सूरह 81
अत्-तक्वीर्
मक्की · 29 आयतें · 4 अनुच्छेद
परिचय
ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। पहली सूरह में क़ुरआन की सच्चाई के आधार पर तर्क किया गया है, जबकि दूसरी सूरह में मनुष्य की बनावट में परमेश्वर की निशानियों से तर्क प्रस्तुत किया गया है। संबोधन की दिशा क़ुरैश के नेताओं की ओर है और इनकी विषय-वस्तु से यह स्पष्ट होता है कि पिछली सूरतों की भाँति ये भी मक्का में पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के प्रचार के सार्वजनिक चेतावनी (इंज़ार-ए-आम) के चरण में अवतरित हुई हैं।
दोनों सूरतों का विषय क़यामत की हलचल के संदर्भ में श्रोताओं को सावधान करना है कि महाप्रलय का हंगामा (हंगामा-ए-महशर) इसलिए घटित होगा ताकि तुम में से प्रत्येक व्यक्ति यह जान ले कि उसने क्या आगे भेजा और क्या पीछे छोड़ा है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
जब सूरज की बिसात लपेट दी जाएगी, जब तारे फीके पड़ जाएँगे, जब पर्वत चलाए जाएँगे, जब दस मासिक गर्भवती ऊंटनियां स्वायत्त फिरेंगी, जब जंगली जानवर (अपनी सारी शत्रुता भूल कर) एक ही जगह इकट्ठे हो जाएँगे, जब समुद्र उबल पड़ेंगे, जब जीवों के जोड़ (उनके कर्मों के अनुसार) बंधेंगे, जब उससे जो जीवित गाड़ दी गई, पूछा जाएगा कि वह किस पाप के कारण मारी गई? जब खाते खोले जाएँगे, जब आकाश की खाल खींच ली जाएगी, जब नरक को भड़काया जाएगा, जब स्वर्ग को पास ले आया जाएगा, उस समय (लोगो, तुम में से) प्रत्येक व्यक्ति यह जान लेगा कि वह क्या लेकर आया है।
(यह क़ुरआन का आह्वान है, इसका शैतानों के साथ क्या संबंध)?
इसलिए, नहीं, (यह किसी शैतान की प्रेरणा नहीं है)। मैं उन तारों को गवाही में प्रस्तुत करता हूं जो पलटते, चलते, (शैतानों पर आग बरसाते, फिर) छिप जाते हैं, और रात को, जब वह पीछे हटती और सुबह को, जब वह (उसके बोझ से निकल कर) सांस लेती है कि निस्संदेह, यह एक माननीय दूत की लाई हुई वाणी है, बहुत शक्तिशाली, सिंघासन के स्वामी के यहाँ बहुत प्रतिष्ठित, उसका आदेश वहां माना जाता है और वह अत्यंत भरोसेमंद भी है।1
टिप्पणियाँ 1
- अर्थात उच्च लोक या देवलोक (मला-आ'ला) में। ↩
और (क़ुरैश के लोगो), तुम्हारा साथी कोई उन्मत्त भी नहीं है। सत्य यह है कि उसने इस मननीय दूत को पूर्णतः खुले क्षितिज पर देखा है। (तुम जानते हो कि) वह परोक्ष की बातों पर कभी उत्सुक नहीं रहा। (इसलिए कदापि नहीं), यह किसी शापग्रस्त शैतान की प्रेरणा नहीं है।
तो तुम कहां खोए जाते हो? यह तो दुनिया वालों के लिए एक उपदेश है, तुम में से उनके लिए जो सीधे मार्ग पर चलना चाहें। और तुम नहीं चाहते, मगर यह कि परमेश्वर, जगत प्रभु ही (अपने नियम अनुसार) चाहे।