सूरह 96
अल्-अलक़्
मक्की · 19 आयतें · 5 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
इन्हें पढ़ कर सुनाओ, (हे पैग़ंबर), अपने उसे प्रभु के नाम से जिसने पैदा किया है, जमे हुए ख़ून के लोथड़े से मनुष्य को पैदा किया है। इन्हें पढ़ कर सुनाओ, और सत्य यह है कि तुम्हारा प्रभु बड़ा ही उदार है जिसने लेखनी के माध्यम से क़ुरआन सिखाया। मनुष्य को इसमें वह ज्ञान दिया जिसे वह नहीं जानता था।
(इसकी तुलना में जो बातें ये बनाते हैं, वह कुछ नहीं, हे पैग़ंबर), कदापि नहीं। मनुष्य निस्संदेह विद्रोह कर रहा है। इसलिए कि अपने आप को उसने निःस्पृह समझ लिया है। इसमें संदेह नहीं कि उसे एक दिन तेरे प्रभु ही की ओर पलटना है।
तुमने देखा उसे जो परमेश्वर के एक भक्त को रोकता है, जब वह नमाज़ पढ़ता है? भला देखो तो, यदि वह भक्त सन्मार्ग पर हो या पुण्यशीलता का उपदेश करता हो... ? भला देखो तो, यदि इस (दुर्भाग्यशाली) ने नकारा और मुँह मोड लिया हो... ? क्या इसने नहीं जाना कि परमेश्वर देख रहा है?
(यह कुछ नहीं)। कदापि नहीं। यदि यह रुका नहीं तो हम इसकी चोटी पकड़ कर घसीटेंगे, झूठी घटिया चोटी! फिर वह बुलाले अपने साथी, हम अपने सिपाही बुलाते हैं।
कदापि नहीं, तुम इसकी बात पर कदापि ध्यान न दो और सज्दे में गिरो और इस प्रकार मेरे निकट आ जाओ।