सूरह 63
अल्-मुनाफ़िक़ून्
मदनी · 11 आयतें · 5 अनुच्छेद
परिचय
ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। पहली सूरह में मुसलमानों को ढोंगियों (मुनाफ़िक़ों) से, जो अब उद्दंड हो रहे थे, बच कर रहने का उपदेश किया गया है और दूसरी में उन्हें अपने परिवार और प्रियजनों से, जो सत्य के मार्ग में बाधा बन सकते थे, सावधान रहने को कहा गया है। फिर दोनों सूरतों में यह उपदेश किया गया है कि लोग परलोक (आख़िरत) को ही असली सच्चाई समझकर, परमेश्वर के मार्ग में दान (इन्फ़ाक़) करें और परमेश्वर और उसके रसूल की प्रसन्नता के मार्ग में हर प्रकार के त्याग और बलिदान के लिए तैयार रहें।
दोनों में संबोधन मुख्य रूप से मुसलमानों से है, और इनकी विषय-वस्तु से यह स्पष्ट होता है कि ये मदीना में पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के प्रचार के शुद्धिकरण (तज़्कियह) और परिष्करण (तत्हीर) के चरण में अवतरित हुई हैं।1
टिप्पणियाँ 1
- तज़्कियह और तत्हीर के शब्द ग़ामिदी साहब द्वारा समान अर्थों में ज्ञान और क्रिया से संबन्धित चीज़ों के शुद्धिकरण के लिए प्रयुक्त किए गए हैं; तत्हीर शब्द का एक अतिरिक्त अर्थ होता है वर्गीकरण या मानने वालों को नकारने वालों और ढोंगियों से अलग करना। जहां भी यह अतिरिक्त अर्थ अभिप्राय होता है, वहां ग़ामिदी साहब ने इसे सूरह की व्याख्या में स्पष्ट किया है। [अनुवादक] ↩
पहली सूरह—अल्-मुनाफ़िक़ून—का विषय मुसलमानों को यह बताना है कि मुनाफ़िक़ पूरी तरह झूठे हैं। वे उनकी बातों और बात-बात पर क़समें खाने से प्रभावित न हों, क्योंकि उनका उद्देश्य मुसलमानों को दान से रोकना है और इस प्रकार वे उन्हें परमेश्वर और उसके रसूल से दूर कर देना चाहते हैं।
दूसरी सूरह—अत्-तग़ाबुन—का विषय उन्हें यह बताना है कि तुम्हारे शत्रु तुम्हारे घर में भी हो सकते हैं। इसलिए सावधान रहो कि असली चीज़ ये बीवी-बच्चे और घर-परिवार नहीं हैं। दुनिया के संकटों का डर दिखाकर ये तुम्हें परलोक (आख़िरत) के बारे में शंकाओं में डाल रहे हैं, जबकि असली चीज़ परलोक है, हार-जीत का दिन वास्तव में वही है। यदि उसमें सफलता चाहते हो, तो परमेश्वर और उसके रसूल की प्रसन्नता चाहने के मार्ग में त्याग और बलिदान के लिए तैयार रहो और इस मामले में न किसी आलोचक की आलोचना की परवाह करो और न किसी सल्लाह देने वाले की सलाह की।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
ये मुनाफ़िक़ जब तुम्हारे पास आते हैं तो कहते हैं: हम गवाही देते हैं कि निस्संदेह आप परमेश्वर के रसूल हैं। हाँ, परमेश्वर जानता है कि निस्संदेह तुम उसके रसूल हो, परंतु परमेश्वर गवाही देता है कि ये मुनाफिक पूर्णतः झूठे हैं। इन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना रखा है और परमेश्वर के मार्ग से रुक गए हैं। सत्य यह है कि अत्यंत बुरा है जो ये कर रहे हैं। यह इसलिए है कि उन्होंने पहले मानने का दावा किया, फिर कुफ़्र अपना लिया तो इनके दिलों पर मुहर कर दी गई। सो अब ये कुछ नहीं समझते।
इन्हें जब देखो तो इनकी मनोहर काया तुम्हें भाए और यदि बोलें तो इनकी बातें तुम सुनते रह जाओ। इनका उदाहरण ऐसा है मानो लकड़ी के कुन्दे हैं जिन्हें (वस्त्र पहना कर) दीवार से टिका दिया गया है। हर संकट को अपने ही ऊपर टूटता समझते हैं। यही शत्रु हैं, सो इनसे बच कर रहो। परमेश्वर इन्हें नष्ट करे, इनकी बुद्धि किस प्रकार उलट गई है!
(ऐसे दुर्भाग्यशाली हैं कि) जब इनसे कहा जाता है कि आओ, परमेश्वर का रसूल तुम्हारे लिए क्षमा की प्रार्थना करे तो सर मटकाते हैं और तुम इनको देखते हो कि बड़े अहंकार के साथ मुँह फेर लेते हैं। तुम इनकी क्षमा चाहो या न चाहो, इनके लिए समान है। परमेश्वर इन्हें कदापि क्षमा नहीं करेगा, इसलिए कि परमेश्वर इस प्रकार के अवज्ञाकारी लोगों का कभी मार्गदर्शन नहीं करता।
यही हैं जो कहते हैं कि उन लोगों पर कुछ ख़र्च न करो जो परमेश्वर के रसूल के पास आ कर इकट्ठा हुए हैं ताकि वे बिखर जाएं, और सत्य यह है कि धरती और समस्त आकाशों के कोष परमेश्वर ही के हैं, परंतु ये मुनफ़िक़ समझते नहीं हैं। कहते हैं कि हम मदीना वापस पहुंच गए तो प्रभावशाली लोग इन बे-हैसियत लोगों को वहां से निकाल बाहर करेंगे, यद्यपि प्रभाव तथा प्रभुत्व तो वास्तव में परमेश्वर और उसके रसूल और उनके मानने वालों के लिए है, परंतु ये मुनफ़िक़ जानते नहीं हैं।
हे मानने वालो, तुम्हारी संपत्तियाँ और तुम्हारी सन्तानें तुम्हें भी (इन मुनफ़िक़ों की तरह) परमेश्वर की याद से बेपरवाह न कर दें, और (याद रखो कि) जो ऐसा करेंगे, वही घाटे में पड़ने वाले होंगे। हमने जो कुछ तुम्हें प्रदान किया है, उसमें से (परमेश्वर के मार्ग में) दान करो, इससे पहले कि तुम में से किसी की मृत्यु का समय आ जाए, फिर वह (तड़प कर) कहे कि प्रभु, तूने मुझे कुछ और समय क्यों न दिया कि मैं तेरे मार्ग में दान करता और ऐसा करता तो आज सदाचारियों की श्रेणी में होता? यद्यपि जब किसी का समय आ पहुंचेगा तो परमेश्वर कदापि उसको ढील नहीं देगा और जो कुछ कम करते हो, परमेश्वर उससे भलीभांति परिचित है।