सूरह 98
अल्-बय्यिनह्
मक्की · 8 आयतें · 4 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
अहल-ए-किताब और मुश्रिकों में से जिन लोगों ने (क़ुरआन को) नकार दिया है, वे अपनी हठ से रुकने वाले नहीं हैं, यहाँ तक कि (उनकी चाहत के अनुसार) स्पष्ट प्रमाण उनके पास आजाए, अर्थात परमेश्वर की ओर से एक ऐसा पैग़ंबर जो अछूते पृष्ठों का पाठ करता हुआ (आकाश से) उतरे, जिनमें (उनके लिए) स्पष्ट निर्देश लिखे हुए हों।1
टिप्पणियाँ 1
- अर्थात यह पैग़ंबर और यह क़ुरआन नहीं, अपितु इनके स्थान पर एक ऐसा दूत जो आकाश से उतरे और प्रत्यक्ष रूप से परमेश्वर की वाणी हम तक पहुंचाए। ↩
सत्य यह है कि अहल-ए-किताब इस प्रकार की स्पष्ट निशानी अपने पास आ जाने के बाद ही मतभेद में पड़े। उनको निर्देश यही हुआ था कि परमेश्वर की उपासना करें, आज्ञापालन को उसके लिए विशुद्ध करते हुए, पूर्ण एकाग्रता के साथ, और नमाज़ की स्थापना करें और ज़कात का भुगतान करें। यही सीधे संघ का धर्म है।
अहल-ए-किताब और मुश्रिकों में जिन लोगों ने (इस दुराग्रह के साथ क़ुरआन को) नकार दिया है, वह निस्संदेह नरक की आग में जाएँगे, उसी में सदा रहने के लिए। यही सबसे बुरे प्राणी हैं।
इसके विपरीत जो लोग मान चुके और उन्होंने भले कर्म किए, वही सबसे अच्छे प्राणी हैं। उनका फल उनके प्रभु के पास कभी समाप्त न होने वाले बाग़ हैं जिनके नीचे नदियां बह रही होंगी। वे उनमें सदा-सदा रहेंगे। परमेश्वर उनसे प्रसन्न हुआ और वे उससे प्रसन्न हुए। यह अच्छा फल है उनके लिए जो अपने प्रभु से (बिन देखे) डरे।