सूरह 66
अत्-तह्रीम्
मदनी · 12 आयतें · 7 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
हे नबी, तुम अपनी पत्नियों का दिल रखने में वह चीज़ क्यों निषिद्ध करते हो, जो परमेश्वर ने तुम्हारे लिए वैध रखी है? फिर भी जो हुआ सो हुआ, परमेश्वर क्षमा करने वाला है, उसकी कृपा शाश्वत है। अपने इस प्रकार की शपथों को तोड़ देना परमेश्वर ने तुम्हारे लिए अनिवार्य कर दिया है और परमेश्वर ही तुम्हारा स्वामी है और वह ज्ञानी तथा प्रज्ञावान है।
(इसी प्रकार का मामला उस समय भी हुआ), जब पैग़ंबर ने अपनी एक पत्नी से एक गुप्त बात कही। फिर उन्होंने यह बात जब (किसी दूसरी पत्नी को) बता दी और परमेश्वर ने पैग़ंबर को उससे अवगत कर दिया तो उन्होंने कुछ बात जताई और कुछ टाल दी। फिर जब पत्नी को वही बताया तो वे बोलीं: आपको किसने इसकी सूचना दी? पैग़ंबर ने कहा: मुझे उस (प्रभु) ने सूचना दी है जो ज्ञानी और जानकार है। (नबी की पत्नियो, अपने आचरण का सुधार करो), यदि तुम दोनों परमेश्वर की ओर लौटोगी तो यही तुम्हें शोभा देता है, तुम्हारे दिल तो इसकी ओर आकर्षित ही हैं, परंतु यदि नबी के विरुद्ध एक हो जाओगी तो उसका कुछ नुक़सान नहीं होगा, इसलिए कि उसका समर्थक परमेश्वर है, और जिबरील और सभी सदाचारी मुसलमान और इससे आगे फ़रिश्ते भी उसके समर्थक और सहायक हैं। संभवतः वह तुम्हें तलाक़ दे दे तो उसका प्रभु तुम्हारे बदले में उसे तुमसे अच्छी पत्नियां प्रदान कर दे — मुसलमान, यथार्थ रूप से मानने वालियाँ, आज्ञापालन करने वालियाँ, तौबा करने वालियाँ, इबादत करने वालियाँ और आडंबरहीन जीवन बिताने वालियाँ, चाहे विधवाएँ हों या कुमारियाँ।
हे मानने वालो, (जब पैग़ंबर और उसकी पत्नियां भी जवाबदेही से ऊपर नहीं तो) तुम भी अपने आप को और अपने परिवार वालों को उस अग्नि से बचाओ जिसका ईंधन लोग और पत्थर होंगे, (जिन्हें वे पूजते रहे), जिस पर तीव्र स्वभाव वाले और कठोर फ़रिश्ते नियुक्त होंगे। परमेश्वर जो बात उन्हें कहेगा, उसके पालन में अवज्ञा नहीं करेंगे और वही करेंगे जिसका आदेश उन्हें दिया जाएगा। उस समय कहा जाएगा: हे काफ़िरो, आज बहाने न बनाओ, तुम्हें वही बदले में दिया जा रहा है जो तुम करते रहे हो।
हे मानने वालो, परमेश्वर की ओर निष्ठापूर्वक फिर जाओ। आशा है की तुम्हारा प्रभु तुम्हारे पापकर्म तुमसे दूर कर दे और तुम्हें ऐसे बाग़ों में प्रवेश दे जिनके नीचे नहरें बह रही हों, उस दिन जब परमेश्वर अपने नबी को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए हैं, अपमानित नहीं करेगा। उनका प्रकाश उनके आगे और उनके दाहिने चल रहा होगा। वे प्रार्थना कर रहे होंगे: प्रभु, हमारे इस प्रकाश को तू हमारे लिए पूरा कर दे और हमें क्षमा कर। सत्य यह है कि तू हर कार्य का सामर्थ्य रखता है।
हे नबी, (तुम्हारे संबोध्यों में से अब कोई भी उदारता के योग्य नहीं रहा, इसलिए) नकारने वाले और मुनफ़िक़, सब के साथ जिहाद करो और इनके लिए कठोर हो जाओ, और (इन्हें बता दो कि) इनका ठिकाना नरक है, और वह कैसा बुरा ठिकाना है!
(इन्हें जानना चाहिए कि हर व्यक्ति अपने कर्म के लिए उत्तरदाई है)। परमेश्वर नकारने वालों के लिए नूह की पत्नी और लूत की पत्नी का उदाहरण देता है। दोनों हमारे भक्तों में से दो सदाचारी भक्तों के घर में थीं, परंतु उन्होंने अपने पतियों के साथ विश्वासघात किया तो परमेश्वर के विरुद्ध वे उनके कुछ काम नहीं आ सके और दोनों स्त्रियों को आदेश हुआ कि जाओ आग में जाने वालों के साथ तुम भी आग में चली जाओ।
परमेश्वर मानने वालों के लिए फ़िरऔन की पत्नी का उदाहरण देता है, जब उसने प्रार्थना की: प्रभु, मेरे लिए स्वर्ग में अपने पास एक घर बना दे और मुझे फ़िरऔन और उसके कर्मों से मुक्ति दे और इस अत्याचारी क़ौम से मुक्ति प्रदान कर। और इमरान की बेटी मर्यम का उदाहरण देता है जिसने अपना चरित्र निष्कलंक रखा। फिर हमने उसके अंदर अपनी ओर से रूह फूंक दी, और उसने अपने प्रभु के वचनों और उसके ग्रंथों की पुष्टि की और वह आज्ञाकारी लोगों में से थी।