सूरह 86

अत्-तारिक़्

मक्की · 17 आयतें · 5 अनुच्छेद

अक्षर
इस सूरह के जोड़े का परिचय

इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।

وَٱلسَّمَآءِ وَٱلطَّارِقِ ﴿1﴾ وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلطَّارِقُ ﴿2﴾ ٱلنَّجْمُ ٱلثَّاقِبُ ﴿3﴾ إِن كُلُّ نَفْسٍ لَّمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌ ﴿4﴾

आकाश साक्षी है और रात में आने वाले भी। और तुम क्या समझे कि रात में आने वाले क्या हैं? चमकते तारे। ये सब साक्षी हैं कि निस्संदेह, हर व्यक्ति के ऊपर एक निरीक्षक नियुक्त है।

فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَـٰنُ مِمَّ خُلِقَ ﴿5﴾ خُلِقَ مِن مَّآءٍ دَافِقٍ ﴿6﴾ يَخْرُجُ مِنۢ بَيْنِ ٱلصُّلْبِ وَٱلتَّرَآئِبِ ﴿7﴾ إِنَّهُۥ عَلَىٰ رَجْعِهِۦ لَقَادِرٌ ﴿8﴾

अच्छा तो मनुष्य थोड़ा यही देख ले कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है। उछलते पानी से जो पीठ और सीने की हड्डियों के बीच से निकलता है। (उसका प्रभु इस प्रकार पैदा कर सकता है तो) निस्संदेह वह उसे लौटा भी सकता है।

يَوْمَ تُبْلَى ٱلسَّرَآئِرُ ﴿9﴾ فَمَا لَهُۥ مِن قُوَّةٍ وَلَا نَاصِرٍ ﴿10﴾

उस दिन, जब दिलों के भेद परखे जाएँगे, उस समय मनुष्य के पास न कोई सामर्थ्य होगा और न कोई सहायता करने वाला।

وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلرَّجْعِ ﴿11﴾ وَٱلْأَرْضِ ذَاتِ ٱلصَّدْعِ ﴿12﴾ إِنَّهُۥ لَقَوْلٌ فَصْلٌ ﴿13﴾ وَمَا هُوَ بِٱلْهَزْلِ ﴿14﴾

(फिर यही नहीं), आकाश साक्षी है, बारिश बरसाने वाला और धरती साक्षी है, फट जाने वाली कि हमारी यह बात एक खरी बात है। यह कोई हंसी-मज़ाक़ नहीं है।

إِنَّهُمْ يَكِيدُونَ كَيْدًا ﴿15﴾ وَأَكِيدُ كَيْدًا ﴿16﴾ فَمَهِّلِ ٱلْكَـٰفِرِينَ أَمْهِلْهُمْ رُوَيْدًۢا ﴿17﴾

(इसके बारे में) ये एक चाल चल रहे हैं और मैं भी एक चाल चल रहा हूं। इसलिए इन नकारने वालों को छोड़ दो, (हे पैग़ंबर), इन्हें बस कुछ देर के लिए छोड़ दो।