सूरह 31
लुक़्मान्
मक्की · 34 आयतें · 17 अनुच्छेद
परिचय
ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। पहली सूरह मानव प्रकृति पर आधारित धर्म (दीन-ए-फ़ित्रत) के जिन तथ्यों को हकीम लुक़मान के सन्दर्भ से प्रमाणित करती है, दूसरी में उन्हीं के बारे में लोगों की शंकाओं को दूर किया गया है जो उस समय सामने लाई जा रही थीं।
दोनों का विषय वही सचेत करना (इंज़ार) और शुभ सूचना देना (बशारत) है, जो पिछली सूरतों से चला आ रहा है और दोनों में मूल रूप से मक्का के क़ुरैश क़बीले के लोगों को संबोधित किया गया है।
इन सूरतों की विषय-वस्तु से यह स्पष्ट होता है कि मक्का में परमेश्वर के रसूल (स.) के प्रचार के इत्माम-ए-हुज्जत के चरण में ये उस समय अवतरित हुई हैं, जब मक्का से मदीना प्रवास (हिज्रत) और इस्लाम के नकारने वालों से संबंध तोड़ने (बराअत), तथा विजय और ईश्वरीय सहायता का समय निकट आ गया है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।
यह सूरह 'अलिफ़ लाम मीम' है। यह प्रज्ञा से भरे हुए ग्रंथ की आयतें हैं। उनके लिए जो अच्छे ढंग से कर्म करने वाले हैं मार्गदर्शन और दया बनकर उतरी हैं। ये जो नमाज़ का प्रबंध कर रहे हैं और ज़कात देते हैं, और यही हैं जो परलोक पर सच्चा विश्वास रखते हैं। यही अपने प्रभु के मार्गदर्शन पर हैं और यही सफलता पाने वाले होंगे।
इसके विपरीत लोगों में ऐसे भी हैं जो निरर्थक बातों के ग्राहक बनते हैं ताकि परमेश्वर के मार्ग से बिना किसी ज्ञान के भटकाएँ और उसकी आयतों का मज़ाक़ उड़ाएँ। यही हैं कि जिनके लिए अपमानजनक दण्ड है। इनमें से किसी को जब हमारी ये आयतें सुनाई जाती हैं तो बड़े अहंकार के साथ इस प्रकार मुँह फेर कर चल देता है, जैसे उनको सुना ही नहीं, जैसे कानों से बहरा है। तो इसे एक कष्टदायक दण्ड की शुभ सूचना सुना दो। अपितु जो लोग मान गए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, उनके लिए सुखदायक बाग़ हैं कि जिन में वे सदा रहेंगे। यह परमेश्वर का वचन पूरा होकर रहेगा और वह प्रबल है, बड़ा प्रज्ञावान है।
उसने समस्त आकाशों को ऐसे स्तंभों के बिना बना दिया है जो तुम्हें दिखाई दें और धरती में पर्वत जमा दिए हैं कि वह तुम्हें लेकर झुक न पड़े और उसमें सब प्रकार के प्राणी फैला दिए हैं। (देखते नहीं हो कि) हमने आकाश से पानी उतारा, फिर इसी धरती में सब प्रकार के लाभ देने वाले पदार्थ पैदा कर दिए हैं।
ये सब तो परमेश्वर का पैदा किया हुआ है, अब मुझे दिखाओ कि (तुम्हारी कल्पना के अनुसार) जो उसके अतिरिक्त हैं, उन्होंने क्या पैदा किया है? कुछ नहीं, अपितु ये दुष्ट स्पष्ट पथभ्रष्टता में हैं।
हमने यही प्रज्ञा लुक़्मान् को भी दी और उपदेश किया था कि परमेश्वर का आभार व्यक्त करो — और जो कृतज्ञता करेगा तो वह अपने ही लिए कृतज्ञता करेगा और जो अकृतज्ञता करेगा तो परमेश्वर को उसकी कोई परवाह नहीं, इसलिए कि परमेश्वर निस्पृह है, वह अपने आप में उत्तम गुणों वाला है।
(इसका अनिवार्य परिणाम है कि किसी को परमेश्वर का सहभागी न बनाया जाए)। याद करो, जब लुक़्मान् ने अपने बेटे को उपदेश करते हुए कहा था कि बेटा, परमेश्वर के साथ सहभागी न बनाना। सत्य यह है कि शिर्क बहुत बड़ा अन्याय है।
(इसमें संदेह नहीं कि) हमने मनुष्य को उसके माता-पिता के बारे में भी उपदेश किया है। उसकी माँ ने दुख पर दुख उठाकर उसको पेट में रखा और (जन्म के बाद) कहीं दो साल में जाकर उसका दूध छुड़ाना हुआ। (हमने उसको उपदेश किया है) कि मेरे आभारी रहो और अपने माता-पिता के, (और याद रखो कि अंत में) मेरी ही ओर लौट कर आना है। परंतु यदि वे तुम पर दबाव डालें कि किसी को मेरा सहभागी बनाओ जिसके बारे में तुम्हारे पास कोई प्रमाण नहीं है तो उनकी बात न मानना। अपितु, दुनिया में उनके साथ अच्छा व्यवहार रखना और अनुसरण उन्हीं के मार्ग का करना जिनका ध्यान मेरी ओर केंद्रित है। फिर तुमको मेरी ही ओर पलटना है। फिर मैं तुम्हें बता दूंगा जो कुछ तुम करते रहे हो।
(लुक़्मान् ने कहा था): बेटा, बात यह है कि कोई कर्म राई के दाने के बराबर भी हो तो चाहे वह किसी घाटी में हो या आकाशों में या धरती में, परमेश्वर उसे निकाल लाएगा। निस्संदेह, परमेश्वर प्रज्ञावान है, वह हर चीज़ से परिचित है।
बेटे, नमाज़ का प्रबंध रखो, भलाई का उपदेश करो और बुराई से रोको, और (इस मार्ग में) जो कठिनाई तुम्हें पहुंचे, उसपर धैर्य रखो। इसलिए कि यही कार्य हैं जिनपर अत्यधिक बल दिया गया है।
और लोगों से बेरुख़ी न करो और धरती में अकड़ कर न चलो, इसलिए कि परमेश्वर किसी अकड़ने और गौरव जताने वाले को प्रिय नहीं रखता। अपनी चाल में मध्यवर्ती आचरण अपनाओ और अपनी आवाज़ को नीचा रखो, सत्य यह है कि सबसे बुरी आवाज़ गधे की आवाज़ है।
(तुमने इसे भुला दिया)। क्या देखते नहीं हो कि परमेश्वर ही है जिसने धरती और समस्त आकाशों में जो कुछ है, सब तुम्हारे काम में लगा दिया है और अपने सब प्रकार के प्रकट और अदृश्य वरदान तुम पर पूरे कर दिए हैं? इसके होते हुए भी लोगों में ऐसे भी हैं जो परमेश्वर के बारे में बिना किसी प्रमाण, बिना किसी मार्गदर्शन और बिना किसी प्रकाशमान ग्रंथ के झगड़ते हैं। और जब उनसे कहा जाता है कि उस चीज़ का अनुसरण करो जो परमेश्वर ने उतारी है तो कहते हैं कि नहीं, हम तो उसी मार्ग का अनुसरण करेंगे जिस पर हमने अपने पूर्वजों को पाया है। क्या उस स्थिति में भी, जबकि शैतान उन्हें आग के दण्ड की ओर बुला रहा हो?
(नहीं, यह कुछ नहीं, अपितु) जो अपनी दिशा आज्ञाकारी होते हुए परमेश्वर की ओर करेगा और वह अच्छे ढंग से कर्म करने वाला भी है तो उसने मज़बूत रस्सी थाम ली है और अंत में सभी मामले परमेश्वर ही की ओर लौटने वाले हैं। और जिसने नकार दिया तो उसका नकारना तुम्हारे लिए दुख का कारण न हो, (हे पैग़ंबर)। इन सब की वापसी हमारी ही ओर है, फिर हम इन्हें बता देंगे जो कुछ ये करते रहे। निस्संदेह, परमेश्वर दिलों के भेद जानता है। हम इनको कुछ दिन लाभान्वित करेंगे, फिर इन्हें कठोर दण्ड की ओर खींच ले जाएँगे।
यदि तुम इनसे पूछो कि धरती और समस्त आकाशों को किसने पैदा किया है तो अवश्य कहेंगे कि परमेश्वर ने। कहो, आभार के योग्य भी परमेश्वर है। (ये जो कुछ मानते हैं, स्वयं उसी को झूठा कह रहे हैं)। नहीं, अपितु इनमें से अधिकांश जानते नहीं हैं। धरती और समस्त आकाशों में जो कुछ है, परमेश्वर ही का है। (वह इन के आभार का मोहताज नहीं है)। निस्संदेह, परमेश्वर निस्पृह और अपने आप में प्रशंसनीय है।
(सत्य यह है कि) धरती में जितने वृक्ष हैं, यदि वे सारे क़लम बन जाएं और समुद्र स्याही बन जाए, इस प्रकार के इसके बाद उसे सात समुद्र और स्याही दें, परमेश्वर की बातें तब भी लिखी नहीं जा सकतीं। निस्संदेह, परमेश्वर प्रबल है, वह बड़ा प्रज्ञावान है।
तुम सब को पैदा कर देना और (मरने के बाद) तुम्हारा उठा खड़ा करना (उसके लिए) ऐसा ही है, जैसे एक व्यक्ति का पैदा करना और उठा खड़ा करना। निस्संदेह, परमेश्वर सुनने वाला, देखने वाला है। तुमने देखा नहीं कि परमेश्वर रात को दिन में प्रवेश करता है और दिन को रात में प्रवेश करता है और सूरज और चाँद को उसने तुम्हारी सेवा में कर रखा है। सब एक निर्धारित समय तक चले जा रहे हैं। और देखा नहीं कि जो कुछ तुम करते हो, परमेश्वर उससे परिचित है? यह सब इस कारण है कि परमेश्वर ही सत्य है और जिनको ये उसके अतिरिक्त पुकारते हैं, वे मिथ्या हैं और इस कारण कि परमेश्वर ही सर्वश्रेष्ठ है, वही महान है।
तुमने देखा नहीं कि नौका परमेश्वर ही की कृपा से सागर में चलती है ताकि वह तुम्हें अपनी कुछ निशानियाँ दिखाए। सत्य यह है कि इसमें हर उस व्यक्ति के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं जो धैर्य करने वाला और आभारी हो। और जब लहर छतों के समान उसके यात्रियों को ढक लेती है तो केवल उसी के आज्ञापालन की प्रतिज्ञा करते हुए, वे परमेश्वर को पुकारते हैं। फिर जब वह उन्हें मुक्ति देकर भूमि की ओर ले आता है तो उनमें कुछ मार्ग पर रहते हैं और अधिकांश भटक जाते हैं। और हमारी निशानियों को तो वही सब नकारते हैं जो अत्यंत विश्वासघाती और अकृतज्ञ हैं।
लोगो, अपने प्रभु की पकड़ से बचो और उस दिन से डरो, जिस दिन न कोई पिता अपनी संतान के काम आएगा और न कोई संतान अपने पिता के कुछ काम आने वाली बन सकेगी। निस्संदेह, परमेश्वर का वादा सत्य है। सो दुनिया का जीवन तुम्हें कदापि धोखे में न डाले और न वह धोखेबाज़ तुम्हें परमेश्वर के बारे में कभी धोखा देने पाए। (पूछते हैं कि यह वादा कब पूरा होगा? कहो), उस घड़ी का ज्ञान केवल परमेश्वर के पास है। (देखते नहीं हो कि) वही बारिश बरसाता है और जानता है जो कुछ गर्भों में होता है। कोई नहीं जानता कि वह कल क्या कमाएगा और कोई नहीं जानता कि किस भूमि में मरेगा। (परंतु कोई बुद्धिमान क्या इन सब बातों को नकार सकता है)? सत्य यह है कि परमेश्वर ही ज्ञानी और जागरूक है।1
टिप्पणियाँ 1
- अर्थात् शैतान, जिसने धोका देने की प्रतिज्ञा कर रखी है। ↩