सूरह 90

अल्-बलद्

मक्की · 20 आयतें · 3 अनुच्छेद

अक्षर
इस सूरह के जोड़े का परिचय

इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।

لَآ أُقْسِمُ بِهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ ﴿1﴾ وَأَنتَ حِلٌّۢ بِهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ ﴿2﴾ وَوَالِدٍ وَمَا وَلَدَ ﴿3﴾ لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِى كَبَدٍ ﴿4﴾ أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌ ﴿5﴾

नहीं, (ये सदा से ऐसे नहीं थे)। मैं इस नगर को गवाही में प्रस्तुत करता हूँ, (हे पैग़ंबर) — और (यह तुम्हारे लिए अजनबी नहीं), तुम इसी नगर में रहते हो — ओर पिता और उसकी संतान को भी, (जिनसे यह नगर बसा) कि मनुष्य को यहाँ पैदा किया तो उस समय वह निस्संदेह बड़ी कठिनाई में था।1

टिप्पणियाँ 1
  1. अर्थात पैग़ंबर इब्राहीम (अ.) और उनके वंश को। शब्द ‘वालिद’ श्रेष्ठता और महानता को दर्शाने के लिए अनिश्चित या जातिवाचक संज्ञा के रूप में है। ↩
أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌ ﴿5﴾ يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًا لُّبَدًا ﴿6﴾ أَيَحْسَبُ أَن لَّمْ يَرَهُۥٓ أَحَدٌ ﴿7﴾

(अब वह समृद्ध जीवन बिता रहा है तो) क्या वह समझता है कि उस पर किसी का ज़ोर नहीं? (उससे कहा जाता है कि दान करो तो) कहता है कि मैंने ढेर सारा धन लुटा दिया। क्या वह समझता है कि उसे किसी ने देखा नहीं?

أَلَمْ نَجْعَل لَّهُۥ عَيْنَيْنِ ﴿8﴾ وَلِسَانًا وَشَفَتَيْنِ ﴿9﴾ وَهَدَيْنَـٰهُ ٱلنَّجْدَيْنِ ﴿10﴾ فَلَا ٱقْتَحَمَ ٱلْعَقَبَةَ ﴿11﴾ وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْعَقَبَةُ ﴿12﴾ فَكُّ رَقَبَةٍ ﴿13﴾ أَوْ إِطْعَـٰمٌ فِى يَوْمٍ ذِى مَسْغَبَةٍ ﴿14﴾ يَتِيمًا ذَا مَقْرَبَةٍ ﴿15﴾ أَوْ مِسْكِينًا ذَا مَتْرَبَةٍ ﴿16﴾ ثُمَّ كَانَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْمَرْحَمَةِ ﴿17﴾ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ ﴿18﴾ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا هُمْ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ ﴿19﴾ عَلَيْهِمْ نَارٌ مُّؤْصَدَةٌۢ ﴿20﴾

क्या हमने उसके दो आँखें नहीं दीं (कि सच्चाई को देखता)? और ज़बान और दो होंठ नहीं दिए (कि भलाई का उपदेश करता)? और उसको दोनों मार्ग नहीं बताए (कि अच्छे और बुरे को समझता)? परंतु वह घाटी पर नहीं चढ़ा। और तुम क्या समझे कि वह घाटी क्या है? यही कि गर्दन छुड़ाई जाए या भूख के दिन किसी सगे संबंधी अनाथ या धूल में लिप्त किसी ग़रीब को खाना खिलाया जाए। फिर आदमी उनमें से हो जो ईमान लाए और जिन्होंने एक दूसरे को उस पर जमे रहने का उपदेश किया। यही सौभाग्यशाली हैं। ये स्वर्ग में होंगे। और जिन्होंने हमारी आयतों को नकार दिया, वही दुर्भाग्यशाली हैं। वे आग में घिरे हुए होंगे।