सूरह 101

अल्-क़ारिअह्

मक्की · 11 आयतें · 3 अनुच्छेद

अक्षर
परिचय

ये दोनों सूरतें अपने विषय के अनुसार एक जोड़ा हैं। पहली सूरह क़यामत की जिस भयावह स्थिति से श्रोताओं को सचेत करती है, दूसरी सूरह में उसी संदर्भ में उनकी बेपरवाही पर उन्हें सावधान किया गया है। दोनों में संबोधन की दिशा क़ुरैश क़बीले के नेताओं की ओर है, और इनकी विषय-वस्तु से यह स्पष्ट होता है कि पिछली सूरतों की भाँति ये भी मक्का से मदीना प्रवास (हिज्रत) से कुछ समय पूर्व, मक्का में पैग़ंबर मुहम्मद (स.) के प्रचार के इत्माम-ए-हुज्जत के चरण में अवतरित हुई हैं।1

टिप्पणियाँ 1
  1. इत्माम-ए-हुज्जत: सत्य का इस प्रकार निर्णायक रूप से स्पष्ट हो जाना कि नकारने का कोई बहाना बाक़ी न रहे। ↩

पहली सूरह — अल्-क़ारिअह — का विषय लोगों को इस सत्य से अवगत करना है कि जिस प्रकार कोई व्यक्ति अचानक आकर दरवाज़ा खटखटाता है, उसी प्रकार क़यामत भी एक दिन उनके द्वार पर आ धमकेगी और उन्हें कब्रों से उठाकर उनके कर्मों के अनुसार उनके लिए स्वर्ग (जन्नत) और नरक (जहन्नम) का निर्णय सुना देगी।

दूसरी सूरह — अत्-तकासुर — का विषय इसी क़यामत के संदर्भ में उन्हें सचेत करना है कि दुनिया की दौड़ में एक-दूसरे से आगे निकलने की चाहत ने उन्हें इस सबसे महत्वपूर्ण सच्चाई से बेपरवाह कर दिया है। यदि वे यह जानते कि हिसाब करने का यह दिन उनसे अधिक दूर नहीं है, तो वे कभी भी इस प्रकार बेपरवाह न होते।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

परमेश्वर के नाम से जो सर्वथा दया है, जिसकी कृपा शाश्वत है।

ٱلْقَارِعَةُ ﴿1﴾ مَا ٱلْقَارِعَةُ ﴿2﴾ وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْقَارِعَةُ ﴿3﴾

खटखटाने वाली!

क्या है खटखटाने वाली!

और तुम क्या जानते हो कि क्या है खटखटाने वाली!

يَوْمَ يَكُونُ ٱلنَّاسُ كَٱلْفَرَاشِ ٱلْمَبْثُوثِ ﴿4﴾ وَتَكُونُ ٱلْجِبَالُ كَٱلْعِهْنِ ٱلْمَنفُوشِ ﴿5﴾

उस दिन लोग बिखरे हुए पतिंगों के जैसे होंगे और पर्वत धुनी हुई ऊन के समान हो जाएँगे।

فَأَمَّا مَن ثَقُلَتْ مَوَٰزِينُهُۥ ﴿6﴾ فَهُوَ فِى عِيشَةٍ رَّاضِيَةٍ ﴿7﴾ وَأَمَّا مَنْ خَفَّتْ مَوَٰزِينُهُۥ ﴿8﴾ فَأُمُّهُۥ هَاوِيَةٌ ﴿9﴾ وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا هِيَهْ ﴿10﴾ نَارٌ حَامِيَةٌۢ ﴿11﴾

फिर जिसके पलड़े भारी हुए, वह मनपसंद ऐश में होगा और जिसके पलड़े हल्के हुए, उसका ठिकाना गहरी खाई है। और तुम क्या समझे कि वह क्या है? दहकती आग है।