सूरह 45
अल्-जासियह्
मक्की · 37 आयतें · 11 अनुच्छेद
परिचय
ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। दोनों का विषय वही सचेत करना (इंज़ार) और शुभ समाचार देना (बशारत) है, जो पिछली सूरतों से चला आ रहा है। हालांकि, इन दोनों सूरतों में जो पहलू प्रमुख है, वह उन लोगों की आपत्तियों और शंकाओं का खंडन करना है जिन्हें संबोधित किया गया है और क़ुरआन तथा उसके आह्वान के प्रति उनके व्यवहार पर कड़ी चेतावनी देना है। दोनों सूरतों को एक ही आयत से शुरू कर के क़ुरआन ने इनके इस आपसी संबंध की ओर स्वयं संकेत कर दिया है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह 'हा-मीम' है। इस ग्रंथ का उतरना परमेश्वर की ओर से है जो प्रबल है, बड़ा प्रज्ञावान है। सत्य यह है कि धरती और समस्त आकाशों में बहुत सी निशानियाँ हैं, उनके लिए जो मानने वाले हों। और स्वयं तुम्हारी बनावट में और उन जानवरों में भी जो उसने (तुम्हारे लिए) फैला रखे हैं, उन लोगों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं जो विश्वास करना चाहें। और रात और दिन के बदल कर आने में और उस जीविका में जो परमेश्वर ने (पानी के रूप में) आकाश से उतारी, फिर उस से धरती को उसके मर जाने के बाद जीवित कर दिया और हवाओं के फेरने में भी उन लोगों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं जो बुद्धि से काम लें।
ये परमेश्वर की आयतें हैं जिन्हें हम सत्य के साथ तुम्हें सुना रहे हैं तो परमेश्वर और उसकी आयतों के बाद और कौन सी बात है जिसको ये मानेंगे! तबाही है हर उस झूठे दुराचारी के लिए जो परमेश्वर की आयतें सुनता है, वह उसको पढ़कर सुनाई जा रही हैं, फिर भी अहंकार के साथ अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है, जैसे कि उसने वे सुनी ही नहीं हैं। (यह उसका आचरण है), तो उसे एक कष्टदायक दण्ड का शुभ समाचार सुना दो। और हमारी आयतों में से (इसी प्रकार) उसे जब किसी बात का ज्ञान होता है तो उसको मज़ाक़ बना लेता है। यही हैं जिनके लिए अपमानजनक दण्ड है। इनके आगे नरक है और जो कुछ भी इन्होंने (दुनिया में) कमाया है, वह इनके कुछ भी काम आने वाला नहीं है और न वे जिनको इन्होंने परमेश्वर को छोड़ संरक्षक बना रखा है, इनके कुछ काम आएंगे और इनके लिए बड़ा दण्ड है। यह कुरआन वास्तविक मार्गदर्शन है और जो अपने प्रभु की आयतों के नकारने वाले हैं, उनके लिए एक कष्टदायक दण्ड है, ऐसा कि कपकपी पैदा कर दे।
(लोगो), परमेश्वर ही है जिसने समुद्र को तुम्हारे लिए हितकारी बना दिया है कि उसके आदेश से नौकाएँ उसमें चलें, ताकि तुम एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा करो और ताकि तुम उसका अनुग्रह ढूंढो और ताकि तुम उसके आभारी रहो। और जो कुछ धरती में है और जो कुछ समस्त आकाशों में है, सब उसी ने अपनी ओर से तुम्हारी सेवा में लगा रखा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इसके अंदर भी बहुत सी निशानियाँ हैं, उन लोगों के लिए जो मननशील हैं।
तुम मानने वालों से कह दो, (हे पैग़ंबर) कि इन्हें अनदेखा करें जो परमेश्वर के दिनों का भय नहीं रखते हैं कि (वे अपना घड़ा भर लें और) परमेश्वर एक समूह को उसकी कमाई का पूरा-पूरा बदला दे। (सत्य यह है कि) जो भले कर्म करेगा, उसका लाभ उसी के लिए है और जो बुराई करेगा तो उसका भार भी उसी पर है। फिर (इसी बदले के लिए) तुम अपने प्रभु की ओर लौटाए जाओगे।12
(ये किन लोगों के भरोसे पर तुम्हारा विरोध कर रहे हैं)? हमने निस्संदेह इस्राईलियों को धर्मग्रंथ और सत्ता और पैग़ंबरी प्रदान की थी और उन्हें विशुद्ध आजीविका दी थी और (अपने धर्म की सेवा के लिए विशेष करके) उन्हें दुनिया वालों पर श्रेष्ठता प्रदान की थी और हमने अपनी शरीअत के स्पष्ट निर्देश उनको दिए थे। फिर जो मतभेद उन्होंने किया तो (हमारी ओर से) उनके पास ज्ञान आ जाने के बाद केवल आपस के दुराग्रह से किया। निस्संदेह तेरा प्रभु क़यामत के दिन उनके बीच उन चीज़ों का निपटारा कर देगा जिनमें वे मतभेद करते रहे हैं। इसके बाद, (हे पैग़ंबर), अब हमने तुमको अपने धर्म की एक स्पष्ट शरीअत पर स्थापित किया है, तो तुम उसी का पालन करो और उन लोगों की इच्छाओं के पीछे न चलो जिनके पास ज्ञान नहीं है। ये परमेश्वर के आगे तुम्हारे कुछ काम आने वाले नहीं बनेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं कि अपने प्राणों पर ये अत्याचार करने वाले एक दूसरे के सहायक हैं और परमेश्वर उनका सहायक है जो उससे डरने वाले हैं।
यह क़ुरआन लोगों के लिए प्रज्ञावान आयतों का ग्रंथ है और जो लोग विश्वास करें, उनके लिए (दुनिया में) मार्गदर्शन और (आगे) साक्षात दया है। क्या ये पापकर्मी समझ बैठे हैं कि हम इन्हें और मानने वालों और भले कर्म करने वालों को एक जैसा कर देंगे कि इनका जीना और मरना समान हो जाएगा? बहुत बुरा मूल्यांकन है जो ये कर रहे हैं। परमेश्वर ने तो धरती और समस्त आकाशों को उद्देश्य सहित पैदा किया है कि लोगों का निर्णय करें और इसलिए किया है कि प्रत्येक व्यक्ति को उसकी कमाई का बदला दिया जाए। (इसलिए यही होगा) और लोगों के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा।
फिर क्या उन लोगों को देखा भी है जिन्होंने अपनी इच्छाओं को उपास्य बना लिया और परमेश्वर ने इसी आधार पर जिनको भटका दिया, इसके बावजूद कि (परमेश्वर के धर्म का) ज्ञान रखते थे और उनके दिल पर और कानों पर मुहर लगा दी और उनकी आँखों पर पर्दा डाल दिया है? तो इस प्रकार के लोगों का अब कौन मार्गदर्शन कर सकता है, इसके बाद कि परमेश्वर ने उन्हें भटका दिया है! (हे मानने वालो), फिर क्या तुम ध्यान नहीं देते हो!
(इनमें से जिन लोगों को क़यामत का विश्वास नहीं है), वे कहते हैं कि हमारा जीवन तो यही दुनिया का जीवन है। हम यहीं मरते और यहीं जीते हैं और (कोई व्यक्ति हो या क़ौम), यही काल-चक्र है जो हमें नष्ट कर देता है। सत्य यह है कि इस विषय में इनके पास कोई ज्ञान नहीं है। ये केवल अनुमान लगा रहे हैं। इन्हें जब हमारी स्पष्ट आयतें सुनाई जाती हैं तो इनके पास कोई निर्णायक प्रमाण इसके अतिरिक्त नहीं होता कि तुमसे कहते हैं कि यदि तुम सच्चे हो तो हमारे पूर्वजों को (जीवित करके) ले आओ। इन्हें बता दो कि परमेश्वर ही तुम्हें जीवित करता है, फिर वही तुमको मारता है, फिर वही क़यामत के दिन तक, जिसके आने में कोई संदेह नहीं, तुमको इकट्ठा करेगा। परंतु अधिकांश लोग जानते नहीं हैं।
(ये अपने देवताओं पर भरोसा किए बैठे हैं तो इनका विचार कच्चा है)। धरती और समस्त आकाशों का साम्राज्य परमेश्वर ही का है और जिस दिन क़यामत घटित होगी, उस दिन ये दुष्ट बड़े घाटे में पड़ेंगे। उस समय तुम देखोगे कि प्रत्येक समूह अपना निर्णय सुनने के लिए घुटनों के बल बैठा हुआ है। प्रत्येक समूह को अपने कर्मों का लेखा जोखा देखने के लिए पुकारा जाएगा। उनसे कहा जाएगा कि जो कुछ तुम करते रहे हो, आज तुम्हें उसका बदला दिया जाएगा। ये हमारा बहीखाता है जो तुम्हारे ऊपर ठीक-ठीक गवाही देगा, इसलिए कि जो कुछ तुम करते थे, उसे हम लिखवाते रहे हैं।
फिर जो मान गए थे और उन्होंने अच्छे कर्म किए थे, उनको उनका प्रभु अपनी दया में प्रवेश देगा। यही वास्तव में स्पष्ट सफलता है। रहे वे जिन्होंने मानने से इनकार कर दिया था, उनसे कहा जाएगा: अच्छा तो मेरी आयतें क्या तुम्हें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थीं? (अवश्य सुनाई जाती थीं), परंतु तुमने अहंकार किया और तुम अपराधी लोग थे। तुमसे जब कहा जाता था कि परमेश्वर का वचन निस्संदेह सत्य है और क़यामत के आने में कोई संदेह नहीं है तो तुम कहते थे कि हम नहीं जानते, क़यामत क्या है। हाँ, कुछ अनुमान सा अवश्य रखते हैं, परंतु उसका दृढ़ विश्वास हमको नहीं है।
उस समय इनके कर्मों की बुराइयां इन पर खुल जाएंगी और जिसकी हंसी उड़ाते थे, वही चीज़ इनको घेर लेगी। इनसे कहा जाएगा कि आज हम तुमको भुला देंगे, जिस प्रकार तुमने अपने इस दिन के मिलने को भुला दिया था। तुम्हारा ठिकाना नरक है और अब तुम्हारी कोई सहायता करने वाला नहीं है। यह इसलिए हुआ कि तुमने परमेश्वर की आयतों को मज़ाक़ बना लिया और दुनिया के जीवन ने तुम्हें धोखे में डाले रखा। इसलिए आज न ये नरक से निकाले जाएँगे और न इनको मौक़ा दिया जाएगा कि क्षमा मांगकर अपने प्रभु को मना लें। तो आभार परमेश्वर ही के लिए है, समस्त आकाशों के प्रभु और धरती के प्रभु, समस्त लोकों के प्रभु के लिए। धरती और समस्त आकाशों में उसी की बड़ाई है और वह प्रबल है, बड़ा प्रज्ञावान है।