सूरह 84
अल्-इन्शिक़ाक़्
मक्की · 25 आयतें · 4 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
जब आसमान फट जाएगा और अपने प्रभु के आदेश का पालन करेगा और उसे यही शोभा देता है, और जब धरती तान दी जाएगी और जो कुछ उसके अंदर है, उसे बाहर फेंक कर खाली हो जाएगी और अपने प्रभु के आदेश का पालन करेगी और उसे यही करना चाहिए, वही तुम्हारे प्रभु से मिलने का दिन होगा।
हे मानव, तू भी (इसी दिन के लिए) धीरे-धीरे अपने प्रभु की ओर जा रहा है और उससे अवश्य मिलने वाला है। फिर जिसके कर्मों का खाता वहां उसके दाएँ हाथ में दिया जाएगा, उसका हिसाब अत्यंत हल्का होगा और वह अति प्रसन्न अपने लोगों की ओर पलट आएगा। और जिसके कर्मों का खाता उसके पीछे ही से (उसके बंधे हुए हाथों में) पकड़ा दिया जाएगा, वह शीघ्र मृत्यु की दुहाई देगा और नरक में जा पड़ेगा। यह अपने लोगों में मग्न रहा। यह समझता था कि इसे कभी कहीं पलट कर नहीं जाना है। हाँ, क्यों नहीं, इसे अवश्य पलट कर जाना है। इसलिए कि इसका प्रभु तो इसे देख रहा था।
इसलिए यह बात नहीं, मैं संध्या की लाली को गवाही में प्रस्तुत करता हूं, और रात को और उसके समेट लेने को; और चाँद को, जब वह पूरा हो जाए कि (अपने प्रभु के सामने उपस्थित होने के लिए) तुम भी धीरे-धीरे अवश्य इसी प्रकार ऊपर चढ़ोगे।
तो इन्हें क्या हो गया है कि नहीं मानते और जब इनके सामने क़ुरआन पढ़ा जाता है तो (उसकी महिमा की स्वीकृति में) नतमस्तक नहीं हो जाते! अपितु (आश्चर्य है कि) ये नकारने वाले तो उल्टा उसे झूठा बता रहे हैं, यद्यपि जो कुछ ये इकट्ठा कर रहे हैं, परमेश्वर उसे भलीभांति जानता है। इसलिए, (हे पैग़ंबर), इन्हें एक कष्टदायक दण्ड का शुभ समाचार सुना दो। हाँ, जो मान चुके और जिन्होंने अच्छे कर्म किए हैं, उनके लिए वहां कभी समाप्त न होने वाला अच्छा फल है।