सूरह 26
अश्-शुअरा
मक्की · 227 आयतें · 51 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह 'ता-सीन-मीम' है। ये उस ग्रंथ की आयतें हैं जो अपना आशय स्पष्ट रूप से बताती हैं। शायद तुम इस दुख में अपने प्राण खो दोगे कि ये नहीं मानते। यदि हम चाहें तो इन पर आकाश से कोई निशानी उतार दें कि इनकी गर्दनें उसके सामने झुक कर रह जाएं। (परंतु हम समझा रहे हैं और) इनकी दशा यह है कि परम दयालु परमेश्वर की ओर से इनके पास जो नवीन उपदेश भी आता है, ये उससे मुँह फेरे ही रहते हैं। तो इन्होंने नकार दिया है तो उस चीज़ की सूचनाएँ शीघ्र ही (अपनी वास्तविकता के साथ) इनके आगे प्रकट हो जाएंगी जिसका ये मज़ाक़ उड़ाते रहे हैं।
(ये निशानियों की प्रतीक्षा में हैं)। क्या इन्होंने धरती को नहीं देखा कि हमने उसमें सब प्रकार की कितनी लाभदायक चीज़ें उगाई हैं? इसमें, निस्संदेह बहुत बड़ी निशानी है, परंतु इनमें से अधिकांश मानने वाले नहीं हैं। और तेरा प्रभु, इसमें कोई संदेह नहीं कि वह प्रबल भी है और अत्यंत दयालु भी।
इन्हें उस समय की घटना सुनाओ, जब तेरे प्रभु ने मूसा को पुकारा कि तुम अत्याचारी क़ौम के पास जाओ, फ़िरऔन की क़ौम के पास --- क्या वे डरेंगे नहीं? उसने निवेदन किया: प्रभु मुझे डर है कि वे मुझे झूठा कहेंगे और मेरी दशा यह है कि (इस दायित्व के एहसास से) मेरा सीना घुटता है और मेरी बोली भी मंझी हुई नहीं है तो आप हारून की ओर पैग़ंबरी भेजें (कि वे इस कार्य में मेरी सहायता करे)। ओर उनका एक अपराध भी मेरे ऊपर है, इसलिए डरता हूँ कि वे मेरी हत्या कर देंगे।
परमेश्वर ने कहा: कदापि नहीं, (वे तुम्हारी हत्या नहीं कर सकते) तो अब दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ, हम तुम्हारे साथ सब सुनते रहेंगे। तो दोनों (बिना किसी संकोच के) फ़िरऔनके पास जाओ और उससे कहो कि हम जगत प्रभु के रसूल हैं, और इसलिए आए हैं कि तुम इस्राईलियों को हमारे साथ जाने दो। (उन्होंने यह बात फ़िरऔनसे आकर कही तो) उसने कहा: क्या हमने तुम्हें बचपन में अपने यहाँ रखकर पाला नहीं था और (तुम वही नहीं हो कि) अपनी आयु के कई साल तुमने हमारे अंदर बिताए और फिर अपनी वह हरकत की जो की (और भाग गए)? तुम बड़े ही अकृतज्ञ हो।
मूसा ने उत्तर दिया: मैंने यह किया था और (मैं मानता हूँ कि) उस समय मैं चूक गया था। फिर मुझे तुम लोगों से डर लगा (कि इसके बदले में तुम मेरी हत्या कर दोगे) तो मैं तुम से भाग गया। फिर मेरे प्रभु ने मुझे प्रज्ञा तथा विवेक से आभूषित किया और मुझको अपने पैग़ंबरों में से (एक पैग़ंबर) बना दिया। और यह उपकार है जो तुम मुझे जता रहे हो कि तुमने इस्राईलियों को ग़ुलाम बना रखा है!
फ़िरऔन ने कहा: और यह जगत प्रभु क्या है? मूसा ने उत्तर दिया: धरती और समस्त आकाशों का और जो कुछ उनके बीच है, सबका प्रभु, यदि तुम लोग विश्वास करने वाले बनो। फ़िरऔन ने अपने आसपास के लोगों से कहा: सुनते नहीं हो? मूसा ने (इस पर अपने संदेश का एक क़दम और आगे बढ़ा दिया और) कहा: तुम्हारा भी प्रभु और तुम्हारे पूर्वजों का भी प्रभु। फ़िरऔन ने कहा: तुम्हारा यह रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, पूरा ही बावला है। मूसा ने कहा: (और यह भी कि) पूरब और पश्चिम और जो कुछ उनके बीच है, सबका प्रभु, यदि तुम बुद्धिमान हो! फ़िरऔन (यह सुनकर) चिल्ला उठा कि यदि तुमने मेरे अतिरिक्त किसी और को उपास्य बनाया तो मैं तुम्हें कैद करके रहूंगा। मूसा ने पूछा: क्या तब भी की मैं तुम्हारे पास एक स्पष्ट निशानी लेकर आया हूँ? फ़िरऔन ने कहा: फिर उसे प्रस्तुत करो, यदि तुम सच्चे हो। इस पर मूसा ने अपनी लाठी (धरती पर) डाल दी तो एकाएक वह एक जीता जागता अजगर था और उसने अपना हाथ बाहर निकाला तो देखने वालों के लिए एकाएक चमकता हुआ निकला। फ़िरऔन ने (यह देखा तो) अपने आस पास के सरदारों से कहा: यह व्यक्ति अवश्य एक पहुंचा हुआ जादूगर है। चाहता है की अपने जादू के बल से तुम को तुम्हारे देश से निकाल दे। तो क्या सलाह देते हो?
उन्होंने कहा: इसे और इसके भाई को अभी टालिए और नगर-नगर संदेशवाहक भेज दीजिए जो सब बड़े-बड़े माहिर जादूगरों को आप के पास ले आएं। अतः एक निश्चित दिन के तय किए हुए समय पर जादूगर इकट्ठा कर लिए गए और लोगों को बुलावा भेज दिया गया कि क्या तुम लोग इकट्ठा होते हो? इसलिए कि हम जादूगरों का साथ दें, यदि वही विजयी रहते हैं। फिर जब जादूगर (मैदान में) आए तो उन्होंने फ़िरऔन से कहा: हमारे लिए पुरस्कार तो होगा, यदि हम ही विजयी रहे? फ़िरऔन ने उत्तर दिया: हाँ, और उस समय तो तुम हमारे क़रीबी लोगों में से हो जाओगे।
(अतः मुक़ाबला शुरू हुआ तो) मूसा ने जादूगरों से कहा: फेंको जो तुम्हें फेंकना है। इस पर उन्होंने अपनी रस्सियां और लाठियां फेंक दीं और बोले: फ़िरऔन के प्रताप की सौगंध, हम ही विजयी रहेंगे। फिर मूसा ने अपनी लाठी फेंकी तो एकाएक वह उनकी उस माया को निगलता चला जा रहा था जो वे बना कर लाए थे। तो (परमेश्वर की इस निशानी को देखकर) जादूगर सजदे में गिर पड़े। उन्होंने (अनायास) कहा: हमने समस्त लोकों के प्रभु को मान लिया है, मूसा और हारून के प्रभु को।
फ़िरऔन ने कहा: तुमने उसको मान लिया, इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति दूँ! निस्संदेह वही तुम्हारा गुरु है जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। तो अभी जान लोगे कि इसका परिणाम क्या है। मैं तुम्हारे हाथ और पाँव उलटी दिशाओं से कटवाऊँगा और तुम सब को सूली चढ़ा कर रहूँगा। जादूगरों ने उत्तर दिया: कोई डर नहीं, हम अपने प्रभु ही की ओर लौटेंगे। हमें आशा है कि हमारा प्रभु हमारी ग़लतियों को अनदेखा करेगा, इसलिए कि हम सब से पहले मान गए हैं।
(इसके बाद कई साल बीत गए, यहाँ तक कि हुज्जत पूरी हो गई, तब) हमने मूसा को वह्य की कि मेरे भक्तों को लेकर रात में निकल जाओ, इसलिए कि तुम्हारा पीछा किया जाएगा। इस पर फ़िरऔन ने (सेनाओं को इकट्ठा करने के लिए) नगर-नगर संदेशवाहक दौड़ा दिए कि ये कुछ मुट्ठी भर लोग हैं और कोई संदेह नहीं कि (अपनी हरकतों से) ये हमें क्रोधित कर रहे हैं और हम एक ऐसा राष्ट्र हैं जिसकी विशिष्टता हर समय चौकन्ना रहना है, (इसलिए हम इन्हें किसी उत्पात का अवसर नहीं देंगे)।
इस प्रकार फ़िरऔनियों को हम (उनके) बाग़ों और झरनों और कोष भण्डारों से और रहने के सम्मानित स्थानों से निकाल लाए। हम इसी प्रकार करते हैं और हमने इस्राईलियों को (फिलिस्तीन की भूमि में) इन्हीं सब चीज़ों का उत्तराधिकारी बना दिया।
(यह इस प्रकार हुआ कि मूसा निकले) तो सुबह होते ही वे लोग उनका पीछा करने में चल पड़े। फिर जब दोनों गुट आमने सामने हुए तो मूसा के साथ चिल्ला उठे कि हम तो पकड़े गए। मूसा ने कहा: कदापि नहीं, इसलिए कि मेरे साथ मेरा प्रभु है, वह अवश्य मेरा मार्गदर्शन करेगा।
इस पर हमने मूसा को वह्य की कि अपनी लाठी समुद्र पर मारो। उसने मारी तो वह फट गया और प्रत्येक भाग ऐसा हो गया, जैसे एक विशाल पर्वत। हमने दूसरे गुट को भी (इसी क्षण) उसी स्थान के पास पहुंचा दिया और मूसा को और उन सब लोगों को बचा लिया जो उसके साथ थे, फिर उन दूसरों को हमने वहीं डुबो दिया।
इसमें, निस्संदेह बहुत बड़ी निशानी है, परंतु इनमें से अधिकांश मानने वाले नहीं हैं। और तेरा प्रभु, इसमें कोई संदेह नहीं कि वह प्रबल भी है और अत्यंत दयालु भी।
और इन्हें इब्राहीम की कथा सुनाओ, जब उसने अपने पिता से और अपनी क़ौम (के लोगों) से पूछा था कि ये तुम क्या पूजते हो? उन्होंने उत्तर दिया: हम मूर्तियों को पूजते हैं, तो (तुम जो चाहे, कहते रहो), हम इनकी पूजा पर बराबर जमे रहेंगे।
इब्राहीम ने कहा: क्या ये तुम्हारी सुनते हैं, जब तुम इन्हें पुकारते हो? या तुम्हें कोई लाभ या क्षति पहुंचाते हैं? उन्होंने उत्तर दिया: नहीं, (हम यह सब नहीं जानते), अपितु हमने अपने पूर्वजों को ऐसा ही करते देखा है।
इब्राहीम ने कहा: फिर क्या तुमने इन पर विचार भी किया है जिन्हें तुम पूजते रहे हो? तुम भी और तुम्हारे पिछले पूर्वज भी। तो मेरे तो ये सब शत्रु हैं, जगत प्रभु परमेश्वर के अतिरिक्त जिसने मेरी रचना की है, फिर वही मेरा मार्गदर्शन करता है। और जो मुझे खिलाता और पिलाता है और जब मैं अस्वस्थ होता हूँ तो वही मुझे ठीक करता है और जो मुझे मृत्यु देगा, फिर मुझ को जीवित करेगा और जिससे मैं आशा रखता हूँ कि प्रतिफल के दिन वह मेरे पापकर्मों को क्षमा कर देगा।
(इब्राहीम यह सब कह चुका तो उसने प्रार्थना की कि) मेरे प्रभु, मुझे निर्णय लेने की क्षमता प्रदान कर और मुझे सदाचारियों के साथ मिला और बाद में आने वालों में मुझे भली ख्याति प्रदान कर और सुखदायक बाग़ के उत्तराधिकारियों में मुझे भी एक उत्तराधिकारी बना और मेरे पिता को क्षमा कर दे, निस्संदेह वह भटके हुए लोगों में से है। और जिस दिन लोग उठाए जाएँगे, उस दिन, (हे प्रभु), मुझे अपमानित न कर।
(परमेश्वर ने कहा): जिस दिन न धन काम आएगा, न संतान, केवल वही सफल होंगे जो सच्चा दिल लेकर परमेश्वर के पास आएंगे। (उस दिन) स्वर्ग परमेश्वर से डरने वालों के पास लाया जाएगा और नरक को पथभ्रष्ट लोगों के लिए बेनक़ाब कर दिया जाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि कहां हैं वे जिन्हें तुम परमेश्वर को छोड़ पूजते थे। क्या वे तुम्हारी कुछ सहायता करेंगे या (आज) स्वयं अपना बचाव कर लेंगे? फिर वे भी और ये भटके हुए लोग भी और इब्लीस की सेनाएं भी, सब के सब उसमें औंधे मुँह झोंक दिए जाएँगे।
वहाँ वे आपस में झगड़ते हुए (अपने नेताओं से) कहेंगे: परमेश्वर की सौगंध, हम स्पष्ट पथभ्रष्टता में थे, जबकि तुम्हें जगत प्रभु के समतुल्य बताते थे। (फिर अपने दुर्भाग्य पर शोक करेंगे कि) हमें तो इन अपराधियों ने भटकाया तो अब न हमारे लिए कोई अनुशंसा करने वाला है, न कोई उत्साहपूर्वक प्रेम करने वाला मित्र। अब तो काश, एक बार पलटना तय हो ताकि हम मानने वाले बन जाएं।
इसमें, निस्संदेह बहुत बड़ी निशानी है, परंतु इनमें से अधिकांश मानने वाले नहीं हैं। और तेरा प्रभु, इसमें कोई संदेह नहीं कि वह प्रबल भी है और अत्यंत दयालु भी।
नूह की क़ौम ने भी इसी प्रकार रसूलों को झूठा कह दिया, जब उनके भाई नूह ने उनसे कहा: क्या तुम डरते नहीं हो? मैं तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ, इसलिए परमेश्वर से डरो और मेरी बात मानो। मैं इस पर तुमसे कोई प्रतिफल नहीं मांगता। मेरा प्रतिफल तो जगत प्रभु के ऊपर है, तो परमेश्वर से डरो और मेरी बात मानो उन्होंने उत्तर दिया: क्या हम तुम्हें मान लें, यद्यपि तुम्हारा अनुसरण तो क्षुद्र लोगों ने किया हुआ है? नूह ने कहा: मैं क्या जानूं जो वे करते रहे हैं? उनका हिसाब मेरे प्रभु के ऊपर है, यदि तुम समझना चाहो। (इस समय तो वे आगे बढ़कर मुझे मान गए है) और मैं इन मानने वालों को, (तुम्हारी प्रसन्नता के लिए), बाहर करने वाला नहीं हूँ। मैं तो केवल एक स्पष्ट सचेत करने वाला हूँ।1
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- यह अत्यंत प्रभावशाली (बलीग़) उत्तर है। तात्पर्य यह है कि इससे पहले उनके कर्म नीच थे या शरीफों वाले, मुझे इससे कोई मतलब नहीं है। ↩
इस पर वे बोले: हे नूह, यदि तुम रुके नहीं तो अवश्य पत्थरों से मार दिए जाओगे।
(अंत में) नूह ने प्रार्थना की कि मेरे प्रभु, मेरी क़ौम ने मुझे झूठा कह दिया है, इसलिए तो अब मेरे और उनके बीच स्पष्ट निर्णय कर दे और मेरे साथ जो मानने वाले हैं, उन्हें मुक्ति प्रदान कर। अतः उसको और उसके साथियों को हमने भरी हुई नाव में बचा लिया और बाक़ी सभी लोगों को उसके बाद हमने डुबो दिया।
इसमें, निस्संदेह बहुत बड़ी निशानी है, परंतु इनमें से अधिकांश मानने वाले नहीं हैं। और तेरा प्रभु, इसमें कोई संदेह नहीं कि वह प्रबल भी है और अत्यंत दयालु भी।
इसी प्रकार आद ने रसूलों को झूठा कह दिया, जब उनके भाई हूद ने उनसे कहा: क्या तुम डरते नहीं हो? मैं तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूं। इसलिए परमेश्वर से डरो और मेरी बात मानो। मैं इस पर तुमसे कोई प्रतिफल नहीं मांगता। मेरा प्रतिफल तो जगत प्रभु परमेश्वर के ऊपर है।
(यह तुम्हारी क्या दशा है)? क्या हर ऊंची भूमि पर तुम इसी प्रकार निरर्थक स्मारक बनाते रहोगे? और इसी प्रकार बड़े बड़े महलों का निर्माण करते रहोगे मानो तुम्हें सदा रहना है? और जब किसी पर हाथ डालोगे तो तानाशाह बनकर डालोगे? तो परमेश्वर से डरो और मेरी बात मानो। उससे डरो, जिसने तुम्हें वे चीज़ें प्रदान की हैं जिन्हें तुम भलीभांति जानते हो। उसने तुम्हें पशु, पुत्र, बाग़ और झरने प्रदान किए हैं। सत्य यह है कि (तुम्हारे दुष्कर्मों के कारण) मैं तुम पर एक भयंकर दिन के दण्ड से डरता हूँ।
उन्होंने उत्तर दिया: हमारे लिए समान है, चाहे तुम उपदेश करो या उपदेश करने वाले न बनो। कुछ नहीं, (तुम जो बातें कर रहे हो), यही आदत पिछले लोगों की भी रही है। (ये केवल तुम्हारी धमकियाँ हैं), हम पर कोई दण्ड आने वाला नहीं है। अंत में उन्होंने उसको झूठा कह दिया, फिर हमने भी उन्हें नष्ट कर डाला। इसमें निस्संदेह बहुत बड़ी निशानी है, परंतु इनमें से अधिकांश मानने वाले नहीं हैं। और तेरा प्रभु, इसमें कोई संदेह नहीं कि वह प्रबल भी है और अत्यंत दयालु भी।
समूद ने भी रसूलों को झूठा कह दिया, जब उनके भाई सालेह ने उनसे कहा: क्या तुम डरते नहीं हो? मैं तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूं, इसलिए परमेश्वर से डरो और मेरी बात मानो। मैं इस पर तुम से कोई प्रतिफल नहीं मांगता। मेरा प्रतिफल तो जगत प्रभु परमेश्वर के ऊपर है।
(तुम क्या समझते हो), क्या तुम इन्हीं वरदानों में संतुष्ट होकर रहने दिए जाओगे जो यहाँ (तुमको उपलब्ध) हैं? बाग़ों और झरनों और खेतों में, और खजूरों में जिनके गुच्छे आपस में उलझे हुए होते हैं? और पर्वतों को खोदकर (इसी प्रकार) गौरव जताते, आनंद से घर बनाते रहोगे? तो परमेश्वर से डरो और मेरी बात मानो और उन मर्यादा भंग कर जाने वालों की बात न मानो जो धरती में उत्पात मचाते हैं, उसका सुधार नहीं करते।
वे बोले, कुछ नहीं, तुम पर तो किसी ने बुरी तरह जादू कर दिया है (जिससे तुम्हारी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है)। तुम हमारे जैसे एक मनुष्य ही हो, इसलिए कोई निशानी लाओ, यदि तुम सच्चे हो।
सालेह ने कहा: यह एक ऊँटनी है। दिन पानी पीने की बारी इसकी है और एक निर्धारित दिन की बारी तुम्हारे लिए है। और (सुनो), इसको किसी बुरी मंशा से हाथ न लगाना, अन्यथा एक भयानक दिन का दण्ड तुम्हें आकर पकड़ेगा। इस पर भी उन्होंने उसकी कूचें काट दीं, तो पछताते रह गए और अंततः उन्हें दण्ड ने आ पकड़ा। इसमें, निस्संदेह बहुत बड़ी निशानी है, परंतु इनमें से अधिकांश मानने वाले नहीं हैं। और तेरा प्रभु, इसमें कोई संदेह नहीं कि वह प्रबल भी है और अत्यंत दयालु भी।
लूत की क़ौम ने भी रसूलों को झूठा कह दिया, जबकि उनके भाई लूत ने उनसे कहा: क्या तुम डरते नहीं हो? मैं तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ, इसलिए परमेश्वर से डरो और मेरी बात मानो। मैं इस पर तुमसे कोई प्रतिफल नहीं मांगता। मेरा प्रतिफल तो जगत प्रभु परमेश्वर के ऊपर है।
(परमेश्वर के बंदो), क्या तुम (काम वासना के लिए) दुनिया के लोगों में से पुरुषों के पास जाते हैं और तुम्हारे प्रभु ने तुम्हारे लिए जो तुम्हारी पत्नियां पैदा की हैं, उन्हें छोड़ देते हो? नहीं, (यह कोई छोटी बात नहीं है), अभी तो तुम ऐसे लोग हों जो मर्यादा का उल्लंघन कर गए हो।
वे बोले कि, हे लूत, यदि तुम (ऐसी बातों से) नहीं रुके तो यहाँ से अवश्य निकाल बाहर किए जाओगे।
लूत ने उत्तर दिया: (कोई परवाह नहीं), मैं तुम्हारी इस करनी से अत्यंत अप्रसन्न लोगों में से हूँ। (तब उसने प्रार्थना की): मेरे प्रभु, तू मुझे और मेरे घरवालों को उस करनी के परिणाम से मुक्ति दे जो ये कर रहे हैं। तो हमने उसे और उसके सब घरवालों को मुक्ति दी, एक बुढ़िया को छोड़ जो पीछे रहने वालों में रह गई। फिर (उसको और) शेष सभी लोगों का हमने सर्वनाश किया और उनपर (पत्थरों की) भयानक बारिश बरसा दी। तो कैसी बुरी बारिश थी जो उनपर बरसाई गई जिन्हें सचेत कर दिया गया था।
इसमें, निस्संदेह बहुत बड़ी निशानी है, परंतु इनमें से अधिकांश मानने वाले नहीं हैं। और तेरा प्रभु, इसमें कोई संदेह नहीं कि वह प्रबल भी है और अत्यंत दयालु भी।
इसी प्रकार अरण्य वालों ने भी रसूलों को झूठा कह दिया, जब शुऐब ने उनसे कहा: क्या तुम डरते नहीं हो? मैं तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ, इसलिए परमेश्वर से डरो और मेरी बात मानो। मैं इस पर तुमसे कोई प्रतिफल नहीं मांगता। मेरा प्रतिफल तो परमेश्वर, जगत प्रभु के ऊपर है।
(मैं तुमसे कहता हूँ कि) नाप तौल पूरा करो और किसी का घाटा करने वाले न बनो और सीधी तौल से तोलो और लोगों को उनकी चीज़ें घटाकर न दो। धरती में बिगाड़ न फैलाते फिरो और उस (परमेश्वर) से डरो जिसने तुम्हारी रचना की है और तुम से पहली पीढ़ियों की भी।
उन्होंने उत्तर दिया: कुछ नहीं, तुम पर तो किसी ने बुरी तरह जादू कर दिया है (जिससे तुम्हारी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है) और यह भी कि तुम हमारे जैसे ही एक मनुष्य हो हम तो तुम्हें पूरा झूठा समझते हैं।
तो यदि तुम सच्चे हो तो आकाश से हम पर कोई टुकड़ा गिरा दो। शुऐब ने कहा: मेरा प्रभु भलीभांति जानता है जो कुछ तुम कर रहे हो। अंततः उन्होंने उसे झुठला दिया तो बादलों वाले दिन के दण्ड ने उन्हें आ पकड़ा और इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह एक भयानक दिन का दण्ड था1
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- अर्थात् उस दिन के दण्ड ने — जिसमें धूल का बवंडर उठा, बादल उमड़ आए, और घुटन भरी आंधी ने एक पंडाल की भाँति उन्हें चारों ओर से घेर लिया। ↩
इसमें, निस्संदेह बहुत बड़ी निशानी है, परंतु इनमें से अधिकांश मानने वाले नहीं हैं। और तेरा प्रभु, इसमें कोई संदेह नहीं कि वह प्रबल भी है और अत्यंत दयालु भी।
(ये पिछले लोगों की कथाएँ हैं। इस ग्रंथ को नकारने वाले भी यही कर रहे हैं, इसलिए संतुष्ट रहो), इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह अत्यंत व्यापक प्रबंध के साथ जगत् प्रभु की उतारी हुई वाणी है। इसको तुम्हारे दिल पर रूह-उल्-अमीन लेकर उतरा है, इसलिए कि अन्य पैग़ंबरों के जैसे तुम भी सचेत करने वाले बनो, अत्यंत स्पष्ट अरबी भाषा में --- और इसका वर्णन पिछले ग्रंथों में भी है। क्या इन लोगों के लिए यह कोई निशानी नहीं है कि इसको इस्राईलियों के विद्वान जानते हैं?
(ये अब भी नहीं मान रहे), और यदि हम इसको किसी ग़ैर-अरबी पर उतार देते, फिर वह इन्हें पढ़कर इसे सुनाता तो ये फिर भी इसको नहीं मानते। इन अपराधियों के दिलों में इसी प्रकार हमने इसे आने दिया है। ये इसे नहीं मानेंगे, जब तक कष्टदायक दण्ड न देख लें कि वह अचानक इन पर आ जाए और इन्हें खबर भी न हो, फिर उस समय कहें कि क्या हमें कुछ ढील मिलेगी।1
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- अर्थात् इस प्रकार दिलों में प्रविष्ट किया है कि परमेश्वर की अटल रीति (सुन्नतुल्लाह) के अनुसार ये लोग इसे स्वीकार करने में रुचि नहीं दिखाएंगे। ↩
तो क्या ये हमारे दण्ड के लिए जल्दी मचाये हुए हैं? भला देखो तो, यदि हम (वह दण्ड अभी न उतारें और) इनको कुछ साल और (इसी प्रकार) रहने दें, फिर वह दण्ड इन पर आ जाए जिससे इन्हें डराया जा रहा है तो यह रहने देना इनके किस काम आएगा?
(इन्हें जानना चाहिए कि यह ढील इत्माम-ए-हुज्जत के लिए है)। हमने किसी बस्ती को भी इसके बिना नष्ट नहीं किया कि उसके लिए पहले (उन लोगों को) याद दिलाने के लिए सचेत करने वाले आए। और हम अन्याय करने वाले नहीं हैं कि इसके बिना ही उन्हें नष्ट कर दें।
(यह परमेश्वर की उतारी हुई वाणी है, इससे स्मरण प्राप्त करो)। इसे शैतान लेकर नहीं उतरे हैं। न यह उनके लायक है, न वे ऐसा कर सकते हैं। सत्य यह है कि वे तो सुन गुन लेने ही से दूर रखे गए हैं।
(ये अब दंडित होने वाले हैं, हे पैग़ंबर), इसलिए परमेश्वर के साथ तुम किसी अन्य उपास्य को न पुकारना कि तुम ही दण्ड के योग्य हो जाओ, और अपने करीबी परिवार वालों को भी इससे सचेत कर दो, और जिन मानने वालों ने तुम्हारा अनुसरण किया है, उनके लिए अपनी स्नेहमय बाहें झुकाए रखो।
परंतु तुम्हारे परिवार के ये लोग यदि (इस पर भी) तुम्हारी बात न मानें तो इन्हें स्पष्ट बता दो कि जो कुछ तुम कर रहे हो, मैं उससे विमुक्त हूँ, और (अपने प्रचार के इस चरण में) उस परम शक्तिशाली और परम कृपालु पर भरोसा रखो जो तुम्हें उस समय देखता है, जब तुम रात में तहज्जुद के लिए उठते हो सज्दा करने वालों के बीच तुम्हारे आने और जाने को देखता है। निस्संदेह, वह सुनने वाला और परम ज्ञानी है।
(लोगो, यह वह पावन व्यक्ति है जिसके बारे में तुम कहते हो कि उस पर शैतान उतरते हैं)। तुम्हें बताऊँ कि शैतान किस पर उतरते हैं? वे हर लपाटिये दुराचारी पर उतरते हैं। वे (उनकी ओर) कान लगाते हैं (कि परोक्ष से कुछ सुन रहे हैं), परंतु उनमें से अधिकांश झूठे होते हैं।1
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- यह उन काहिनों (ज्योतिषियों/भविष्यवक्ताओं) का चित्रण है, जो उस समय अरब में अक्सर देखे जाते थे। ↩
(और कहते हो कि वह भी जैसे एक कवि है, जबकि) कवियों के पीछे तो बहके हुए लोग चला करते हैं। क्या देखते नहीं हो कि वे हर घाटी में भटकते हैं और ऐसी बातें कहते हैं जो करते नहीं हैं? इससे वही भिन्न हैं जो मान गए और जिन्होंने भले कर्म किए और परमेश्वर को बहुत याद किया और उसी समय बदला लिया, जब उनपर अत्याचार किया गया — ओर ये अत्याचार करने वाले, ये शीघ्र ही जान लेंगे कि इनका ठिकाना क्या होता है।