सूरह 60

अल्-मुम्तहिनह्

मदनी · 13 आयतें · 12 अनुच्छेद

अक्षर
इस सूरह के जोड़े का परिचय

इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَتَّخِذُوا۟ عَدُوِّى وَعَدُوَّكُمْ أَوْلِيَآءَ تُلْقُونَ إِلَيْهِم بِٱلْمَوَدَّةِ وَقَدْ كَفَرُوا۟ بِمَا جَآءَكُم مِّنَ ٱلْحَقِّ يُخْرِجُونَ ٱلرَّسُولَ وَإِيَّاكُمْ ۙ أَن تُؤْمِنُوا۟ بِٱللَّهِ رَبِّكُمْ إِن كُنتُمْ خَرَجْتُمْ جِهَـٰدًا فِى سَبِيلِى وَٱبْتِغَآءَ مَرْضَاتِى ۚ تُسِرُّونَ إِلَيْهِم بِٱلْمَوَدَّةِ وَأَنَا۠ أَعْلَمُ بِمَآ أَخْفَيْتُمْ وَمَآ أَعْلَنتُمْ ۚ وَمَن يَفْعَلْهُ مِنكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَآءَ ٱلسَّبِيلِ ﴿1﴾

हे मानने वालो, मेरे और अपने शत्रुओं को मित्र न बनाओ। तुम उनसे प्रेम के संबंध बढ़ाते हो। यद्यपि जो सत्य तुम्हारे पास आया है, वे उसको नकार चुके हैं। वे परमेश्वर के रसूल को और तुम्हें केवल इसलिए देश से निकाल देते हैं कि तुमने अपने प्रभु, परमेश्वर को मान लिया है। तुम इन्हें गुप्त रूप से मित्रता के संदेश भेजते हुए यदि मेरे मार्ग में जिहाद के लिए और मेरी प्रसन्नता की चाहत में निकलते हो, यद्यपि मैं जानता हूं जो तुम छिपाते और जो कुछ व्यक्त करते हो, तो सोचो कि क्या करते हो? और सत्य यह है कि तुम में से जो यह करते हैं, वही सीधे मार्ग से भटक गए हैं।

إِن يَثْقَفُوكُمْ يَكُونُوا۟ لَكُمْ أَعْدَآءً وَيَبْسُطُوٓا۟ إِلَيْكُمْ أَيْدِيَهُمْ وَأَلْسِنَتَهُم بِٱلسُّوٓءِ وَوَدُّوا۟ لَوْ تَكْفُرُونَ ﴿2﴾

(उनका आचरण तो यह है कि) यदि तुम्हें पा जाएं तो तुम्हारे साथ शत्रुता करेंगे और तुम पर अपने हाथ चलाएंगे और अपनी ज़बानें भी कि तुम्हें पीड़ा पहुंचाएं, और यही चाहेंगे कि तुम भी नकारने वाले हो जाओ।

لَن تَنفَعَكُمْ أَرْحَامُكُمْ وَلَآ أَوْلَـٰدُكُمْ ۚ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ يَفْصِلُ بَيْنَكُمْ ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ ﴿3﴾

(इनसे बचो, इसलिए कि) तुम्हारी यह रिश्तेदारियाँ और तुम्हारे बाल बच्चे कभी भी तुम्हारे काम न आएंगे, क़यामत के दिन, परमेश्वर तुम्हारे बीच जुदाई डाल देगा, और जो कुछ तुम कर रहे हो, परमेश्वर उसे देख रहा है।

قَدْ كَانَتْ لَكُمْ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ فِىٓ إِبْرَٰهِيمَ وَٱلَّذِينَ مَعَهُۥٓ إِذْ قَالُوا۟ لِقَوْمِهِمْ إِنَّا بُرَءَٰٓؤُا۟ مِنكُمْ وَمِمَّا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ كَفَرْنَا بِكُمْ وَبَدَا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمُ ٱلْعَدَٰوَةُ وَٱلْبَغْضَآءُ أَبَدًا حَتَّىٰ تُؤْمِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَحْدَهُۥٓ إِلَّا قَوْلَ إِبْرَٰهِيمَ لِأَبِيهِ لَأَسْتَغْفِرَنَّ لَكَ وَمَآ أَمْلِكُ لَكَ مِنَ ٱللَّهِ مِن شَىْءٍ ۖ رَّبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ ٱلْمَصِيرُ ﴿4﴾ رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَٱغْفِرْ لَنَا رَبَّنَآ ۖ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ ﴿5﴾

(तुम समझना चाहो तो) सत्य यह है कि इब्राहीम और उसके साथियों में तुम्हारे लिए सबसे अच्छा आदर्श है, जब उन्होंने अपनी क़ौम से स्पष्ट कह दिया कि हम तुमसे और तुम्हारे इन उपास्यों से, जिनको तुम परमेश्वर के अतिरिक्त पूजते हो, पूर्णतः अलग हैं। हम तुम्हारे नकारने वाले हैं और हमारे और तुम्हारे बीच अब सदा के लिए द्वेष और वैमनस्य प्रकट हो गया है, यहाँ तक कि तुम एक परमेश्वर को मान जाओ — इतनी बात के सिवा जो इब्राहीम ने अपने पिता से कही थी कि मैं आपके लिए क्षमा की प्रार्थना अवश्य करूंगा, यद्यपि परमेश्वर की ओर से मैं आपके लिए किसी चीज़ पर अधिकार नहीं रखता — (फिर उसने और उसके साथियों ने प्रार्थना की थी कि) प्रभु, हमने तुझपर भरोसा किया है और तेरी ओर लौट आए हैं और हमको तेरे ही पास पलट कर आना है। प्रभु, हमें इन नकारने वालों के लिए क्रूरता की प्रयोगशाला न बनने दे और हमें क्षमा कर, हे हमारे प्रभु। निस्संदेह, तू ही प्रबल है, बड़ा प्रज्ञावान है।

لَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِيهِمْ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ لِّمَن كَانَ يَرْجُوا۟ ٱللَّهَ وَٱلْيَوْمَ ٱلْـَٔاخِرَ ۚ وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْغَنِىُّ ٱلْحَمِيدُ ﴿6﴾

इन लोगों में निस्संदेह तुम्हारे लिए सबसे अच्छा आदर्श है, (तुम में से) हर उस व्यक्ति के लिए जो परमेश्वर और परलोक की आशा रखता है। (इस आदर्श का अनुसरण करो) और (याद रखो कि) जो मुँह फेरेंगे, परमेश्वर को उनकी कोई चिंता नहीं, इसलिए कि परमेश्वर निस्पृह है, वह अपने आप में उत्तम गुणों वाला है।

عَسَى ٱللَّهُ أَن يَجْعَلَ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَ ٱلَّذِينَ عَادَيْتُم مِّنْهُم مَّوَدَّةً ۚ وَٱللَّهُ قَدِيرٌ ۚ وَٱللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ﴿7﴾

(तुम ईमान पर स्थिर रहे तो) हो सकता है कि परमेश्वर तुम्हारे और इन नकारने वालों में से उन लोगों के बीच मित्रता पैदा कर दे (और उन्हें भी मानने का सौभाग्य दे), जिनसे (आज) तुमने दुश्मनी मोल ली है। परमेश्वर बड़ा शक्तिशाली है, और परमेश्वर क्षमा करने वाला तथा कृपालु है।

لَّا يَنْهَىٰكُمُ ٱللَّهُ عَنِ ٱلَّذِينَ لَمْ يُقَـٰتِلُوكُمْ فِى ٱلدِّينِ وَلَمْ يُخْرِجُوكُم مِّن دِيَـٰرِكُمْ أَن تَبَرُّوهُمْ وَتُقْسِطُوٓا۟ إِلَيْهِمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلْمُقْسِطِينَ ﴿8﴾

परमेश्वर तुम्हें इस बात से नहीं रोकता कि तुम उन लोगों के साथ भलाई और न्यायपूर्वक व्यवहार करो जिन्होंने धर्म के विषय में तुम से युद्ध नहीं किया और तुम्हें तुम्हारे घरों से नहीं निकाला है। निस्संदेह, परमेश्वर न्याय करने वालों से प्रेम करता है।

إِنَّمَا يَنْهَىٰكُمُ ٱللَّهُ عَنِ ٱلَّذِينَ قَـٰتَلُوكُمْ فِى ٱلدِّينِ وَأَخْرَجُوكُم مِّن دِيَـٰرِكُمْ وَظَـٰهَرُوا۟ عَلَىٰٓ إِخْرَاجِكُمْ أَن تَوَلَّوْهُمْ ۚ وَمَن يَتَوَلَّهُمْ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّـٰلِمُونَ ﴿9﴾

परमेश्वर जिस बात से तुम को रोकता है, वह यह है कि तुम उन लोगों से मित्रता करो जिन्होंने धर्म के विषय में तुम से युद्ध किया है और तुम्हें तुम्हारे घरों से निकाला है और तुम्हारे निकालने में दूसरों की सहायता की है। (वह इस से रोकता है और और तुम्हें सचेत करता है कि) जो इस प्रकार के लोगों से मित्रता करेंगे, वही दुष्ट हैं।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا جَآءَكُمُ ٱلْمُؤْمِنَـٰتُ مُهَـٰجِرَٰتٍ فَٱمْتَحِنُوهُنَّ ۖ ٱللَّهُ أَعْلَمُ بِإِيمَـٰنِهِنَّ ۖ فَإِنْ عَلِمْتُمُوهُنَّ مُؤْمِنَـٰتٍ فَلَا تَرْجِعُوهُنَّ إِلَى ٱلْكُفَّارِ ۖ لَا هُنَّ حِلٌّ لَّهُمْ وَلَا هُمْ يَحِلُّونَ لَهُنَّ ۖ وَءَاتُوهُم مَّآ أَنفَقُوا۟ ۚ وَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ أَن تَنكِحُوهُنَّ إِذَآ ءَاتَيْتُمُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ ۚ وَلَا تُمْسِكُوا۟ بِعِصَمِ ٱلْكَوَافِرِ وَسْـَٔلُوا۟ مَآ أَنفَقْتُمْ وَلْيَسْـَٔلُوا۟ مَآ أَنفَقُوا۟ ۚ ذَٰلِكُمْ حُكْمُ ٱللَّهِ ۖ يَحْكُمُ بَيْنَكُمْ ۚ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ ﴿10﴾

हे मानने वालो, (इस आचरण का परिणाम है कि) मुसलमान महिलाएं जब प्रवास करके तुम्हारे पास आएं तो उनकी जांच पड़ताल करो — परमेश्वर तो उनके ईमान से भलीभांति परिचित ही है — (परंतु तुम जांच करो), फिर यदि पता लगे कि वे मानने वाली हैं तो उन्हें इन नकारने वालों की ओर वापस न करो। न ये उनके लिए वैध हैं और न ये नकारने वाले इन महिलाओं के लिए वैध हैं। इन पर जो कुछ वे ख़र्च कर चुके हैं, वह उन्हें दे दो और तुम पर कोई पाप नहीं कि इनसे विवाह कर लो, इस शर्त के साथ के इनके महर इन्हें दे दो। और काफ़िर महिलाओं की लाज तुम स्वयं भी अपने क़ब्ज़े में न रखो और जो महर तुमने उन्हें दिए थे, वापस मांग लो और जो उन्होंने दिए थे, वे भी वापस मांग लें। यह परमेश्वर का निर्णय है जो वह तुम्हारे बीच कर रहा है और परमेश्वर ज्ञानी व प्रज्ञावान है।

وَإِن فَاتَكُمْ شَىْءٌ مِّنْ أَزْوَٰجِكُمْ إِلَى ٱلْكُفَّارِ فَعَاقَبْتُمْ فَـَٔاتُوا۟ ٱلَّذِينَ ذَهَبَتْ أَزْوَٰجُهُم مِّثْلَ مَآ أَنفَقُوا۟ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ٱلَّذِىٓ أَنتُم بِهِۦ مُؤْمِنُونَ ﴿11﴾

और यदि (वे संतुष्ट न हों और) तुम्हारी पत्नियों के महर में से तुम्हारा कुछ काफ़िरों की ओर रह जाए, फिर तुम्हारी बारी आए तो जिनकी पत्नियां चली गई हैं, उनको उतना दे दो, जितना उन्होंने ख़र्च किया है और (इन शत्रुओं के साथ मामला करने में भी) परमेश्वर से डरते रहो, जिसे मान चुके हो।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ إِذَا جَآءَكَ ٱلْمُؤْمِنَـٰتُ يُبَايِعْنَكَ عَلَىٰٓ أَن لَّا يُشْرِكْنَ بِٱللَّهِ شَيْـًٔا وَلَا يَسْرِقْنَ وَلَا يَزْنِينَ وَلَا يَقْتُلْنَ أَوْلَـٰدَهُنَّ وَلَا يَأْتِينَ بِبُهْتَـٰنٍ يَفْتَرِينَهُۥ بَيْنَ أَيْدِيهِنَّ وَأَرْجُلِهِنَّ وَلَا يَعْصِينَكَ فِى مَعْرُوفٍ ۙ فَبَايِعْهُنَّ وَٱسْتَغْفِرْ لَهُنَّ ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ﴿12﴾

इसी प्रकार, हे पैग़ंबर, जब मुसलमान महिलाएं बैअत् के लिए तुम्हारे पास आएँ (और प्रतिज्ञा करें) कि वे परमेश्वर के साथ किसी को भागीदार नहीं बनाएंगी और चोरी नहीं करेंगी और ज़िना नहीं करेंगी और अपनी संतान की हत्या नहीं करेंगी और अपने हाथ और पाँव के बीच कोई झूठा आरोप गढ़कर न लाएँगी और भलाई के किसी मामले में तुम्हारी अवज्ञा नहीं करेंगी तो उनसे बैअत् ले लो और उनके लिए परमेश्वर से क्षमा की प्रार्थना करो। निस्संदेह, परमेश्वर क्षमा करने वाला और कृपालु है।1

टिप्पणियाँ 1
  1. यह गुप्तांगों की ओर संकेत के लिए एक शालीन व सभ्य शैली है, इसलिए कि ये अंग हाथ और पाँव के बीच में ही होते हैं। ↩
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَتَوَلَّوْا۟ قَوْمًا غَضِبَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمْ قَدْ يَئِسُوا۟ مِنَ ٱلْـَٔاخِرَةِ كَمَا يَئِسَ ٱلْكُفَّارُ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْقُبُورِ ﴿13﴾

हे मानने वालो, इसी प्रकार उन लोगों से भी मित्रता न करो जिन पर परमेश्वर का प्रकोप हुआ है। वे भी परलोक से उसी प्रकार निराश हो चुके हैं, जिस प्रकार ये नकारने वाले उन लोगों के पुनः जी उठने से निराश हैं जो क़ब्रों में पड़े हैं।