सूरह 50
क़ाफ़्
मक्की · 45 आयतें · 13 अनुच्छेद
परिचय
ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। दोनों का विषय क़यामत को प्रमाणित करना और इसके संदर्भ से सचेत करना (इंज़ार) और शुभ समाचार देना (बशारत) है। अपितु, दूसरी सूरह में क़यामत को प्रमाणित करने के ऐतिहासिक प्रमाण पहली सूरह की तुलना में अधिक विस्तार से प्रस्तुत किए गए हैं। साथ ही, क़ुरआन के द्वारा दी गई दंड (अज़ाब) की चेतावनी को भी प्रमाणित किया गया है। दोनों सूरतों में संबोधन मक्का के क़ुरैश क़बीले से है और इनकी विषय-वस्तु से यह स्पष्ट होता है कि ये मक्का में पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के प्रचार के उस चरण में अवतरित हुई हैं जब वे सार्वजनिक रूप से जनसमान्य को सचेत (इंज़ार-ए-आम) कर रहे थे ।
दोनों सूरतों का समापन पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के लिए तसल्ली के विषय पर हुआ है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह क़ाफ़ है। पवित्र क़ुरआन (स्वयं अपनी) गवाही है। नहीं, इनके नकारने का कारण वह नहीं है जो ये व्यक्त कर रहे हैं, अपितु इन्हें आश्चर्य इस बात पर हुआ है कि (क़यामत के दिन के लिए) एक सचेत करने वाला स्वयं इन्ही के अन्दर से इनके पास आ गया है। अतः इन नकारने वालों ने कहा कि यह अजीब बात है। क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी हो जाएँगे तो पुनः उठाए जाएँगे? यह वापसी तो असंभव प्रतीत होती है।
(हमारे ज्ञान को भी ये अपने अनुसार देखते हैं, यद्यपि) इन के अन्दर से धरती जो कुछ खाती है, वह सब हमने जान रखा है और हमारे पास वह खाता भी है जो हर चीज़ को सुरक्षित रखता है। नहीं, (वह बात नहीं जो ये कह रहे हैं), अपितु इन्होंने सत्य को झूठा बताया है, जबकि वह इन के पास आ गया है। इसलिए अब ये उलझन में पड़े हुए हैं।
(ये नहीं मानते) तो क्या इन्होंने अपने ऊपर आकाश को नहीं देखा? हमने किस प्रकार उसको बनाया और उसको संवारा है और उसमें कहीं कोई दरार नहीं है। और धरती को हमने बिछाया और उसमें पर्वत जमाए और सब प्रकार की सुन्दर चीज़ें उगा दीं, हर उस बन्दे के देखने और स्मरण के लिए जो ध्यान करने वाला हो। और आकाश से हमने आशीषमय पानी बरसाया, फिर उस से बाग़ और फसलें उगाईं जो काट ली जाती हैं और खजूरों के ऊंचे-ऊँचे पेड़ उगा दिए जिन में अनेक परतों में गुच्छे लगते हैं, भक्तों की जीविका के लिए। और मुर्दा धरती को हमने इसी पानी से जीवित कर दिया। (मरने वालों का धरती से) निकलना भी इसी प्रकार होगा।
इनसे पहले ‘नूह’ की क़ौम और ‘अर्-रस’ के लोगों ने, और ‘समूद’, और ‘आद’ और फ़िरऔन और लूत के भाइयों और ‘ऐका’ वालों ने और ‘तुब्बअ’ की क़ौम ने भी इसी प्रकार नकार दिया था। हर एक ने मेरे रसूलों को नकारा, तो (देख लो कि) मेरी चेतावनी उनपर घटित हो कर रही। (इनसे पूछो), फिर क्या हम पहली बार बनाने में असमर्थ रहे? नहीं, (इनमें से कोई यह कहने का दुस्साहस नहीं कर सकता), अपितु पुनः पैदा किए जाने के बारे में ये लोग संदेह में पड़े हुए हैं।
हमने मनुष्य की रचना की है और उसके मन में जो विचार आते हैं, उन्हें भी हम जानते हैं और हम तो उसके गले की नस से भी अधिक उसके क़रीब हैं।
इन्हें याद रखना चाहिए, जब दो ग्रहण करने वाले दाएँ और बाएँ बैठे हुए ग्रहण कर रहे होते हैं, मनुष्य की ज़बान से कोई शब्द नहीं निकलता, किंतु एक चौकस निरीक्षक उनके पास उपस्थित होता है।
(अफ़सोस, तुम लोग इनकार ही करते रहे) और मृत्यु की व्यथा उस वास्तविकता के साथ आ पहुँची (जिस पर दुनिया के जीवन में पर्दा पड़ा हुआ था)। यह वही चीज़ है जिससे तुम भागते रहे। और (वह देखो) नरसिंघा फूंका गया। यह वही दिन है जिसकी चेतावनी हमने तुम्हें सुनाई थी। हर एक व्यक्ति उपस्थित हो गया है, इस प्रकार कि उसके साथ एक हांक कर ले जाने वाला है और एक गवाही देने वाला। तुम इस चीज़ से बेपरवाह रहे तो अब वह पर्दा हमने तुमसे हटा दिया जो तुम्हारे आगे पड़ा हुआ था। तो आज तुम्हारी दृष्टि बहुत तेज़ है। हमारी अदालत लग गई और उस अपराधी के साथी (हांकने वाले फ़रिश्ते) ने कहा: यह जो मेरी हिरासत में था, उपस्थित है। आदेश दिया गया: तुम दोनों नरक में झोंक दो हर अकृतज्ञ, विद्वेषी, भलाई से रोकने वाले, हद से बढ़ने वाले, संदेह में पड़े हुए को, जिसने परमेश्वर के साथ किसी दूसरे को उपास्य ठहराया है। तो डाल दो उसे कठोर यातना में।
उसके साथी (शैतान) ने कहा: प्रभु, इसे मैंने दुराग्रही नहीं बनाया, बल्कि यह स्वयं ही उचित मार्ग से बहुत दूर पड़ा हुआ था। कहा, अब मेरे सामने झगड़ा नहीं करो, मैंने पहले ही तुम्हें अपने दण्ड की धमकी से सचेत कर दिया था। मेरे पास बात कभी बदली नहीं जाती और मैं अपने बन्दों के साथ थोड़ा सा भी अन्याय करने वाला नहीं हूं।
उस दिन को याद रखो, जब हम नरक से पूछेंगे: “क्या तू भर गया है?” और वह उत्तर देगा: “क्या कुछ और भी है?” और स्वर्ग को उन लोगों के पास लाया जाएगा, जो परमेश्वर से डरने वाले हैं और वह कुछ भी दूर नहीं होगा। यही वह चीज़ है जिसका तुम्हें वचन दिया जाता था, हर उस व्यक्ति के लिए जो अत्यधिक पश्चाताप करने वाला और उसकी नियमित सीमाओं की सुरक्षा करने वाला था, जो बिन देखे परम दयालु से डरता था और एक ऐसा दिल लेकर उपस्थित हुआ है जो (परमेश्वर के प्रति) समर्पित रहता था। जाओ, हमारे स्वर्ग में शांति के साथ प्रवेश हो जाओ। यह सदा रहने का दिन है। और उन्हें वहाँ जो चाहेंगे, मिलेगा और हमारे पास इससे अधिक भी है।
(ये सावधान हो जाएं), इनसे पहले कितनी ही क़ौमें हमने नष्ट की हैं जो इनसे भी कहीं अधिक शक्तिशाली थीं। फिर (हमारा दण्ड आया तो) जिधर सींग समाया, उनके लोग शहरों में उधर ही चल खड़े हुए कि है कोई शरण की जगह? इसमें उन लोगों के लिए निस्संदेह बड़ा उपदेश है जो (सीनों में) दिल रखते हों या कान लगाकर ध्यान से सुनें।
(इन्हें आश्चर्य है कि मृत्यु के बाद ये कैसे उठाए जाएँगे)? सच्चाई यह है कि धरती और समस्त आकाशों और उनके बीच की चीज़ों को हमने छः दिन में पैदा कर दिया और हमें कोई थकान नहीं हुई थी। तो जो कुछ ये कहते हैं, उसपर धैर्य रखो, (हे पैग़ंबर), और अपने प्रभु की स्तुति के साथ उसका गुणगान करते रहो, सूरज के निकलने और उसके डूबने से पहले और रात में भी उसका गुणगान करो और सूरज के माथा टेकने के बाद भी।
और सुनो, जिस दिन पुकारने वाला अत्यंत पास के स्थान ही से पुकारेगा, जिस दिन यह (नरसिंघा की) भयंकर आवाज़ उस (दिन की पुकार) के साथ सुनेंगे जिसका आना निश्चित है। वह (धरती से मुर्दों के) निकलने का दिन होगा। यह सत्य है कि हम ही जीवन देते और हम ही मृत्यु देते हैं और (एक दिन सबको) पलटना भी हमारी ही ओर है, उस दिन, जब धरती इनके ऊपर से खुल जाएगी, ये तेज़ी से निकल कर भाग रहे होंगे। (इनका) यह इकट्ठा करना हमारे लिए अत्यंत सरल है।
(तुम इनकी चिंता न करो, हे पैग़ंबर), हम जानते हैं जो कुछ ये कह रहे हैं और (याद रखो कि) तुम इनपर कोई दरोगा नियुक्त नहीं किए गए हो। इसलिए कुरआन के माध्यम से उन्हें उपदेश करो जो मेरी चेतावनी से डरते हों।