सूरह 87

अल्-अअ’ला

मक्की · 19 आयतें · 5 अनुच्छेद

अक्षर
परिचय

ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। इनमें संबोधन पैग़ंबर मुहम्मद (स.) से भी है और क़ुरैश क़बीले के नेताओं से भी, और इनकी विषय-वस्तु से यह स्पष्ट होता है कि पिछली सूरतों की भाँति ये भी मक्का में पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के धर्मप्रचार के सार्वजनिक चेतावनी (इंज़ार-ए-आम) के चरण में अवतरित हुई हैं।

दोनों सूरतों का विषय क़यामत की चेतावनी (इंज़ार-ए-क़यामत) है, लेकिन इसके साथ ही, दोनों में प्रचारक के लिए तसल्ली देने और संबोधित लोगों के व्यवहार पर अफ़सोस जताने का पहलू भी स्पष्ट है। पैग़ंबर मुहम्मद (स.) को दोनों सूरतों में यह आश्वासन दिया गया है कि उनका दायित्व केवल उपदेश करना और स्मरण दिलाना है। इसके बाद यह लोगों का काम है कि वे इस उपदेश को ग्रहण करें और उनकी अवज्ञा से निपटना परमेश्वर का काम है। इस मामले में नबी (स.) को कोई संकोच नहीं होना चाहिए।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।

سَبِّحِ ٱسْمَ رَبِّكَ ٱلْأَعْلَى ﴿1﴾ ٱلَّذِى خَلَقَ فَسَوَّىٰ ﴿2﴾ وَٱلَّذِى قَدَّرَ فَهَدَىٰ ﴿3﴾ وَٱلَّذِىٓ أَخْرَجَ ٱلْمَرْعَىٰ ﴿4﴾ فَجَعَلَهُۥ غُثَآءً أَحْوَىٰ ﴿5﴾

अपने प्रभु के नाम की स्तुति करो, (हे पैग़ंबर),जो सबसे ऊँचा है, जिसने बनाया,फिर नोक पलक सँवारे, जिसने (हर चीज़ के लिए) माप निर्धारित किया, फिर (उसके अनुसार) चलने का मार्ग दिखाया, जिसने वनस्पति निकाली, फिर उसे घना हरा भरा बना दिया।

سَنُقْرِئُكَ فَلَا تَنسَىٰٓ ﴿6﴾ إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّهُۥ يَعْلَمُ ٱلْجَهْرَ وَمَا يَخْفَىٰ ﴿7﴾ وَنُيَسِّرُكَ لِلْيُسْرَىٰ ﴿8﴾

(यह क़ुरआन भी इसी प्रकार एक दिन अपने समापन को पहुंचेगा, फिर) शीघ्र ही हम पूरा तुम्हें पढ़ा देंगे तो तुम नहीं भूलोगे, किंतु वही जो परमेश्वर चाहेगा। वह उसको भी जानता है जो (इस समय तुम्हारे) सामने है और उसको भी जो (तुमसे) छिपा हुआ है। इसी प्रकार हम (इन कठिनाइयों से भी) धीरे-धीरे तुम्हें राहत की ओर ले चलेंगे।

فَذَكِّرْ إِن نَّفَعَتِ ٱلذِّكْرَىٰ ﴿9﴾ سَيَذَّكَّرُ مَن يَخْشَىٰ ﴿10﴾ وَيَتَجَنَّبُهَا ٱلْأَشْقَى ﴿11﴾ ٱلَّذِى يَصْلَى ٱلنَّارَ ٱلْكُبْرَىٰ ﴿12﴾ ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ ﴿13﴾

इसलिए उपदेश करो, यदि उपदेश करना लाभदायक हो। जो परमेश्वर से डरता है, वह शीघ्र ही उपदेश पा लेगा और इससे मुँह वही महा-दुर्भाग्यशाली फेरेगा जो बड़ी आग में जा कर पड़ेगा, फिर न उसमें मरेगा, न जिएगा।1

टिप्पणियाँ 1
  1. संकेत है क़ुरैश कबीले के नेताओं, विशेष रूप से अबू लहब की ओर। ↩
قَدْ أَفْلَحَ مَن تَزَكَّىٰ ﴿14﴾ وَذَكَرَ ٱسْمَ رَبِّهِۦ فَصَلَّىٰ ﴿15﴾

अपितु, सफलता पा गया वह जिसने शुद्धता को अपनाया और इसके लिए अपने प्रभु का नाम याद किया,फिर नमाज़ पढ़ी।

بَلْ تُؤْثِرُونَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا ﴿16﴾ وَٱلْـَٔاخِرَةُ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰٓ ﴿17﴾ إِنَّ هَـٰذَا لَفِى ٱلصُّحُفِ ٱلْأُولَىٰ ﴿18﴾ صُحُفِ إِبْرَٰهِيمَ وَمُوسَىٰ ﴿19﴾

लोगो, तुम कोई निर्णायक प्रमाण नहीं पाते, अपितु दुनिया के जीवन को प्राथमिकता देते हो, यद्यपि परलोक उससे अच्छा भी है और स्थायी भी। (फिर यह कोई नई बात भी नहीं है)। यही बात उन ग्रन्थों में भी थी जो इससे पहले आए, इब्राहीम और मूसा के ग्रन्थों में।