्हारे लिए मार्ग निकाले ताकि तुम मार्ग पाओ। और जिसने आकाश से एक मात्रा में पानी बरसाया, फिर उसके माध्यम से हमने मुर्दा बस्ती को नवीन जीवन प्रदान किया। इसी प्रकार तुम भी (एक दिन) क़बरों से निकाले जाओगे। और जिसने यह सब अनेक प्रकार की वस्तुएं पैदा की हैं और तुम्हारे लिए नौकाएँ और चौपाये बनाए हैं जिन पर तुम सवार होते हो कि इनकी पीठ पर संतुष्टि से बैठो, जब इन पर संतुष्टि से बैठ जाओ तो अपने प्रभु के अनुग्रह को याद करो और कहो के दोषरहित है वह परम सत्ता जिसने इनको हमारी सेवा में लगा दिया। हम ऐसे नहीं थे कि इनको अपने वश में कर लेते। निस्संदेह हम अपने प्रभु ही की ओर लौटने वाले हैं।
(यह सब जानते और मानते हुए भी) इन्होंने परमेश्वर के सेवकों में से कुछ को उसका अंग बना डाला है। सत्य यह है कि मनुष्य स्पष्ट रूप से अकृतज्ञ है। क्या अपनी रचनाओं में से उसने अपने लिए बेटियां चुनी हैं और तुमको बेटे देकर आभूषित किया है? और इनकी अपनी दशा यह है कि जब इनमें से किसी को उस बात की शुभ सूचना दी जाती है, जिसका दोष परम दयालु परमेश्वर को देता है तो उसका चेहरा धुंधला पड़ जाता है और वह घुटा-घुटा रहने लगता है और (सोचता है कि) क्या वह पैदा हुई है जो गहनों में पलती और झगड़ों के अवसरों पर मानो गूंगी होती है।
(इन पर अफ़ोस), इन्होंने फ़रिश्तों को, जो परम दयालु परमेश्वर के सेवक हैं, बेटियां बना दिया! क्या ये उनकी रचना के समय उपस्थित थे? इनकी यह गवाही अब लिख ली जाएगी और इन्हें इसकी जवाबदेही करनी होगी।
कहते हैं कि यदि परम दयालु परमेश्वर चाहता तो हम इनकी पूजा नहीं करते। इनको तो इस मामले का कोई ज्ञान नहीं है, ये केवल तीर तुक्के लड़ाते हैं। क्या हमने इससे पहले कोई ग्रंथ इन्हें दिया था कि (अपनी इस मूर्खता के लिए) यह उसका प्रमाण पकड़े हुए हैं? कदापि नहीं, अपितु ये तो कहते हैं कि हमने अपने बाप-दादा को एक श्रेष्ठ मार्ग पर पाया है और हम उन्हीं के साथ-साथ उचित मार्ग पर चल रहे हैं। इसी प्रकार, (हे पैग़ंबर), हमने तुमसे पहले जिस बस्ती में भी कोई सचेत करने वाला भेजा है, उसके खाते पीते लोगों ने यही कहा कि हमने अपने पूर्वजों को एक श्रेष्ठ मार्ग पर पाया है और हम उन्हीं के पदचिह्नों पर चलते रहेंगे। उनके सचेत करने वाले ने कहा: क्या फिर भी कि यदि मैं उससे कहीं सीधे मार्ग की शिक्षा तुम्हारे पास ले आया हूं, जिस पर तुमने अपने पूर्वजों को पाया है? उन्होंने उत्तर दिया: तुम लोग जो कुछ भी दे कर भेजे गए हो, हम उसको मानने वाले नहीं हैं। अतः (नौबत यहाँ तक पहुंच गई तो) हमने उनसे (उनके इस विद्रोह का) बदला लिया। फिर देख लो कि [सत्य को] नकारने वालों का अंत कैसा हुआ।
ये (पूर्वजों की बात करते हैं तो) याद करें जब (इनके पुरखे) इब्राहीम ने अपने पिता से और अपनी क़ौम के लोगों से कहा था कि जिन्हें तुम पूजते हो, मैं उनसे पूरी तरह बरी हूं। मैं केवल उसी को पूजता हूं जिसने मुझे पैदा किया है। तो कोई संदेह नहीं कि (तुमसे संबंध तोड़ने के बाद) अब वही मेरा मार्गदर्शन करेगा। इब्राहीम ने यह बात एक परंपरा की हैसियत से अपने बाद वालों में छोड़ी ताकि वे इसकी ओर पलटें।
नहीं, (ये इससे अपरिचित नहीं थे), अपितु हुआ यह कि मैंने इनको और इनके पूर्वजों को दुनिया से तृप्त किया, (फिर लंबा समय बीत गया और इनके दिल कठोर हो गए), यहाँ तक कि इनके पास सत्य आया और एक पैग़ंबर भी जो धर्म से संबंधित हर चीज़ को स्पष्ट कर देने वाला है। यह सत्य जब इनके पास आया तो इन्होंने कह दिया कि यह तो जादू है और हम इसको कदापि मानने वाले नहीं हैं।
कहते हैं कि यह क़ुरआन (मक्का और ताइफ), दोनों नगरों के किसी बड़े आदमी पर क्यों नहीं उतारा गया? क्या तेरे प्रभु की दया यही बांटते हैं? दुनिया के जीवन में इनकी आजीविका की सामग्री तो इनके बीच हमने बाँट दी है और इस प्रकार बाँट दी है की एक के स्तर दूसरे से ऊँचे रखे हैं ताकि ये एक दूसरे से काम ले सकें और तेरे प्रभु की दया उससे अच्छी है जो ये एकत्रित कर रहे हैं।
(ये इस पर इतराएँ नहीं)। यदि यह आशंका न होती कि सब लोग एक ही पंथ के हो जाएँगे (और कोई ईमान पर नहीं रहेगा) तो जो लोग परम दयालु परमेश्वर के नकारने वाले हो रहे हैं, उनके घरों की छतें हम चांदी की कर देते और सीढ़ियां भी जिन पर वे चढ़ते और उनके घरों के द्वार और उनके आसन जिन पर वे तकिए लगा कर बैठते, अपितु (चांदी ही नहीं), सोने के भी। सत्य यह है कि यह सब चीज़ें तो केवल दुनिया के जीवन की सामग्री हैं और परलोक, (हे पैग़ंबर), तेरे प्रभु के यहाँ केवल उनके लिए है जो परमेश्वर से डरने वाले हैं।
(इन पर अफ़सोस, ये परम दयालु से विरक्त हैं) और जो परम दयालु की याद से मुँह मोड़ ले, उस पर हम एक शैतान थोप देते हैं, फिर वह उसका साथी बन जाता है। इसमें संदेह नहीं कि ऐसे लोगों को ये शैतान परमेश्वर के मार्ग से रोकते हैं और वे अपनी जगह यह समझ रहे होते हैं कि वे ठीक जा रहे हैं। यहाँ तक कि इस प्रकार का हर व्यक्ति जब हमारे पास आएगा तो अपने शैतान से कहेगा कि काश, मेरे और तुम्हारे बीच पूरब और पश्चिम के दोनों छोरों की दूरी होती! तो कैसा बुरा साथी होगा! कहा जाएगा: (लोगो), जब तुमने (दुनिया में) अपने आप पर अत्याचार ढाए हैं तो आज यह बात तुम्हारे लिए कुछ भी लाभदायक नहीं है कि अब तुम लोग दण्ड में एक दूसरे के भागीदार हो।
(ये अंधे और बहरे हो चुके हैं, हे पैग़ंबर)। फिर क्या तुम बहरों को सुनाओगे या अंधों को मार्ग दिखाओगे और उनको जो स्पष्ट पथभ्रष्टता में पड़े हैं? अब यदि हम तुम्हें उठा भी लें तो ये छूट नहीं जाएँगे, इसलिए कि हमने निर्णय कर रखा है कि हम इनसे अवश्य बदला लेंगे, या जिस दण्ड का वचन हमने इन्हें दिया है, वह (तुम्हारे इस दुनिया में होते हुए) तुम को ला दिखाएं तो इसमें भी कुछ कठिनाई नहीं, इसलिए कि हम इन पर पूरा सामर्थ्य रखते हैं। तो (इन्हें छोड़ो और) उस ग्रंथ को दृढ़तापूर्वक थामे रखो जो तुम्हारी ओर वह्य किया गया है। निस्संदेह तुम एक सीधे मार्ग पर हो। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह तुम्हारे और तुम्हारी क़ौम के लिए एक स्मरण है और आगे तुम सबको इसकी जवाबदेही करनी है। तुमसे पहले हमने अपने जो रसूल भी भेजे हैं, उनसे पूछकर देखो, क्या हमने परम दयालु परमेश्वर को छोड़ अन्य उपास्य भी बनाए हैं कि उनकी पूजा की जाए?
हमने मूसा को भी इसी प्रकार अपनी निशानियों के साथ फ़िरऔन और उसके अधिकारियों की ओर भेजा था तो उसने उन्हें आह्वान किया कि मैं समस्त लोकों के प्रभु का रसूल है। फिर जब वह हमारी निशानियों के साथ उनके पास आया तो वे उनकी हंसी उड़ाने लगे। और हम एक पर एक जो निशानी भी उन्हें दिखाते थे, वह दूसरी से बढ़कर ही होती थी और हमने उनको दण्ड में भी पकड़ा, ताकि वे पलटें।
प्रत्येक दण्ड के अवसर पर वे कहते थे कि हे मायावी, अपने प्रभु से उस वचन के आधार पर जो उसने तुमसे कर रखा है, हमारे लिए प्रार्थना करो। अब हम अवश्य मार्ग पर आ जाएँगे। फिर जब वह दण्ड हम उनसे टाल देते तो उसी समय वे वचन तोड़ देते थे।
(इससे जब लोगों में बेचैनी पैदा होने लगी तो) फ़िरऔन ने अपनी क़ौम में घोषणा कराई, उसने कहा: मेरी क़ौम के लोगो, क्या मिस्र का साम्राज्य मेरा नहीं है? और ये नहरें भी कि मेरे नीचे बह रही हैं? फिर क्या तुम देखते नहीं हो? यह अच्छा है या मैं इस व्यक्ति से अच्छा हूं जो एक बेकार व्यक्ति है और अपनी बात भी स्पष्ट कह नहीं सकता। (यदि यह पैग़ंबर है) तो ऐसा क्यों नहीं हुआ कि इसके लिए ऊपर से सोने के कंगन उतरे होते या इसके साथ पंक्तियाँ बनाए हुए फ़रिश्ते आते? तो उसने अपनी क़ौम को मूर्ख बनाया और वे उसके कहे में आ गए। निस्संदेह, वे अवज्ञाकारी लोग थे। अतः (अपनी अवज्ञा से) जब उन्होंने हमें क्रोधित कर दिया तो हमने उनसे प्रतिशोध लिया और उन सबको डुबो दिया और उनको अतीत की एक कथा और बाद वालों के लिए एक उदाहरण बना दिया।
और जब (इन्हीं तथ्यों के स्मरण के लिए) मर्यम पुत्र का उदाहरण दिया जाता है तो तुम्हारी क़ौम के लोग उस पर चिल्लाने लगते हैं और कहते हैं कि (उसके अनुयायी भी तो उसे अपना उपास्य समझते हैं, फिर) हमारे उपास्य अच्छे हैं या वह? वे तुम्हारे सामने यह बात केवल उल्टे सीधे वाद-विवाद के लिए उठाते हैं, वास्तव में ये हैं ही झगड़ालू लोग। वह एक व्यक्ति ही था जिस पर हमने अपनी कृपा की और इसराईलियों के लिए उसको (अपनी शक्ति का) एक उदाहरण बनाया और (तुम क्या जानो कि हमारी शक्ति कैसी असीम है)? यदि हम चाहते तो तुम्हारे अंदर से फ़रिश्ते पैदा कर देते जो धरती में तुम्हारे स्थान पर आ जाते।
(इनसे कहो, हे पैग़ंबर कि) निस्संदेह वह क़यामत का एक बड़ा प्रमाण है तो उसके घटित होने में संदेह न करो और मेरा अनुसरण करो। यही सीधा मार्ग है और शैतान तुमको (इस मार्ग से) रोकने न पाए। सत्य यह है कि वह तुम्हारा खुला हुआ शत्रु है।1
टिप्पणियाँ 1
- अर्थात ईसा मसीह (अ.स.) जिनका बिना पिता के जन्म, जिनके अद्भुत चमत्कार और जिनके माध्यम से यहूदियों के लिए क़यामत के दिन तक ईश्वरीय दण्ड का प्रकटन वास्तव में क़यामत का एक बड़ा प्रमाण है। ↩
और (याद रखो कि) जब ईसा स्पष्ट निशानियों के साथ आया था तो उसने यह आह्वान किया था कि (लोगो), मैं तुम्हारे पास प्रज्ञान लेकर आया हूं, इसलिए तुमको धर्म की वास्तविकता समझा दूं और इसलिए कि मैं तुम पर कुछ उन बातों की वास्तविकता स्पष्ट कर दूं जिनमें तुम मतभेद कर रहे हो। तो परमेश्वर से डरो और मेरी बात मानो। इसमें कोई संदेह नहीं कि परमेश्वर ही मेरा प्रभु है और वही तुम्हारा भी प्रभु है तो उसी की भक्ति करो। यही सीधा मार्ग है। पर (इतने स्पष्ट उपदेश के बाद भी) उसके अनुयायियों के अंदर से अनेक समूहों ने संप्रदाय पैदा कर लिए। अतः बर्बादी है उनके लिए एक कष्टदायक दिन के दण्ड की जिन्होंने (परमेश्वर के सहभागी बनाकर) अपनी जान पर अत्याचार किया है।
(इन्हें अब इनकी दशा में छोड़ो, हे पैग़ंबर)। ये तो क़यामत ही की प्रतीक्षा में हैं कि अचानक इन पर आ जाए और इनको सूचना भी न हो। (इन्हें बताओ कि अपने सहभागियों के भरोसे पर न रहें), उस दिन परमेश्वर से डरने वालों के अतिरिक्त सभी मित्र एक दूसरे के शत्रु बन जाएँगे।
मेरे भक्तो, आज न तुम्हें कोई आशंका है और न तुम असंतुष्ट होगे — ये जिन्होंने हमारी आयतों को मान लिया और आज्ञाकारी रहे। तुम और तुम्हारे साथी, सभी स्वर्ग में प्रवेश हो जाओ, तुम्हें प्रमुदित कर दिया जाएगा। उनके आगे सोने की थालें और सोने के प्याले घूम रहे होंगे और उसमें वे सब चीज़ें होंगी जो दिल को भाती और आंखों को आनंद देने वाली होंगी और (उनको शुभ सूचना सुनाई जाएगी कि) तुम इसमें सदा रहोगे। यह वह स्वर्ग है जिसके तुम अपने कर्मों के बदले में उत्तराधिकारी बनाए गए हो। और तुम्हारे लिए उसमें अत्यधिक फल होंगे जिनमें से तुम खाओगे।
अपितु, ये अपराधी सदा नरक की यातना में रहेंगे। वह इनसे हल्की नहीं की जाएगी और ये उस में निराश पड़े रहेंगे। इन पर हमने अत्याचार नहीं किया, अपितु ये स्वयं ही अपने ऊपर अत्याचार करते रहे। और ये (नरक के दारोगा को) पुकारेंगे कि हे मालिक! कोई ऐसा उपाय हो कि तेरा प्रभु हमारा काम ही तमाम करदे। वह उत्तर देगा कि (कदापि नहीं), अब तुम को इसी स्थिति में रहना है।
(क़ुरैश के लोगो), हम तुम्हारे पास सत्य लेकर आए हैं, परंतु तुम में अधिकांश का हाल यह है कि सत्य से विमुख हैं। क्या इन्होंने कोई बात ठान ली है तो निस्संदेह हम भी ठान लेंगे। क्या ये समझते हैं कि (पैग़ंबर के विरुद्ध) हम इनके भेदों और इनकी कानाफूसियों को सुन नहीं रहे हैं? क्यों नहीं, और हमारे दूत इनके पास लिख भी रहे हैं।
इनसे कह दो, (हे पैग़ंबर) कि यदि परम-दयालु परमेश्वर की कोई संतान हो तो सबसे पहला उसकी पूजा करने वाला मैं हूंगा। धरती और समस्त आकाशों का प्रभु, भव्य सिंहासन का स्वामी उन सब बातों से विमुक्त है जो ये करते हैं। तो इनको छोड़ो, ये बेकार की बातें और मसख़रापन कर लें, यहाँ तक कि अपने उस दिन का सामना कर लें जिसकी इन्हें चेतावनी सुनाई जा रही है।
वही अकेला आकाश में भी उपास्य है और वही धरती में भी उपास्य है और वही प्रज्ञावान और ज्ञानी है। बड़ी धन्य है वह परम सत्ता जिसके नियंत्रण में धरती और समस्त आकाशों और उनके बीच हर चीज़ का साम्राज्य है। उसी के पास क़यामत का ज्ञान है और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे। उसके अतिरिक्त ये जिन्हें पुकारते हैं, वे अनुशंसा का कोई अधिकार नहीं रखते। हाँ, जो सत्य की गवाही देंगे और वे उसको जानते भी होंगे — यदि तुम इनसे पूछो कि इन्हें किसने पैदा किया है तो अवश्य कहेंगे कि परमेश्वर ने। फिर कहां भटक जाते हैं? और वे अपनी इस बात से गवाही देंगे कि हे प्रभु, ये लोग हैं कि मानने वाले न हुए। अतः इनको अनदेखा करो और कह दो कि मेरा सलाम है। फिर ये शीघ्र ही जान लेंगे।