सूरह 55
अर्-रह्मान्
मक्की · 78 आयतें · 15 अनुच्छेद
इस सूरह के जोड़े का परिचय
इस सूरह का साझा परिचय उसके जोड़े की पहली सूरह में पढ़ें।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
रह्मान ने क़ुरआन की शिक्षा दी। इसलिए कि उसने मनुष्य को पैदा किया है, उसे बोलने की क्षमता प्रदान की है।
(तुम निशानी चाहते हो तो देखो), सूरज और चाँद एक गणना के अनुसार भ्रमण में हैं, और तारे और पेड़, सब नतमस्तक हैं। और उसने आकाश को ऊँचा किया और उसमें संतुलन स्थापित कर दिया कि (अपने कार्य क्षेत्र में) तुम भी संतुलन में बाधा न डालो और न्याय के साथ सीधा तौल तौलो और वज़न में कमी न करो।
और धरती को उसने अपने प्राणियों के लिए बिछा दिया है। उसमें फल हैं और खजूर के पेड़ हैं जिनके फल परतों में लिपटे हुए हैं, और भूसी वाले अनाज और सुगंधित फूल भी — फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
मनुष्यों को उसने ठीकरी के समान बजती हुई मिट्टी से और जिन्नों को अग्नि की लपट से बनाया। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
वहीं पूरब का प्रभु है, उसके दोनों छोरों तक, और वहीं पश्चिम का प्रभु है, उसके दोनों छोरों तक। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
उसने दो समुद्र छोड़ दिए, दोनों टकराते हैं, परंतु उनके बीच एक आड़ रहती है जिससे वे आगे नहीं बढ़ते। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
दोनों से मोती और मूँगे निकलते हैं। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
ये नौकाएँ उसी की हैं जो समुद्र में पर्वतों के समान ऊँचे उठे हुए हैं। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
धरती पर जो भी हैं, सब नश्वर हैं और तुम्हारे प्रभु की प्रतिष्ठित और तेजस्वी सत्ता बाक़ी रहने वाली है। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
धरती और समस्त आकाशों में जो भी हैं, सब (अपनी आवश्यकताएँ) उसी से माँगते हैं। हर दिन वह एक नई महिमा में है। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!1
टिप्पणियाँ 1
- असल में शब्द ‘सुआल’ (سؤال) आया है। यह अपने परिणाम के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। मतलब यह है कि जिस से भी मांगें, वास्तव में पाते परमेश्वर ही से हैं। ↩
हे भारी जत्थो, हम तुमसे शीघ्र ही निमटने वाले हैं। फिर बताओ, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! हे जिन्न और मनुष्य समूह, धरती और समस्त आकाशों की सीमाओं से निकल कर भाग सकते हो तो भाग देखो। नहीं भाग सकते, इसके लिए अनुमति चाहिए। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! तुम पर आग का शोला और (पिघला हुआ) ताँबा छोड़ दिया जाएगा और तुम उससे बचाव नहीं कर सकोगे। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
फिर क्या बनेगा उस समय, जब आकाश फट जाएगा और उतरी हुई खाल के समान हो जाएगा? उस समय, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! फिर किसी मनुष्य और किसी जिन्न से उस दिन उसका पाप पूछने की आवश्यकता नहीं होगी। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! अपराधी वहां अपने निशान से पहचान लिए जाएँगे, फिर माथे के बालों और पाँव से पकड़े जाएँगे (और नरक में फेंक दिए जाएँगे)। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! यह वही नरक है जिसको यह अपराधी नकारते रहे। (अब) उसके और खौलते हुए पानी के बीच भ्रमण करते रहेंगे। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
(यह इन अपराधियों का बदला है) और जो अपने प्रभु के सामने उपस्थित होने से डरते रहे, उनके लिए दो बाग़ हैं। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! बहुत सी शाखाओं वाले। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! दोनों में दो जल धाराएँ बहती हुई। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! उनमें प्रत्येक फल के विभिन्न प्रकार। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! वे ऐसे फ़रशों पर बैठे होंगे, तकिए लगाए हुए, जिनके अस्तर दबीज़ रेशम के होंगे और दोनों बाग़ों के फल झुके पड़ रहे होंगे। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! उनमें शर्मीली आँखों वालियाँ होंगी जिन्हें उनसे पहले किसी मनुष्य या जिन्न ने हाथ नहीं लगाया होगा। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! ऐसी सुंदर जैसे हीरे और मूँगे हों। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! पुण्य का फल पुण्य के अतिरिक्त और क्या हो सकता? फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
और इनके अतिरिक्त दो बाग़ और भी हैं। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! दोनों घने और हरे-भरे। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! दोनों में दो जल स्रोत उबलते हुए। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! उनमें फल और खजूर और अनार। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! उनमें चरित्रवान, सुंदर पत्नियां। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! तंबुओं में ठहराई हुई अप्सराएँ। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! उनसे पहले जिन्हें किसी मनुष्य या जिन्न ने हाथ नहीं लगाया होगा। फिर तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे! वे हरी चादरों और सुंदर अमूल्य कालीनों पर तकिये लगाए बैठे होंगे। फिर, हे जिन्न और मनुष्य समूह, तुम अपने प्रभु की किन-किन महिमाओं को नकारोगे!
बड़े आशीष वाला है तुम्हारे प्रतिष्ठित और तेजस्वी प्रभु का नाम।