सूरह 56
अल्-वाक़िअह्
मक्की · 96 आयतें · 14 अनुच्छेद
परिचय
यह बिना जोड़े के एक अलग सूरह है जिस पर इस अध्याय की मक्की सूरतें समाप्त होती हैं। इसमें उस पूरी चर्चा का सारांश प्रस्तुत किया गया है, जो सूरह क़ाफ़ से सूरह अर्-रहमान तक प्रतिफल (जज़ा व सज़ा) से संबंधित हुई है। सूरह क़ाफ़ से सूरह अर्-रहमान तक बुद्धि और मानव प्रकृति (अक़्ल व फ़ितरत), मानव व्यक्तित्व और ब्रह्माण्ड (अंफ़ुस व आफ़ाक़), और मानव इतिहास में परमेश्वर के न्याय एवं दंड (दैनूनत) के प्रकट होने से प्रतिफल के एक दिन के घटित होने पर तर्क प्रस्तुत किया गया है। इस श्रृंखला की अंतिम सूरह अर्-रहमान है, जिसमें इस विषय के साथ सचेत करने (इंज़ार) और शुभ समाचार देने (बशारत) का पहलू भी पूरी तरह स्पष्ट हो गया है। यही विषय इस सूरह में अपने सारे विवरण के साथ पूरा हो जाता है। इस दृष्टि से यह पिछली सूरतों का अनुपूरक और समापन है।
इसमें संबोधन क़ुरैश क़बीले के घमंडी व्यक्तियों से है, जिन्हें सचेत किया गया है कि क़यामत एक अटल घटना है। यह हर हाल में घटित होगी। तुम्हें अवश्य एक ऐसी दुनिया में जीने के लिए उठना है, जहां सम्मान और अपमान के मापदंड बदल चुके होंगे। सम्मान और श्रेष्ठता वहां केवल अग्रगामी लोगों (साबिक़ीन) और दाएं हाथ वालों (अस्हाबुल-यमीन) के लिए होगी और घमंडी व अहंकारी बाएं हाथ वाले (अस्हाबुश-शिमाल) होंगे, जिनके लिए नरक की अनंत यातना है।
इसके विषय से यह स्पष्ट होता है कि ये मक्का में पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के प्रचार के उस चरण में अवतरित हुई हैं जब वे सार्वजनिक रूप से जनसमान्य को सचेत (इंज़ार-ए-आम) कर रहे थे ।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
ये उस दिन को याद रखें, जब घटित होने वाली घटित हो जाएगी। उसके घटित हो जाने में कोई झूठ नहीं है। वह गिराने वाली और उठाने वाली होगी। उस दिन जब धरती ज़ोर से हिला डाली जाएगी और पर्वत पूर्णतः चूर-चूर कर दिए जाएँगे, इस प्रकार कि बिखरी हुई धूल बन कर रह जाएँगे और तुम उस दिन तीन वर्गों में विभाजित हो जाओगे।
फिर एक वर्ग दाएँ वालों का होगा, तो क्या कहने हैं दाएँ वालों के! दूसरा बाएँ वालों का, तो क्या दुर्भाग्य है बाएँ वालों का! और आगे वाले तो फिर आगे वाले ही हैं। वही निकटस्थ होंगे। चैन के बाग़ों में रहेंगे। पहले लोगों में बहुत और बाद वालों में कम। रत्नों से सुसज्जित सिंहासनों पर तकिये लगाए आमने सामने बैठे होंगे। उनकी सेवा में बालक जो सदा बालक ही रहेंगे, प्याले, सुराहियाँ और विशुद्ध शराब के पात्र लिए हुए दौड़ते फिरते होंगे जिससे न उनका सर चकराएगा, न बुद्धि में कोई ख़राबी आएगी। और उनके सामने फल प्रस्तुत किए जाएँगे जिन्हें वे पसंद करें और परिंदों का मांस जिनकी वे इच्छा करें। और उनके लिए मृगनयनी सुंदरियाँ होंगी, छिपा कर रखे हुए मोतियों के समान, उनके कर्मों का फल, जो वे करते रहे। वहां वे कोई बेहूदा बात और किसी पापकर्म का आरोप नहीं सुनेंगे। केवल शुभ आशीष और शांति के चर्चे होंगे।
और दाएँ वाले, तो क्या कहने हैं दाएँ वालों के! बिना कांटे की बेरियों, तहदार केलों और फैले हुए सायों में, बहते हुए पानी और कभी खत्म न होने वाले प्रचुर फलों में, जिनके पेड़ कभी फलों से वंचित नहीं होंगे, और ऊँचे बिस्तरों में, (जहां उनकी पत्नियां होंगी)। हमने उन्हें एक विशेष उठान पर उठाया होगा और उन्हें कंवारी, मनोहर और समान आयु वालियाँ बना दिया होगा। यह सब दाएँ वालों के लिए हैं। वे पहले लोगों में भी एक विशाल समूह होंगे और बाद वालों में भी एक विशाल समूह।
और बाएँ वाले, तो कैसा दुर्भाग्य है बाएँ वालों का! वे लू की लपट और खौलते पानी और धुएं की छाया में होंगे जिसमें न ठंडक होगी, न वह कोई लाभ पहुंचाएगा — ये इससे पहले समृद्ध लोगों में थे और सबसे बड़े पापकर्म पर अड़े रहते थे। ये कहते थे कि क्या जब हम मरकर मिट्टी हो जाएँगे और हड्डियां रह जाएँगे तो क्या पुनः उठाए जाएँगे? और क्या हमारे पूर्वज भी जो पहले चल बसे हैं?
इनसे कह दो, निस्संदेह पहले और बाद वाले, सब इकट्ठे किए जा रहे हैं, एक निश्चित दिन के निश्चित समय तक। फिर, हे भटके हुए लोगो और नकारने वालो, तुम ज़क़्क़ूम के पेड़ में से अवश्य खाओगे और उसी से पेट भरोगे। फिर उस पर खौलता हुआ पानी पियोगे तो प्यास का रोग लगे हुए ऊँटों के जैसे पियोगे — क़यामत के दिन यह इन (दुर्भाग्यशालियों) का पहला भोजन होगा।
हमने तुम्हें पैदा किया है तो क़यामत को क्यों नहीं मानते? फिर कभी सोचा है, यह वीर्य जो तुम टपकाते हो, उससे जो कुछ बनता है, उसे तुम बनाते हो या हम बनाने वाले हैं? हमने तुम्हारे बीच मृत्यु निश्चित की है और हम असमर्थ नहीं हैं, अपितु पूरा सामर्थ रखते हैं कि तुम्हारे स्थान पर तुम्हारे जैसे बना दें और तुम्हें उस दुनिया में उठा खड़ा करें जिसे तुम नहीं जानते। अपनी पहली उत्पत्ति को तो तुम जानते हो, फिर क्यों उपदेश प्राप्त नहीं करते?
फिर तुमने कभी सोचा है, यह जो कुछ तुम बोते हो, इसे तुम उगाते हो या हम उगाने वाले हैं? हम चाहें तो इसे कण-कण कर दें और तुम बातें बनाते रह जाओ कि हम पर तो उल्टी चट्टी पड़ गई, नहीं, अपितु हम तो पूरे ही वंचित रह गए।
फिर तुमने कभी सोचा है, यह पानी जो तुम पीते हो, इसे तुमने बादलों से उतारा है या हम उतारने वाले हैं? हम चाहें तो इसे अत्यंत खारा बना दें। फिर तुम आभार व्यक्त क्यों नहीं करते?
फिर तुमने कभी सोचा है, यह आग जो तुम जलाते हो, इसका पेड़ तुमने पैदा किया है या इसे हम पैदा करने वाले हैं? हमने इसे उपदेश का माध्यम और रेगिस्तान के यात्रियों के लिए प्रिय वस्तु बना दिया है।
इसलिए (इन्हें छोड़ो, हे पैग़ंबर और) तुम अपने महान प्रभु का गुणगान करो उसके नाम की सहायता से।
(ये क़ुरआन को नकारते हैं)। अतः नहीं, (यह किसी शैतान की प्रेरणा नहीं है), मैं उन ठिकानों की गवाही प्रस्तुत करता हूँ जहाँ तारे गिरते हैं, और यदि तुम समझो तो निस्संदेह यह बहुत बड़ी गवाही है। इसमें संदेह नहीं कि यह एक बड़ी प्रतिष्ठा वाला क़ुरआन है, एक सुरक्षित ग्रंथ मैं। उसको केवल पवित्र (फ़रिश्ते) ही हाथ लगा सकते हैं। यह समस्त लोकों के प्रभु का उतारा हुआ है। तो क्या इस वाणी से बेपरवाह होते हो? और जो तुम्हारे लिए (परमेश्वर की) जीविका है, उसे झूठा कह रहे हो?
फिर तुम किसी के अधीन नहीं हो तो उस समय जब मरने वाले की जान गले में पहुँच जाती है और तुम उस समय देख रहे होते हो, परंतु नहीं देखते कि उस समय तुम्हारी तुलना में हम उससे अधिक निकट होते हैं, फिर तुम पराधीन नहीं हो तो उस (की निकलती हुई) जान को लौटा क्यों नहीं लेते, यदि तुम सच्चे हो?
अतः (जान लो कि) यदि वह मरने वाला निकटस्थों में से है तो उसके लिए सुख और आनंद और सुगमता का बाग़ है। और यदि दाएँ वालों में से है तो फ़रिश्ते कहते हैं: तेरे लिए शांति है, हे वह जो दाएँ वालों में से है। और यदि नकारने वाले पथभ्रष्टों में से है तो उसके लिए खौलते हुए पानी का आतिथ्य है और नरक में झोंकना है।
निस्संदेह यही निश्चित सत्य है। अतः, (हे पैग़ंबर, इन्हें छोड़ो और) अपने महान प्रभु का गुणगान करो उसके नाम की सहायता से।