सूरह 107

अल्-माऊन्

मक्की · 7 आयतें · 2 अनुच्छेद

अक्षर
परिचय

ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। पहली सूरह क़ुरैश क़बीले के नेताओं, विशेष रूप से अबू लहब, के अपराधों को उजागर करती है, जबकि दूसरी सूरह इन अपराधों के दंडस्वरूप पवित्र क्षेत्र (हरम) के संरक्षण (तौलियत) के पद से उनके हटाए जाने की घोषणा करती है। इनकी विषय-वस्तु से यह स्पष्ट होता है कि पहली सूरह मक्का में पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के प्रचार के हिज्रत व बराअत के चरण में क़ुरैश के लिए अंतिम चेतावनी के रूप में अवतरित हुई है, जबकि दूसरी सूरह पैग़ंबर (स.) के लिए एक महान भविष्यवाणी (बशारत) के रूप में अवतरित हुई है।1

टिप्पणियाँ 1
  1. हिज्रत: प्रवास और मक्का से मदीना प्रवास। बराअत्: निर्णायक रूप से सत्य स्पष्ट हो जाने के बाद इस्लाम के नकारने वालों से संबंध तोड़ना। ↩

पहली सूरह — अल्-मा'ऊन् — में संबोधन की दिशा क़ुरैश की ओर है, और इसका विषय उनके नेतृत्व, विशेषतः अबू लहब तो यह यह बताना है कि उनके अपराधों के कारण उनके भाग्य में अब विनाश ही है।

दूसरी सूरह — अल्-कौसर — में संबोधन सीधे पैग़ंबर मुहम्मद (स.) से है, और इसका विषय उन्हें यह शुभ सूचना देना है कि पवित्र क्षेत्र (हरम) के संरक्षण (तौलियत) का पद अब उन्हें पाप्त होगा, और उनके शत्रुओं की जड़ सदा के लिए दुनिया से कट जाएगी।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।

أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ ﴿1﴾ فَذَٰلِكَ ٱلَّذِى يَدُعُّ ٱلْيَتِيمَ ﴿2﴾ وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ ﴿3﴾

तुमने देखा उस व्यक्ति को जो प्रतिफल के दिन को झूठा कहता है? यह वही तो है जो अनाथ को धक्के देता है और ग़रीब को भोजन कराने के लिए नहीं उभारता।

فَوَيْلٌ لِّلْمُصَلِّينَ ﴿4﴾ ٱلَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ ﴿5﴾ ٱلَّذِينَ هُمْ يُرَآءُونَ ﴿6﴾ وَيَمْنَعُونَ ٱلْمَاعُونَ ﴿7﴾

तो बरबादी है (हरम के पुरोहित) इन नमाज़ियों के लिए जो अपनी नमाज़ों की वास्तविकता से अनजान हैं। ये जो (उपासना का) दिखावा करते और आवश्यकता की कोई साधारण वस्तु भी किसी को देने के लिए तैयार नहीं होते।