सूरह 92

अल्-लैल्

मक्की · 21 आयतें · 4 अनुच्छेद

अक्षर
इस सूरह के जोड़े का परिचय

इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।

وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰ ﴿1﴾ وَٱلنَّهَارِ إِذَا تَجَلَّىٰ ﴿2﴾ وَمَا خَلَقَ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓ ﴿3﴾ إِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتَّىٰ ﴿4﴾

रात साक्षी है, जब वह छा जाए; और दिन भी, जब वह प्रकाशित हो; और नर-नारी की रचना भी कि दुनिया है तो क़यामत भी है और जो कुछ तुम कर रहे हो, उसके परिणाम (वहां) अवश्य अलग-अलग होंगे।

فَأَمَّا مَنْ أَعْطَىٰ وَٱتَّقَىٰ ﴿5﴾ وَصَدَّقَ بِٱلْحُسْنَىٰ ﴿6﴾ فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْيُسْرَىٰ ﴿7﴾ وَأَمَّا مَنۢ بَخِلَ وَٱسْتَغْنَىٰ ﴿8﴾ وَكَذَّبَ بِٱلْحُسْنَىٰ ﴿9﴾ فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْعُسْرَىٰ ﴿10﴾ وَمَا يُغْنِى عَنْهُ مَالُهُۥٓ إِذَا تَرَدَّىٰٓ ﴿11﴾

फिर जिसने (परमेश्वर के मार्ग में) दिया और पुण्यशीलता को अपनाया औरअच्छे परिणाम को सत्य माना, उसे हम सहज-सहज सुख में ले जाएँगे। और जिसने कंजूसी की और बेपरवाही की और अच्छे परिणाम को झूठा बताया, उसे हम सहज-सहज कष्ट में पहुंचा देंगे। और उसके क्या काम आएगा उसका धन, जब वह गढ़े में गिरेगा?

إِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدَىٰ ﴿12﴾ وَإِنَّ لَنَا لَلْـَٔاخِرَةَ وَٱلْأُولَىٰ ﴿13﴾ فَأَنذَرْتُكُمْ نَارًا تَلَظَّىٰ ﴿14﴾

हमारा काम समझाना था, और सत्य यह है कि दुनिया भी हमारे ही नियंत्रण में है और परलोक भी। तो, (मक्का के रहने वालो), मैंने दहकती अग्नि से तुम्हें सचेत कर दिया है।

لَا يَصْلَىٰهَآ إِلَّا ٱلْأَشْقَى ﴿15﴾ ٱلَّذِى كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ ﴿16﴾ وَسَيُجَنَّبُهَا ٱلْأَتْقَى ﴿17﴾ ٱلَّذِى يُؤْتِى مَالَهُۥ يَتَزَكَّىٰ ﴿18﴾ وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُۥ مِن نِّعْمَةٍ تُجْزَىٰٓ ﴿19﴾ إِلَّا ٱبْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِ ٱلْأَعْلَىٰ ﴿20﴾ وَلَسَوْفَ يَرْضَىٰ ﴿21﴾

इसमें तुम्हारा वह सबसे बड़ा दुर्भाग्यशाली ही पड़ेगा जिसने नकारा और मुँह फेर लिया है। और उसे निस्संदेह दूर रखा जाएगा (हमारा पैग़ंबर), वह अत्यंत पुण्यशील जो अपना धन इसलिए देता है कि उसे शुद्धता प्राप्त हो और जिसका कोई उपकार भी किसी पर इसलिए नहीं कि उसे बदला मिले, अपितु केवल अपने महान परमेश्वर की प्रसन्नता के लिए है। और अब अधिक समय नहीं बीतेगा कि (अपने प्रभु के उपकारों से) वह अति प्रसन्न भी हो जाएगा।1

टिप्पणियाँ 1
  1. संकेत अबू लहब की ओर है जिसका व्यक्तित्व इस अध्याय के अंत में पूरी तरह खुल कर सामने आ जाएगा। ↩