सूरह 80
अबस
मक्की · 42 आयतें · 6 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया, इस पर कि उसकी बैठक में वह नेत्रहीन आ गया। तुम्हें क्या मालूम, (हे पैग़ंबर) कि शायद वह (पूछता और) सुधरता या (तुम सुनाते), वह उपदेश सुनता और यह उपदेश उसके काम आता!
ये जो बेपरवाही करते हैं, इनके तो तुम पीछे पड़े हो, यद्यपि ये यदि न सुधरें तो तुम पर कोई दायित्व नहीं है। और जो मन लगाकर तुम्हारे पास आता है और परमेश्वर से डरता भी है तो उससे तुम बेपरवाही करते हो।
कदापि नहीं, (इनके पीछे पड़ने की कदापि आवश्यकता नहीं है)। यह तो एक स्मरण है। तो जिसका जी चाहे, इससे स्मरण प्राप्त करे (और जिसका जी चाहे, कानों में उँगलियाँ ठूँस ले) — आदर के योग्य, ऊँचे और अछूते ग्रंथों में, बड़े प्रतिष्ठित, अत्यंत वफ़ादार लिखने वालों के हाथ में।1
टिप्पणियाँ 1
- यह गुण उनकी विश्वसनीयता की विशेषता को और अधिक व्यक्त करता है कि वे अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने वाले हैं। ↩
बुरा हो मनुष्य का, यह कैसा अकृतज्ञ है! (क्या यह नहीं जानता कि) परमेश्वर ने किस चीज़ से से बनाया है? पानी की एक बूंद से; इसे बनाया है, फिर इसका भाग्य नियत किया है, फिर जीवन का मार्ग इसके लिए प्रशस्त किया है। फिर इससे मृत्यु दी, फिर क़ब्र में रखवाया है। फिर (क्या कठिन है), वह जब चाहेगा, इसे पुनः उठाकर खड़ा करेगा?
कदापि नहीं, (इसे छोड़ नहीं दिया जाएगा)। इसके प्रभु ने जो इसे कहा है, वह इस ने अभी तक पूरा नहीं किया है। (इसे प्रमाण चाहिए) तो यह मनुष्य कुछ अपना खाना ही देख ले कि हमने बहुत सारा पानी बरसाया है, फिर धरती को फाड़ कर चीरा है, फिर उसमें अनाज उगा दिए हैं और अंगूर और तरकारियाँ और ज़ैतून और खजूर और घने बाग़, फल और ताज़ा तथा शादाब हरियाली, तुम्हारे लिए और तुम्हारे मवेशियों के लिए, जीवन सामग्री के रूप में।
इसलिए जब वह कानों को बहरा कर देने वाली आ जाएगी तो इनसे पूछो कि फिर किधर जाएँगे? उस दिन आदमी अपने भाई से भागेगा, और अपनी मां से, अपने बाप से, अपनी बीवी और अपने बेटों से भागेगा। उस दिन इनमें से हर व्यक्ति को अपनी-अपनी पड़ी होगी। कितने चेहरे उस दिन प्रकाशित होंगे, हंसते हुए, अति प्रसन्न और प्रफुल्ल! और कितने चेहरे होंगे कि उनपर उस दिन धूल उड़ती होगी, कालिख छा रही होगी। यही नकारने वाले, यही अवज्ञाकारी होंगे।