सूरह 99

अज़्-ज़िल्ज़ाल्

मक्की · 8 आयतें · 2 अनुच्छेद

अक्षर
परिचय

ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। पहली सूरह क़यामत की जिस भयावह स्थिति से क़ुरैश क़बीले के लोगों को सचेत करती है, दूसरी सूरह में उसी संदर्भ में उनके उस आचरण पर उन्हें सचेत किया गया है, जो अपने ऊपर परमेश्वर की अनगिनत अनुकंपाओं के बावजूद वे उसके प्रति अपनाए हुए थे। दोनों में संबोधन की दिशा क़ुरैश के नेताओं की ओर है, और इनकी विषय-वस्तु से यह स्पष्ट होता है कि पिछली सूरतों की भाँति ये भी मक्का से मदीना प्रवास (हिज्रत) से कुछ समय पूर्व, मक्का में पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के धर्मप्रचार के इत्माम-ए-हुज्जत के चरण में अवतरित हुई हैं।1

टिप्पणियाँ 1
  1. इत्माम-ए-हुज्जत: सत्य का इस प्रकार निर्णायक रूप से स्पष्ट हो जाना कि नकारने का कोई बहाना बाक़ी न रहे। ↩

पहली सूरह — अज़्-ज़िल्ज़ाल — का विषय क़ुरैश को सचेत करना है कि क़यामत को लेकर वे किसी भ्रम में न रहें। उस दिन कोई चीज़ भी परमेश्वर से छिपी नहीं रहेगी। छोटी-बड़ी, हर भलाई और बुराई पूर्ण निश्चितता के साथ मनुष्य के सामने आ जाएगी।

दूसरी सूरह — अल्-आदियात — का विषय उन्हें इस सच्चाई से ख़बरदार करना है कि उनके चारों ओर लूट-पाट और अराजकता फैली हुई है। यह केवल परमेश्वर के पवित्र घर (हरम) से उनके संबंध के कारण है कि वे इस वातावरण में शांति से रह रहे हैं। होना तो यह चाहिए था कि इस घर के माध्यम से प्राप्त परमेश्वर के अनुग्रहों के लिए वे उसके प्रति आभार व्यक्त करते, लेकिन इसके विपरीत जो आचरण उन्होंने अपना रखा है, उन्हें सोचना चाहिए कि उसके होते हुए उनका परिणाम क्या होगा।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।

إِذَا زُلْزِلَتِ ٱلْأَرْضُ زِلْزَالَهَا ﴿1﴾ وَأَخْرَجَتِ ٱلْأَرْضُ أَثْقَالَهَا ﴿2﴾ وَقَالَ ٱلْإِنسَـٰنُ مَا لَهَا ﴿3﴾ يَوْمَئِذٍ تُحَدِّثُ أَخْبَارَهَا ﴿4﴾ بِأَنَّ رَبَّكَ أَوْحَىٰ لَهَا ﴿5﴾

जब धरती हिला दी जाएगी, जिस प्रकार उसे हिलाना है और धरती अपने सभी बोझ निकाल बाहर डाल देगी, और मनुष्य कहेगा: इसको क्या हुआ? उस दिन वह अपनी सारी कथा सुनाएगी, इसलिए कि तेरे प्रभु ने उसे आदेश दिया होगा।

يَوْمَئِذٍ يَصْدُرُ ٱلنَّاسُ أَشْتَاتًا لِّيُرَوْا۟ أَعْمَـٰلَهُمْ ﴿6﴾ فَمَن يَعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ خَيْرًا يَرَهُۥ ﴿7﴾ وَمَن يَعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ شَرًّا يَرَهُۥ ﴿8﴾

उस दिन लोग अलग-अलग निकलेंगे, इसलिए कि उनके कर्म उन्हें दिखाए जाएं। फिर जिसने एक कण के समान भलाई की है, वह भी उसे देख लेगा और जिसने एक कण के समान बुराई की है, वह भी उसे देख लेगा।