सूरह 88

अल्-ग़ाशियह्

मक्की · 26 आयतें · 4 अनुच्छेद

अक्षर
इस सूरह के जोड़े का परिचय

इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।

هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ٱلْغَـٰشِيَةِ ﴿1﴾ وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ خَـٰشِعَةٌ ﴿2﴾ عَامِلَةٌ نَّاصِبَةٌ ﴿3﴾ تَصْلَىٰ نَارًا حَامِيَةً ﴿4﴾ تُسْقَىٰ مِنْ عَيْنٍ ءَانِيَةٍ ﴿5﴾ لَّيْسَ لَهُمْ طَعَامٌ إِلَّا مِن ضَرِيعٍ ﴿6﴾ لَّا يُسْمِنُ وَلَا يُغْنِى مِن جُوعٍ ﴿7﴾

क्या तुम्हें उस विपत्ति की सूचना पहुंची है जो (पूरी सृष्टि पर) छा जाएगी? कितने चेहरे उस दिन उतरे हुए होंगे, निढाल, थके हारे। वह दहकती आग में पड़ेंगे। उन्हें एक खौलते हुए स्रोत का पानी पिलाया जाएगा। उनके लिए झाड़ काँटों के अतिरिक्त कोई आहार न होगा जो न बलवान करेगा, न भूक मिटाएगा।

وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَّاعِمَةٌ ﴿8﴾ لِّسَعْيِهَا رَاضِيَةٌ ﴿9﴾ فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍ ﴿10﴾ لَّا تَسْمَعُ فِيهَا لَـٰغِيَةً ﴿11﴾ فِيهَا عَيْنٌ جَارِيَةٌ ﴿12﴾ فِيهَا سُرُرٌ مَّرْفُوعَةٌ ﴿13﴾ وَأَكْوَابٌ مَّوْضُوعَةٌ ﴿14﴾ وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌ ﴿15﴾ وَزَرَابِىُّ مَبْثُوثَةٌ ﴿16﴾

इसके विपरीत कितने चेहरे उस दिन चमकते होंगे, अपने प्रयास पर संतुष्ट, ऊँचे बाग़ में। वहां कोई अशिष्ट बात नहीं सुनेंगे। उसमें झरना प्रवाहित होगा। उसमें ऊंची बैठकें बिछी होंगी और चषक अच्छे ढंग के रखे हुए और कालीन क्रम से लगे हुए और गद्दे सभी ओर पड़े हुए।

أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى ٱلْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ ﴿17﴾ وَإِلَى ٱلسَّمَآءِ كَيْفَ رُفِعَتْ ﴿18﴾ وَإِلَى ٱلْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ ﴿19﴾ وَإِلَى ٱلْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ ﴿20﴾

(ये नहीं मानते) तो क्या ऊँटों को नहीं देखते कि कैसे बनाए गए? और आकाश को नहीं देखते कि कैसे उठाया गया? और पर्वतों को नहीं देखते कि कैसे जमाए गए? और धरती को नहीं देखते कि कैसे बिछाई गई?

فَذَكِّرْ إِنَّمَآ أَنتَ مُذَكِّرٌ ﴿21﴾ لَّسْتَ عَلَيْهِم بِمُصَيْطِرٍ ﴿22﴾ إِلَّا مَن تَوَلَّىٰ وَكَفَرَ ﴿23﴾ فَيُعَذِّبُهُ ٱللَّهُ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَكْبَرَ ﴿24﴾ إِنَّ إِلَيْنَآ إِيَابَهُمْ ﴿25﴾ ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم ﴿26﴾

इसके होते हुए भी नहीं मानते तो तुम उपदेश कर दो, (हे पैग़ंबर) तुम उपदेश करने वाले हो, तुम इन पर कोई दरोग़ा नहीं हो। (मानने वाले अवश्य मानेंगे), रहे वे जो मुँह मोड़ेंगे और नकार देंगे तो परमेश्वर उन्हें बड़ा दण्ड देगा। निस्संदेह उन्हें हमारे पास ही पलटना है। फिर उनका हिसाब भी हमारे ऊपर है।