सूरह 68
अल्-क़लम्
मक्की · 52 आयतें · 8 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह 'नून' है। क़लम साक्षी है और जो कुछ (लिखने वाले उससे) लिख रहे हैं कि अपने प्रभु की कृपा से तुम कोई दीवाने नहीं हो और तुम्हारे लिए निस्संदेह वह प्रतिफल है जो कभी विलुप्त न होगा और तुम बड़े उत्तम चरित्र पर हो। इसलिए शीघ्र ही तुम भी देख लोगे और वे भी देख लेंगे कि तुममें से किस समूह में है, जो अनर्थकारी बहकावे में पड़ा हुआ है। तुम्हारा प्रभु ही भलीभांति जानता है कि कौन उसके मार्ग से भटके हुए हैं और वही भलीभांति जानता है कि कौन उचित मार्ग पर हैं।
इसलिए तुम इन नकारने वालों की किसी बात की ओर ध्यान न दो। ये तो चाहते हैं कि तुम कुछ नरम पड़ो, फिर ये भी नरम पड़ जाएँगे। कदापि ध्यान न दो किसी ऐसे व्यक्ति की बात की ओर जो अत्याधिक शपथ खाने वाला है, तुच्छ है, बुरे इशारे करता है, चुग़ली लिए फिरता है, भलाई से रोकता है, हद से बढ़ जाने वाला है, अधिकार हनन करता है, पत्थर दिल है, और इसके अतिरिक्त यह कि कुलहीन भी है। यह इस आधार पर है कि उसके पास बहुत धन है और पुत्र हैं। हमारी आयतें उसे सुनाइए तो कहता है: ये तो पहले लोगों की कहानियां हैं। (समझता है कि वह बड़ी नाक वाला है), उसकी यह सूंड हम शीघ्र ही दाग़ देंगे।
हमने इनको उसी प्रकार परीक्षा में डाला है, जिस प्रकार बाग़-वालों को परीक्षा में डाला था, जब उन्होंने शपथ खाई कि वे अपने बाग़ के फल सुबह सवेरे अवश्य तोड़ देंगे और (किसी ग़रीब और अभावग्रस्त के लिए) कुछ भी नहीं छोड़ेंगे। फिर वे सोए पड़े थे कि तुम्हारे प्रभु की ओर से एक फिरने वाला उस पर फिर गया और उनका वह फलता-फूलता बाग़ ऐसा होकर रह गया जैसे कटी हुई खेती हो। अतः सुबह हुई तो एक दूसरे को पुकारने लगे कि फल तोड़ने हैं तो चलो सवेरे अपने खेत पर पहुंचो। फिर चल पड़े और आपस में चुपके-चुपके कहते थे कि देखना आज कोई अभावग्रस्त तुम्हारे पास बाग़ में आने ना पाए। वे बड़े जोश में निकले, यह समझते हुए कि सब कुछ उनके नियंत्रण में है। परंतु जब बाग़ को देखा तो बोले: हम अवश्य मार्ग भूल गए! नहीं, अपितु वंचित होकर रह गए। उनमें जो सबसे अच्छा आदमी था, उसने कहा: मैंने तुमसे कहा न था कि तुम अपने प्रभु का गुणगान क्यों नहीं करते? वे पुकार उठे कि दोषरहित है हमारा प्रभु, निस्संदेह हम ही अत्याचारी थे। फिर वे आपस में एक दूसरे की निंदा करने लगे। बोले: हाय, हमारा दुर्भाग्य, हम ही अवज्ञा में पड़े रहे। संभवतः हमारा प्रभु इसके स्थान पर इससे अच्छा बाग़ हमें प्रदान कर दे, हम अपने प्रभु ही की ओर लौटते हैं। (लोगो), इस प्रकार आएगा दण्ड और परलोक का दण्ड तो इस से कहीं बढ़कर है। काश, ये लोग इसको जानते!
अपितु, उनके लिए जो इस दण्ड से डरने वाले हैं, उनके प्रभु के पास सुख के बाग़ हैं। (तुम समझते हो कि यह नहीं होगा) तो क्या हम अपने आज्ञाकारी भक्तों को अपराधियों के बराबर कर देंगे? तुम्हें क्या हुआ है, तुम कैसा निर्णय करते हो? क्या तुम्हारे पास कोई ग्रंथ है जिसमें तुम पढ़ते हो कि वहां तुम्हारे लिए वही कुछ है जिसकी तुम इच्छा करोगे? क्या तुम्हारे लिए हम पर कोई कसमें हैं जो क़यामत तक चलेंगी कि तुम्हारे लिए वही कुछ है जो तुम निर्णय करोगे? इनसे पूछो कि इनमें से कौन इसकी ज़िम्मेदारी लेता है? क्या इनके (बनाए हुए) कोई सहभागी हैं (जो इसकी ज़िम्मेदारी लेंगे)? तो लाएं अपने इन सहभागियों को, यदि ये सच्चे हैं।
ये उस दिन को याद रखें, जब बड़ी हलचल पड़ेगी और ये सजदे के लिए बुलाए जाएँगे तो सज्दा नहीं कर सकेंगे। इनकी आँखें झुकी होंगी, इन पर अपमान छा रहा होगा। (ये दुष्ट, इनकी कमर अकड़ गई), ये उस समय भी सजदे के लिए बुलाए जाते थे, जब ये भले चंगे थे।
सो अब मुझे और इनको, जो इस वाणी को झूठा कह रहे हैं, छोड़ दो। हम इनको वहां से धीरे-धीरे (विनाश की ओर) ला रहे हैं, जहाँ से ये नहीं जानते। और मैं इनको ढील दे रहा हूं कि अपना बल लगा लें, इसलिए कि मेरी योजना बड़ी पक्की है।
(ये सुनते क्यों नहीं)? क्या तुम इनसे कोई वेतन चाहते हो कि ये उसकी लागत से दबे जाते हैं? या इनके पास परोक्ष का ज्ञान है (कि परलोक में भी यही सफल होंगे) और ये उसको लिख रहे हैं? (नहीं, कुछ नहीं), इसलिए (हे पैग़ंबर) तुम अपने प्रभु के निर्देश की प्रतीक्षा में धैर्य रखो और (अपनी क़ौम के विषय में) मछली वाले (यूनुस) के जैसे न हो जाओ, जब उसने (मछली के पेट में) पुकारा और वह दुख से भरा हुआ था। उस समय यदि उसके प्रभु की कृपा उस पर न होती तो (अपनी इस जल्दबाज़ी के परिणामस्वरुप) तिरस्कृत होकर वह उसी उजाड़ मैदान में पड़ा रहता, (जहां मछली ने उसे उगल दिया था। परंतु वह पलटा) तो उसके प्रभु ने (फिर से) उसका चयन किया और उसको अपने सदाचारी भक्तों में मिला लिया।
(इसलिए धैर्य किए रखो)। ये नकारने वाले जब (तुम से) यह उपदेश सुनते हैं तो लगता है कि अपनी आंखों के बल से तुम्हें फिसला देंगे और कहते हैं कि यह निस्संदेह दीवाना है, यद्यपि यह तो मानव मात्र के लिए एक उपदेश है।