सूरह 36
या-सीन्
मक्की · 83 आयतें · 20 अनुच्छेद
परिचय
यह बिना जोड़े के एक अलग सूरह है जिससे इस अध्याय में इत्माम-ए-हुज्जत का आरंभ हो रहा है। इसके और पिछली दोनों सूरतों की विषय-वस्तु में इसके सिवा कोई विशेष अंतर नहीं है कि इसमें बात की शैली में चेतावनी और फटकार, निंदा और डांट-डपट की तीव्रता अधिक स्पष्ट हो गई है। इस दृष्टि से, यह अगली दोनों सूरतों के लिए जैसे उस विषय की प्रस्तावना है जो उनमें समापन को पहुंचता है।1
टिप्पणियाँ 1
- इत्माम-ए-हुज्जत: सत्य का इस प्रकार निर्णायक रूप से स्पष्ट हो जाना कि नकारने का कोई बहाना बाक़ी न रहे। ↩
इसमें संबोधन क़ुरैश क़बीले के घमंडी नेताओं से किया गया है और इसकी विषय-वस्तु से यह स्पष्ट होता है कि यह मक्का में पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के धर्मप्रचार के इत्माम-ए-हुज्जत के चरण में अवतरित हुई है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह 'या सीन' है। यह प्रज्ञता से भरपूर क़ुरआन साक्षी है कि तुम निस्संदेह रसूलों में से हो, एक अत्यंत सीधे मार्ग पर। यह पूरे प्रबंध के साथ उस परम सत्ता की ओर से उतारा गया है जो प्रबल है, जिसकी कृपा शाश्वत है। इसलिए उतारा गया है कि तुम उन लोगों को सचेत करो जिनके पूर्वजों को सचेत नहीं किया गया था, इसलिए बेपरवाही में पड़े हुए हैं। उनमें से बहुतों पर हमारी बात पूरी हो चुकी है, तो वे नहीं मानेंगे। (वे ऐसे अहंकारी हैं कि) उनकी गर्दनों में हमने मानो पट्टे डाल दिए हैं और वह ठुड्डियों तक पहुंचे हुए हैं, अतः उनके सर उठे रह गए हैं। हमने उनके आगे भी एक दीवार खड़ी कर दी है और उनके पीछे भी एक दीवार खड़ी कर दी है। इस प्रकार हमने उनको ढक दिया है तो उन्हें अब कुछ सुझाई नहीं दे रहा है। उनके लिए समान है, तुम उन्हें सचेत करो या न करो, वे नहीं मानेंगे। तुम तो, (हे पैग़ंबर), केवल उन्हीं को सचेत कर सकते हो जो उपदेश पर चलें और परम दयालु परमेश्वर से बिन देखे डरें। अतः इस प्रकार के लोगों को क्षमा की और (परमेश्वर की ओर से) सम्मानित प्रतिफल की शुभ सूचना दो। निस्संदेह, हम ही (एक दिन) मृतकों को जीवित करेंगे और (उनके हिसाब में भी हमें कोई कठिनाई नहीं होगी, इसलिए कि) उन्होंने जो कुछ आगे भेजा और जो कुछ उन्होंने पीछे छोड़ा है, वह सब हम लिखते जा रहे हैं और हमने प्रत्येक चीज़ एक स्पष्ट खाते में लिख दी है।
इन्हें बस्ती वालों का उदाहरण सुनाओ, जबकि उनके पास रसूल आए थे। (इस प्रकार कि) जब हमने दो रसूल उनके पास भेजे तो उन्होंने दोनों को झूठा कह दिया। फिर हमने एक तीसरे व्यक्ति से उनका समर्थन किया तो उन्होंने लोगों से कहा: कोई संदेह नहीं कि हम तुम्हारे पास भेजे हुए आए हैं। लोगों ने उत्तर दिया कि तुम तो हमारे ही जैसे मनुष्य हो और परम दयालु परमेश्वर ने कोई चीज़ नहीं उतारी है, तुम केवल झूठ बोल रहे हो।
रसूलों ने कहा: हमारा प्रभु साक्षी है कि निस्संदेह हम तुम्हारे पास भेजे हुए आए हैं और हमारे ऊपर इसके अतिरिक्त कोई दायित्व नहीं है कि स्पष्ट रूप से पहुंचा दें। लोगों ने कहा: हम तो तुम्हें अशुभ समझते हैं। यदि तुम लोग इस कार्य से न रुके तो हम पत्थर मार मार कर तुम्हारी हत्या करेंगे और हमारी ओर से तुम अवश्य बड़ा कठोर दण्ड पाओगे। रसूलों ने उत्तर दिया: तुम्हारा दुर्भाग्य तुम्हारे साथ है। क्या इतनी बात पर कि तुम्हें स्मरण दिलाया गया है? नहीं, अपितु तुम मर्यादा का उल्लंघन करने वाले लोग हो।
(यही अवसर था, जब परमेश्वर ने तीसरे से समर्थन कराया। इस प्रकार कि) नगर के दूरवर्ती छोर से एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आया (और आकर) कहने लगा कि मेरी क़ौम के लोगो, रसूलों का अनुसरण करो। उन लोगों का अनुसरण करो जो तुमसे कोई दक्षिणा नहीं मांगते और सन्मार्ग पर भी हैं। (तुम मुझे भी सन्मार्ग से फेरना चाहते हो? परंतु मैं तुमसे पूछता हूं कि) मैं उस परम सत्ता की भक्ति क्यों न करूं जिसने मुझे पैदा किया है और उसी की ओर तुम सब लौटाए जाओगे? क्या मैं उसके अतिरिक्त दूसरों को उपास्य बना लूँ? यदि परम दयालु परमेश्वर मुझे कोई कष्ट पहुंचाना चाहे तो उनकी अनुशंसा मेरे कुछ भी काम न आएगी और न वे मुझे छुड़ा सकेंगे। ऐसा करूं तो कोई संदेह नहीं कि फिर तो मैं स्पष्ट पथभ्रष्टता में जा पड़ूँगा। मैं तुम्हारे प्रभु को मान चुका हूं तो तुम भी मेरी बात सुनो — कहा गया: स्वर्ग में प्रवेश हो जाओ। उसने (यह शुभ सूचना सुनी तो) कहा: यह जो मेरे प्रभु ने मुझे क्षमा कर दिया और मुझे सम्मानित लोगों में मिलाया है, काश, मेरी क़ौम इसे जान लेती!
उसकी क़ौम पर उसके बाद हमने आकाश से कोई सेना नहीं उतारी और (इस प्रकार के कार्यों के लिए) हम उतारा भी नहीं करते। वह एक डांट ही थी और अचानक वे बुझ कर रह गए — अफ़सोस लोगों पर, उनके पास जो रसूल भी आया, वे उसका मज़ाक़ ही उड़ाते रहे हैं। (तुम्हारे संबोध्य भी, हे पैग़ंबर, इस समय यही कर रहे हैं)। क्या इन्होंने देखा नहीं कि इनसे पहले कितनी क़ौमों को हमने नष्ट कर दिया कि इनके लोग, अब इनकी ओर कभी लौट कर नहीं आएंगे और कोई संदेह नहीं कि (एक दिन) ये सब हमारे ही समक्ष इकट्ठे उपस्थित किए जाएँगे।
(ये निशानियाँ मांगते हैं)। सत्य यह है कि इनके लिए मुर्दा धरती एक बहुत बड़ी निशानी है। हमने (आकाश से पानी बरसा कर) उसको जीवित किया और उससे अनाज उगाया कि ये उसमें से खाते हैं। और हमने खजूरों और अंगूरों के बाग़ उसमें लगाए और उसमें झरने निकाल कर बहाए कि ये उसके फल खाएं — ये इनके हाथों ने नहीं बनाए हैं। फिर क्या कृतज्ञता नहीं करते!
दोषरहित है वह परम सत्ता जिसने सब जोड़े बनाए, उन चीज़ों के भी जिन्हें धरती उगाती है और स्वयं इन लोगों के अंदर से भी और उन चीज़ों के भी जिन्हें ये जानते नहीं हैं।
और इनके लिए रात भी बहुत बड़ी निशानी है। हम उससे दिन को खींच कर निकाल लेते हैं तो देखते-देखते वे अंधेरे में रह जाते हैं। सूरज (इसी उद्देश्य से) अपने एक निर्धारित मार्ग पर चलता है। यह प्रभावी और परम ज्ञानी परमेश्वर की बांधी हुई गणना है। और चाँद के लिए (इसी को सामने रखते हुए) हमने पड़ाव निर्धारित कर दिए हैं, यहाँ तक कि (इनसे निकलता हुआ) वह एक बार फिर खजूर की पुरानी टहनी के समान हो कर रह जाता है। न सूरज का साहस है कि वह चाँद को जा पकड़े और न रात दिन से आगे बढ़ सकती है। सब एक-एक मार्ग में भ्रमण कर रहे हैं।
और इनके लिए एक बहुत बड़ी निशानी यह भी है कि इनके वंश को हमने इनसे भरी हुई नौकाओं में उठा रखा है और नौका के समान इनके लिए (भूमि में यात्रा की) चीज़ें भी हमने पैदा कर दी हैं जिन पर ये सवार होते हैं। और यदि हम चाहें तो इनको डुबो दें, फिर न कोई इनकी गुहार सुनने वाला हो और न ये बचाए जा सकें। परंतु यह हमारी दया है और इनको एक निर्धारित समय तक लाभान्वित करना (उद्देश्य) है।1
टिप्पणियाँ 1
- अर्थात् इनके आगे आने वाली मनुष्य-जाति को; इससे आदम की संतान (बनी आदम) अभिप्रेत हैं। ↩
इन्हें जब सचेत किया जाता है कि तुम्हारे आगे और तुम्हारे पीछे जो (धरती और आकाश तुम्हें घेरे हुए) हैं, उनसे डरो, इसलिए कि तुम पर दया की जाए तो सुनी अनसुनी कर देते हैं। और इनके प्रभु की निशानियों में से जो निशानी भी इनके पास आती है, उससे मुँह ही फेरते हैं। और जब इनसे कहा जाता है कि जो जीविका परमेश्वर ने तुम्हें दी है, उसमें से (उसके मार्ग में) ख़र्च करो तो ये लोग जिन्होंने (पैग़ंबर को) नकार दिया है, मानने वालों से कहते हैं कि क्या हम उन लोगों को खिलाएँ जिन्हें यदि परमेश्वर चाहता तो स्वयं खिला देता? तुम लोग तो स्पष्ट पथभ्रष्टता में पड़े हो।
पूछते हैं कि अच्छा, (हम पर दण्ड की) यह धमकी कब पूरी होगी, यदि तुम लोग सच्चे हो? ये लोग एक डांट ही की प्रतीक्षा में है जो इन्हें आ पकड़ेगी और ये झगड़ते रह जाएँगे। फिर न कोई वसीयत कर पाएंगे और न अपने लोगों की ओर लौट सकेंगे।
और (इसी प्रकार एक दिन) नरसिंघा फूंका जाएगा तो अचानक क़ब्रों से निकल-निकल कर ये अपने प्रभु की ओर चल पड़ेंगे। (उस समय) कहेंगे: हाय हमारा दुर्भाग्य! यह हमको हमारी क़ब्र से किस ने उठा दिया है? यह वही चीज़ है जिसका परम दयालु परमेश्वर ने (तुमसे) वादा किया था और (देख लो कि) पैग़ंबरों ने पूरी सत्य बात कही थी। वह भी एक डांट ही होगी और अचानक ये सब के सब हमारे सामने उपस्थित कर दिए जाएँगे।
अतः आज के दिन किसी व्यक्ति के साथ कोई अन्याय नहीं होगा और तुमको वही बदले में मिलेगा जो करते रहे हो। निस्संदेह, स्वर्ग के लोग आज अपनी रुचि की चीज़ों में मगन होंगे। वे और उनकी पत्नियां छांवों में सिंहासनों पर तकिए लगाए बैठे होंगे। उनके लिए वहां फल होंगे और जो मांगेंगे, उनके लिए उपस्थित होगा। उन्हें सलाम कहलाया जाएगा, उस प्रभु की ओर से जिसकी कृपा शाश्वत है।
और तुम, हे अपराधियो, आज (मेरे इन भक्तों से) छंटकर अलग हो जाओ। (अब तुम्हारी दुनिया अलग और इनकी दुनिया अलग है)। आदम के बेटो, क्या मैंने तुम्हें पतिबद्ध नहीं कर दिया था कि शैतान की भक्ति न करना, इसलिए कि वह तुम्हारा खुला शत्रु है और यह भी कि मेरी ही भक्ति करना? यही सीधा मार्ग है। इसके होते हुए उसने तुम में से एक बड़े समूह को भटका दिया है। फिर क्या तुम समझते नहीं थे? यह वही नरक है जिससे तुमको डराया जाता था। अब इसमें प्रवेश हो जाओ, अपने कुफ़्र के परिणामस्वरूप।
आज हम इनके मुँहों पर मुहर लगा देंगे और इनके हाथ हमें बताएंगे और इनके पाँव गवाही देंगे जो कुछ ये करते रहे हैं।
यदि हम चाहते तो इनकी आँखें मिटा देते, फिर ये रास्ते की ओर बढ़ते तो कहां से देखते? और यदि हम चाहते तो इनके स्थान ही पर इनको विकृत कर देते, फिर न आगे बढ़ सकते और न पीछे लौट सकते। (क्या देखते नहीं कि) जिसको हम लंबी आयु देते हैं, उसकी बनावट में एक के बाद दूसरे पड़ाव में उसको पीछे लौटा देते हैं। फिर क्या समझते नहीं हैं?
(तुम इसे काव्य कहते हो)? हमने अपने पैग़ंबर को काव्य विधि नहीं सिखाई और यह उसके पद की गरिमा को शोभा भी नहीं देता। यह तो केवल एक स्मरण और एक स्पष्ट क़ुरआन है ताकि (इसके माध्यम से) वह उन्हें सचेत कर दे जो जीवित हों और नकारने वालों तक परमेश्वर का प्रमाण निर्णायक रूप से संचारित हो जाए।
क्या इन्होंने विचार नहीं किया कि हमने अपने हाथ की बनाई हुई चीज़ों में से इनके लिए चौपाये पैदा किए हैं और अब ये उनके मालिक हैं? और हमने उनको इस प्रकार इनके अधीन बना दिया है कि उनमें से कुछ इनकी सवारियां हैं और उनमें से कुछ का मांस खाते हैं, और इनके लिए उनके अंदर अन्य लाभ भी हैं और (विशेष रूप से) पीने की चीज़ें भी। फिर क्या ये आभार व्यक्त नहीं करते?
इन्होंने इस अभिलाषा पर परमेश्वर को छोड़ अन्य उपास्य बनाए कि इनकी सहायता की जाएगी। वे इनकी सहायता नहीं कर सकेंगे, अपितु ये उनकी सेना के रूप में उपस्थित किए जाएँगे। अतः इनकी बात तुम्हें दुखी न करे, (हे पैग़ंबर)। हम जानते हैं जो कुछ ये छिपाते और जो कुछ व्यक्त करते हैं।
(इन्हें आश्चर्य है कि मरने के बाद ये किस प्रकार उठाए जाएँगे)? क्या मनुष्य नहीं जानता कि हमने उसको पानी की एक बूंद से पैदा किया, फिर वह स्पष्ट प्रतिद्वंद्वी बन कर उठ खड़ा हुआ? उसने हम पर कटाक्ष किया और अपने जन्म को भूल गया। कहता है कि हड्डियों को कौन जीवित कर सकता है, जबकि वे सड़ी गली हो जाएंगी? कह दो, उनको वही जीवित करेगा जिसने उन्हें पहली बार पैदा किया था और अपनी प्रत्येक रचना को वह भलीभांति जानता है। वही जिसने तुम्हारे लिए हरे भरे पेड़ से आग पैदा कर दी, फिर अब उसी से सुलगाते हो। क्या जिसने धरती और समस्त आकाशों का सृजन किया, वह इसकी क्षमता नहीं रखता कि इन लोगों जैसी रचना बना दे? क्यों नहीं, वही सर्वोच्च रचयिता है, हर चीज़ का जानने वाला है। उसका तो यह मामला है कि जब किसी चीज़ का संकल्प कर लेता है तो कहता है कि हो जा तो वह हो जाती है। अतः दोषरहित है वह जिसके हाथ में हर चीज़ का पूरा अधिकार है और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।