सूरह 77
अल्-मुर्सलात्
मक्की · 50 आयतें · 12 अनुच्छेद
परिचय
ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। पहली सूरह ब्रह्मांड (आफ़ाक़) के चिन्हों और प्रमाणों, इतिहास के तथ्यों और मनुष्य की बनावट में परमेश्वर के सामर्थ्य और प्रज्ञा की निशानियों से क़यामत को प्रमाणित करती है, जबकि दूसरी सूरह में यही दावा विशेष रूप से ब्रह्मांड में परमेश्वर के पालन-पोषण के गुण (रुबूबिय्यत) के चिन्हों और साक्ष्यों से प्रमाणित किया गया है। दोनों में तर्क व प्रमाण के साथ-साथ डाँट-फटकार और चेतावनी व निंदा, हर आयत से प्रकट है।
संबोधन की दिशा मूल रूप से क़ुरैश के नेताओं की ओर है और इनकी विषय-वस्तु से स्पष्ट है कि पिछली सूरतों की भाँति ये भी मक्का में पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के धर्मप्रचार के सार्वजनिक चेतावनी (इंज़ार-ए-आम) के चरण में अवतरित हुई हैं।
इन दोनों सूरतों का विषय क़यामत को प्रमाणित करना और इसके संदर्भ से क़ुरैश को सचेत करना है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
ये हवाएँ जिनकी लगाम छोड़ दी जाती है, फिर वह अंधाधुंध धूल उड़ाती हैं, और ये हवाएँ जो बादलों को उठाकर फैलाती हैं, फिर बांटकर अलग-अलग मामला करती हैं, फिर दिलों में उपदेश डालती हैं, किसी पर इत्माम-ए-हुज्जत और किसी को सचेत करने के लिए, ये साक्षी हैं कि जिस दण्ड का वचन तुम्हें दिया जा रहा है, वह आकर रहेगा।
इसलिए जब तारे मिटा दिए जाएँगे और आकाश फट जाएगा और पर्वत कण-कण कर दिए जाएँगे और रसूलों के लिए (उनके प्रभु के समक्ष) उपस्थित होने का समय निर्धारित होगा — जानते हो कि उनकी इस उपस्थिति में किस दिन के लिए देर हुई? इसी निर्णय के दिन के लिए। और तुम क्या समझे कि यह निर्णय का दिन क्या है? बरबादी है उस दिन नकारने वालों के लिए।
(ये नकारते हैं तो बताएं), क्या हमने पहले लोगों को नष्ट नहीं किया? इनके बाद वालों को क्या हम इन्हीं के पीछे नहीं लगाते रहे? हम अपराधियों के साथ यही करते हैं। बर्बादी है उस दिन नकारने वालों के लिए।
(तुम समझते हो कि मृत्यु के बाद हम तुम्हें उठा न सकेंगे)? क्या हमने एक नगण्य पानी से तुम्हारी रचना नहीं की? फिर उसको एक निश्चित समय तक हमने एक सुरक्षित स्थान में रखा। तो हमने इसी प्रकार तय किया तो हम कैसा अच्छा तय करने वाले हैं! (फिर किस प्रकार नकारते हो)? बर्बादी है उस दिन नकारने वालों के लिए।
क्या हमने धरती को जीवितों तथा मृतकों के लिए इकट्ठा करने वाली नहीं बनाया? और उसमें ऊँचे पर्वत नहीं जमाए और (उनके अंदर से झरने निकाल कर) तुमको मीठा पानी नहीं पिलाया? (फिर किस प्रकार नकारते हो)? बर्बादी है उस दिन नकारने वालों के लिए।
अब चलो उस चीज़ की ओर जिसको तुम नकारते रहे। चलो उससे साये की ओर जिसकी तीन शाखाएं हैं, (तुमको सब ओर से घेरने के लिए)। इसमें न छांव है, न यह आग की लपटों से बचाता है। वह महलों जैसे अंगारे फेंकती है — पीले ऊँटों के जैसे — (ये सब तुम देखोगे)। बर्बादी है उस दिन नकारने वालों के लिए।1
टिप्पणियाँ 1
- अर्थात धुएँ के साये की ओर। यह परलोक में उनके अंत का चित्रण है। ↩
यह वह दिन है जिसमें वह कुछ बोल नहीं सकेंगे और ना उन्हें अनुमति होगी कि (परमेश्वर के सामने आएं तो) कोई बहाना प्रस्तुत कर रहे हो। बर्बादी है उस दिन नकारने वालों के लिए।
यह निर्णय का दिन है। हमने तुमको और तुम से पहले बीते हुए सब लोगों को इकट्ठा कर दिया है। अब यदि कोई चाल तो चल सकते हो तो मेरे विरुद्ध चल कर देखो। बर्बादी है उस दिन नकारने वालों के लिए।
परमेश्वर से डरने वाले आज छाँव और झरनों और अपने मनचाहे फलों में घिरे हुए हैं — खाओ और पियो आनंद पूर्वक अपने उस कर्म के फल स्वरुप जो तुम करते रहे। बर्बादी है उस दिन नकारने वालों के लिए।
तुम भी कुछ दिन खा लो तथा आनंद ले लो। सत्य यह है कि तुम लोग अपराधी हो। बर्बादी है उस दिन नकारने वालों के लिए।
(ये प्रत्येक वरदान दुनिया में पाते हैं) और जब इनसे कहा जाता है कि (अपने प्रभु के सामने) झुक जाओ तो नहीं झुकते। बर्बादी है उस दिन नकारने वालों के लिए।
(ये अपराधी, इन्होंने क़ुरआन को नकार दिया है), अब इसके बाद वह क्या बात है जिसे ये मानेंगे?